कई लोगों के विश्‍वास को छल गया शातिर राजेश शर्मा

E-mail Print PDF

: कई पत्रकार बेरोजगार : हजारों बच्‍चों का भविष्‍य दांव पर : एक कहावत है सांप निकल गया तो फिर लकीर पीटने से क्या फायदा? इन दिनों यही हो रहा है रायपुर में. डालफिन स्कूल के संचालक, दैनिक नेशनल लुक एवं हिन्दुस्तान न्यूज़ के मैनेजिंग डायरेक्‍टर के फरार हो जाने के बाद भड़ास के माध्यम से पता चला कि राजेश ने फिल्मों में भी पैसा लगाया है, लेकिन राजेश की कहानी भी किसी फ़िल्म से कम नहीं है.

परन्‍तु मैं राजेश की कहानी की बजाए उसके कारगुजारियों और शासन-प्रशासन तंत्र की भूमिका के बारे में बताना चाहूंगा. सन 2005 में राजेश स्कूल में बतौर टीचर नौकरी किया करता था. उसके शातिर दिमाग ने बड़ी बारीकी से नेताओं और अफसरों के साथ-साथ शिक्षक बनकर पूरी शिक्षा प्रणाली का अध्ययन किया और शातिर दिमाग लेकर बाहर आया. डालफिन स्कूल के ब्रांड अम्बेसडर बने मुकेश खन्ना. सेलिब्रिटी और शिक्षा का एक दूसरे से कोई सीधा नाता नहीं है, बावजूद इसके शिक्षा विभाग पैसे लेकर स्कूल के पंजीयन में व्यस्त हो गया. साथ-साथ अपने गुनाहों को छुपाने के लिए नेशनल लुक पेपर का प्रकाशन भी शुरू कर दिया. रायपुर के कई वरिष्‍ठ पत्रकारों ने राजेश का साथ दिया. इस दरमियां अगर कोई आवाज़ उठी तो इन्हीं वरिष्ठों ने शर्मा के नमक का फर्ज निभाया.

खैर, राजेश अपना काम करता रहा. शक्तिमान भी छत्तीसगढ़ आते रहे और लोगों को अच्छी शिक्षा के लिया अपने बच्चों को डालफिन स्कूल में पढ़ाने के लिये प्रेरित करते रहे. उस वक़्त ऐसा लगता था कि शर्मा को छत्तीसगढ़ शासन ने शिक्षा के क्षेत्र के लिए अपना ब्रांडअम्बेसडर बना लिया है. शायद यही वजह रही होगी, तभी तो राजेश क्लास 12 तक की शिक्षा के लिये सभी बच्चों से 50000  से 100000 रुपए लेता रहा और इस बात के विज्ञापन सभी दैनिकों में प्रकाशित होते रहे.

राजेश का एक पैर रायपुर में तो दूसरा दिल्ली-मुंबई में होता था और सफ़ेद दाढ़ी वाला एक पत्रकार हमेशा उसके साथ होता था. कई हवाई यात्राएं भी पत्रकार ने राजेश के माध्यम से की. यह पत्रकार राजेश के लिए कितना अहम था इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि नेशनल लुक समाचार पत्र में काम करने वाले सभी पत्रकारों की सेलरी यही निर्धारित करता था. शर्मा ने व.डी.र. स्कीम बना कर लोगों से लाखों लूटे, कई समाचार पत्रों में सुर्खियां भी बनी, लेकिन शासन और प्रशासन पूरी तरह बेखबर बना रहा. कई बार लिखित शिकायत भी की गई.

सवाल उठता है कि आखिर क्यों राजेश भाग निकला. अगर मुख्यमंत्री खुद ही राजेश के समाचार पत्र के लिए लगाए गए करोड़ों के संयंत्र का उद्घाटन करेंगे तो लोगों का विश्‍वास भी बढे़गा. साथ-साथ पुलिस भी कार्रवाई करने से हिचकेगी. फ़िलहाल राजेश अपने शातिर दिमाग से करोड़ों लेकर फरार हो चुका है, लेकिन कई सवाल हैं जिनका जवाब अभी नहीं मिल सका है और न ही मिलने की संभावना है, क्‍योंकि रायपुर पुलिस सिर्फ वीआईपी ड्यूटी बनाजने में व्‍यस्‍त है.

क्या मुख्‍यमंत्री का प्रोटोकाल इतना कमजोर है कि बिना जानकारी लिये ही वो चोर-डाकुओं के कार्यक्रम में अपनी हाजरी लगाते हैं?  क्यों शिक्षा विभाग ने फीस वसूली के मामले पर ध्यान नहीं दिया? सवाल कई हैं - क्या रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अनिल पुसदकर  सिर्फ लुटेरों का साथ देने के लिए विराजमान हैं? अब क्या होगा उन बच्चों का भविष्य, जो उसकी स्‍कूल में पढ़ते हैं, क्‍या होगा उन पत्रकार साथियों और उनके परिवार का, अब कैसे दिन गुजरेगा इन पत्रकारों का जिन्हें मोहसिन खान ने ज्‍यादा तनख्‍वाह का लालच देकर नेशनल लुक लेकर आए थे. सवाल कई हैं पर जवाब कोई नहीं. कैसी विडम्बना है कि सब जानते हुए भी हम उसकी जय-जयकार करते हैं. जो गलत हैं सिर्फ इस लिये की उसके पास पैसा है. वो चाहे किसी के भी खून-पसीने का ही क्यों न हो? राजेश नहीं भागा बल्कि फिर एक बार टूटा है विश्‍वास जनता का. वजह तीन हैं पुलिस, पत्रकार और राजनेता.

जरीन सि‍द्दीकी

रायपुर


AddThis