लालाओं की नौकरियों से पेट भरने के बाद की जेपी कथा

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जय प्रकाश जी के लिखे इस निजी पत्र में ऐसा कुछ भी निजी नहीं है जिसे हम हिंदी वाले एक साथ मिल बैठकर बांच न सकें. सो, गांव से लौटकर आज इस पत्र को देखा तो इसे प्रकाशित कर देना ही उचित समझा. ऐसी कहानियों, बातों, सच्चाइयों से हम हिंदी वालों का सीना गर्व से फूलता है. कि, चलो कोई तो है, कुछ लोग तो हैं जो इस मालिक-नौकर की इस दुनिया में नौकर के पाले से निकल कर मालिकों से मुकाबिल हैं, अपने दम-बल-मेधा के सहारे. -यशवंत


प्रिय यशवंत भाई, उम्मीद है स्वस्थ सानंद होंगे. होली से ठीक पहले मोबाइल फोन में खराबी आ गई इस लिए ना तो शुभकामना संदेश भेज सका, ना ही अभी बात कर पा रहा हूँ, पर आपसे सहयोग की उम्मीद से ये खत लिख रहा हूँ. मैं नहीं चाहता की मेरी बात प्रेस - रिलीज़ की तरह आए, इसलिए आपसे निजी तौर पर मुखातिब हूँ.

दिल्ली प्रेस छोड़े हुए मुझे एक साल होने को आए हैं, आपसे पिछली मुलाकात मे बताया था, कि अब लालाओं की नौकरी से पेट भर गया है, इसलिए अपना काम करूँगा. www.facenfacts.com अँग्रेज़ी में तब तक शुरू भी कर चुका था, ऑन-लाइन मीडिया की चुनौतियों के बारे में आप मुझसे बेहतर जानते हैं और आपकी सफलता नयों के लिए नज़ीर है...इसलिए अपने काम के बारे में कुछ तथ्य आपको बता रहा हूँ. अगर समाचार लायक लगे और खबर बनवा देंगे ,तो सहयोग होगा.

www.facenfacts.com की शुरुआत दिल्ली प्रेस छोड़ने के बाद 15 अगस्त 2010 को कुछ खास दोस्तों की मदद से अँग्रेज़ी में की थी. दिल्ली प्रेस की संपादकीय समन्वयक रही, अँग्रेज़ी की पत्रकार प्रीति प्रकाश इसकी संपादक बनीं.हमारा मकसद इंटरनेट के समंदर में खोते जा रहे सूचना और तथ्य के घालमेल को छान-पोंछ कर एक जगह परोसने का था. 2008 में मीडिया के हलके में कंसल्टेंसी देने के लिए बनी कंपनी ड्रीम प्रेस कंसलटेंट्स इसकी प्रमोटर रही. यह कंपनी पहले प्राइवेट लिमिटेड थी, अभी लिमिटेड है.

15 अगस्त 2010 को जब www.facenfacts.com शुरू हुआ, तो अलेक्सा पर इसकी रॅंकिंग 1 करोड़ थी. पहला लक्ष्य इंडिया टुडे जैसे पत्रिका सेगमेंट वाले पोर्टलों को पीछे छोड़ने का था. आज हम भारत और विश्व दोनों ही जगहों पर इंडिया टुडे से काफ़ी आगे हैं. indiatoday की रैंकिंग विश्व में 279,135 है, तो अपनी 68,727. भारत में वह 67,629 हैं तो www.facenfacts.com 12,557. फेस एन फैक्ट्स पर समाचारों , लेखों को बराबर की तवज्जुह मिलती है, खबरें ना केवल विस्तार से बल्कि तथ्यों के साथ उपलब्ध हैं. कई गंभीर लेखक, पत्रकार, साहित्यकार अनवरत हमसे जुड़े हैं.

इस बीच ड्रीम प्रेस कंसलटेंट्स 1 जनवरी 2011 से www.talkingviews.com और www.jantajanardan.com नामक दो नये पोर्टलों की शुरुआत की . ये पोर्टल अपने लोगों को सुझाव, शिकायतें, जानकारी, विचार, उम्मीदें , सपने, सृजन, साहित्य और दोस्ती करने का भारतीय मंच मुहैया कराने के उद्देश्य से लाए गये. अपना मकसद ओर्कूट, फेसबुक, ट्विटेर का भारतीय मिला-जुला रूप मुहैया करने का है. लक्ष्य काफ़ी बड़ा है और मंज़िल दूर. पर अपने लोगों के प्यार के भरोसे ज़्यादा दूर नहीं, यह उम्मीद है.

मूलतः मैं हिन्दी का आदमी,  इसलिए आज से फेस एन फैक्ट्स हिन्दी की मार्फत पूरे एक साल बाद www.facenfacts.com/hindi/   लॉग-इन से अपने पाठकों के बीच हूँ. जैसा की आप जानते हैं, मई  2000 से एप्रिल 2010 तक लगातार 10 साल तक देश की सबसे ज़्यादा बिकने और पढ़ी जाने का दावा करने वाली पत्रिका के संपादकीय प्रभारी और अग्रलेखक के तौर पर मुझे राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति से लेकर रिक्शे वाले तक हर किस्म के पाठक मिले, इसलिए उनसे दूर तो  रहा ही नहीं जा सकता था..पर हिन्दी से पहले अँग्रेज़ी में क्यों आया? यह फेस एन फॅक्ट्स के पहले संपादकीय में लिखा है.

http://www.facenfacts.com/hindi/EditorialDetails/5/facenfacts-hindi.htm

हो सके और प्रकाशन योग्य लगे तो bhadas4media के पाठकों तक हमारी, यानी एक पत्रकार की - संघर्ष की कहानी को जगह देंगे. अगर bhadas4media पर मेरे संपादकीय का लिंक दे देंगे तो मेरी बड़ी मदद होगी, लोगों तक हिन्दी मे मेरे होने की सूचना और मेरी बात एक साथ पहुँच जाएगी. चाहें तो bhadas पर  उसे कॉपी भी कर सकते हैं.... सब आपकी मरजी....  और अगर किसी लायक ना लगे, तो पढ़ तो सकते ही हैं. फ़ैसला जो भी करें, फ़ोन की उम्मीद करूँगा.

सहयोग और जवाब की उम्मीद में.

सस्नेह

Jai Prakash Pandey

Managing Editor
Face n Facts
+91.11.9818157215
http://www.facenfacts.com
CEO,
Dream Press Consultants Ltd.
New Delhi-110075
http://www.dreampressconsultants.com


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