वे युवाओं के लिए आदर्श थे और रहेंगे

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आलोक जी के निधन की ख़बर सुनकर पहली चिंता हुई कि कौन लिखेगा अब बेबाक बातें। पत्रकारिता को अपने कर्म से कौन करेगा सार्थक। शाययद वही एक स्तम्भ थे, जो निडर पत्रकारिता को थामे हुए थे। मेरी व्यक्तिगत पहचान उनसे नहीं थी। लेकिन एकबार उनसे मिला था। वो हमारे कॉलेज आए थे। हम नौसिखिए पत्रकारों को ये बताने कि वो तिहाड़ क्यों गए थे? साथ ही साथ ये भी कह गए कि अगर जरूरत पड़ी तो तुम लोग भी ना घबराना, क्योंकि तिहाड़ से निकलने के बाद वो सीधा भोपाल माखनलाल विश्वविद्यालय ही आऐ थे।

ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे उनकी जन्मस्थली भिंड में काम करने का मौका मिला। मैं ठीक उनके घर के सामने रहता था। रोज उनके घर के आगे से गुजरता था तो यही सोचता था कि इस घर में आलोक तोमर रहते है। बहुत गर्व होता था, यह सोचकर कि हम ओलक तोमर के घर के आगे से गुजर रहे हैं। मै ये तो नहीं कहूंगा कि आलोक जी सभी नये पत्रकारों के लिए प्रेरणास्त्रोत थे। लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि वो तमाम युवाओं के लिए आदर्श थे और रहेंगे।

लेखक कांत शरण नेपाल वन टीवी में कार्यरत हैं.


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