बिहार में अब खबरें वही, जो सरकारी विज्ञापन दिलाए

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बिहार की मीडिया में खबरें वही बनती है, जिससे सरकार खुश रहे और सरकारी विज्ञापन मिलता रहे. ऐसा कोई भी मीडिया हाउस नहीं हैं, जो सरकार के खिलाफ मुंह खोलने की कोशिश करे. खबरें वही बनाई जाती हैं, जिससे सरकार का मन मोह लिया जाये. बेचारे पत्रकार भी ऐसी खबर लिखते हैं, जिससे विज्ञापन पर रोक न लगे. वैसे भी सरकार की कमियों पर खबरें अखबार में छापी नहीं जाती हैं, तो बेचारे पत्रकार क्‍या करें.

जब सुबह जनता ऐसी खबरों के बारे में पत्रकार से पूछती हैं तो पत्रकार के पास जवाब नहीं होता देने को. खबरे ये नहीं बनती कि करोड़ों के मालिक का नाम बीपीएल सूची में हैं, इंदिरा आवास का पैसा साहब डकार गये हैं, गांव में किरासन नहीं मिलता गरीबों को समय से, मनरेगा का पैसा नहीं मिलता काम करने वालो को. अब खबरें वही बनती हैं जिसमे मीडिया का अपना स्वार्थ हो.

लेखक मनीष कुमार बिहार में पत्रकार हैं.


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