''उनके साथ ऐसे काम करना जैसे मेरे साथ हो''

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मैं सीएनईबी से जुड़ा ही था कि एक दिन मैं अपने बड़े भाई और पिता तुल्य आदरणीय पंकज शुक्ला जी से बात करते-करते जब सीएनईबी के रिसेप्शन पर आया तो वहां पर मेरी पंकज जी ने आलोक जी से मुलाकात कराई, तब उन्होंने कहा इटावा के पास बसे नगला तोर का मैं भी रहने वाला हूँ और एक लम्बे समय से उनका परिवार मध्य प्रदेश के भिण्ड में रह रहा है. उसके कुछ समय बाद एक दिन उनका फोन आया नीरज मैं कल सुबह शताब्दी से इटावा आ रहा हूँ, मुझे भिण्ड जाना है.

मैंने उन्हें सुबह ट्रेन से रिसीव किया और खुद अपने एक दोस्त की गाड़ी से उनको भी ले गया. ये मेरी पहली यात्रा थी. मैं गाड़ी चला रहा था और मेरे बगल वाली सीट पर आलोक जी बैठ कर सिगरेट पीते हुए मुझे पत्रिकारिता के कुछ गुण और दोष सिखाते हुए सफ़र कर रहे थे. बात करते हुए जब उन्होंने मेरे टीवी चैनल गॉडफादर उमेश उपाध्याय जी का नाम लिया तो मैंने उनसे कहा वे मेरे बड़े भाई हैं.

आलोकजी

उसके बाद मैं जब भी सीएनईबी जाता तो उनसे जरूर मिलता. मैंने एक दिन सीएनईबी में काम करना बंद कर दिया और फिर जब मैं उनसे मिलने वहां पहुंचा तो उन्होंने कहा मेरे केबिन में आ जाओ. मैंने कहा मैं अन्दर नहीं आऊंगा तो वे बोले अच्‍छा रूको मैं ही आता हूँ. जब वे बाहर आये तो मैंने कहा मुझे टीवी चैनल में काम करना है. उन्होंने कहा नीरज तुम वहां चले जाओ और बोलना मुझे आलोक तोमर ने भेजा है. मैंने कहा आप फोन कर दो. वे बोले जाकर उनसे बोलना मैं इटावा से आया हूँ और आलोक तोमर का छोटा भाई हूँ. इस पर मैंने जब उनको बताया कि उन्होंने मुझे काम दे दिया है, तब आलोक जी ने कहा जब तक वे इस चैनल में हैं तो तुम उनको ये समझ कर उनके साथ काम करना जैसे मेरे साथ हो. मैं आज भी वहीं काम कर रहा हूँ.

लेखक नीरज मेहरे इटावा में पत्रकार हैं.


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