सामने नहीं आया दंतेवाड़ा अग्निकांड का सच, अग्निवेश के काफिले पर हमला

E-mail Print PDF

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा के तिम्मापुर में 14 मार्च को नक्सलियों और सुरक्षा जवानों के बीच हुई मुठभेड़ के बाद ताड़मेटला, तिम्मापुर एवं मोरपल्ली में कथित रूप से जवानों द्वारा तीन सौ घरों में आग लगाने तथा महिलाओं को बेइज्जत किए जाने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैली हुई है. तिम्मापुर की सच्चाई हर कोई जानना चाहता है. क्या नक्सलियों ने कोई मनगढ़त कहानी गढ़ी है या जवानों ने अपनी क्रूरता के सारे हदों को पार किया है.

इस पूरे मामले पर से पर्दा हटाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश ने इस इलाके में जाने की कई मर्तबा कोशिश की लेकिन दंतेवाड़ा के दोरनापाल में शनिवार सुबह अग्निकांड की पड़ताल करने गए अग्निवेश को सलवा जुडूम समर्थकों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा. दंतेवाड़ा में सलवा जुडूम कार्यकर्ताओं ने चक्का जाम कर दिया और स्वामी अग्निवेश को दंतेवाड़ा जिले से बाहर निकाले जाने की मांग की. विरोध प्रदर्शन के दौरान सलवा जुडूम कार्यकर्ताओं ने अग्निवेश के दल से कंबल और कपड़े छीन लिए इतना ही नहीं इन लोगों ने अग्निवेश के विरोध में नारे लगाते हुए उन पर अंडे फेंके. अग्निवेश के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भारी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं.

इस विरोध प्रदर्शन के बाद सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश को बैरंग वापस सुकमा लौटना पड़ा. सुकमा लौटने के साथ ही उन्होंने राज्य शासन से सुरक्षा की मांग की. शनिवार दोपहर बाद फिर से कड़ी सुरक्षा के बीच सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश दलबल के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हुए लेकिन दोरनापाल में डेरा जमाए सलवा जुडूम समर्थकों ने स्वामी अग्निवेश के काफिले पर हमला बोल दिया. काफिले की गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई. कुछ निजी चैनल के पत्रकारों को बंधक बनाकर उनके कैमरे तोड़ दिए गए और अग्निवेश को आगे नहीं जाने दिया गया इस बीच अग्निवेश की सुरक्षा में लगे जवान मूकदर्शक बने रहे तमाशा देखते रहे. यह पूरा वाक्या यह बताने के लिए काफी है कि बस्तर में निरंकुश शासन किस तरह हावी है.

सच्चाई को सामने लाने के लिए जहां कुछ सामाजिक कार्यकर्ता प्रयासरत है वहीं कुछ सरकारी नुमांइदें ताड़मेटला, तिम्मापुर एवं मोरपल्ली की सच्चाई को सामने नहीं लाने देना चाहते. चूंकि आदिवासियों के घर जलाए जाने की घटना के पीछे पुलिस जवानों का हाथ है इसलिए प्रशासन भी नहीं चाहती कि आदिवासियों के जमींदोज हो चुके घरों के पीछे सच्चाई सामने आ सके. स्वामी अग्निवेश उस समय दंतेवाड़ा के लिए रवाना हुए थे. जब  ताडमेटला के ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों के जवानों ने उनके 207 घर जला दिये. साथ ही गांव के अनाज गोदामों में भी आगजनी की गई. इसके अलावा जवानों ने मोरपल्ली गांव में भी 30 और सीमापुर में 50 घर जला दिए.

इसकी सच्चाई का पता लगाने स्वामी अग्निवेश और श्री श्री रविशंकर के प्रतिनिधि ऋषि मिलिंद घटनास्थल का दौरा करने निकले थे. लेकिन उन्हें वहां तक पहुंचने नहीं दिया जा रहा है. स्वामी अग्निवेश का कहना है कि अगर यह सच साबित हुई तो सरकार को न्यायिक जांच के लिए तैयार रहना चाहिए. सुरक्षा बलों पर आरोप है कि 14 मार्च को उन्होंने चिंतलनार के इलाके में कुछ गांव में जमकर उत्पात मचाया और आदिवासियों के 300 घरों को जला दिया. जवानों ने महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया और कुछ ग्रामीणों की हत्या भी कर दी. छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समस्या गंभीर है. नक्सल प्रभावित इलाके भय से अक्रांत हैं. जहां सरकार द्वारा खींची जा रही लकीर पर लाल सलाम अपना दस्तक दे रहा है. बस्तर का इलाका माओवादियों द्वारा छेड़े गये युद्ध से ग्रस्त है और सुरक्षा बलों के समक्ष ये लोग जबरदस्त चुनौती पेश कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षाबलों के कुछ गैर-जिम्मेदार रवैये से बस्तर के आदिवासी शासन के खिलाफ बंदूक थामने पर मजबूर हैं.

आरके गांधी स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार हैं.


AddThis