नाच सोनिया नाच, पर देख ले, लग गया है जाम

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: सोनिया गांधी को नाचते देखा है? नहीं न, तो लीजिए, यहां पर देख लीजिए : क्रिकेट के बुखार में पूरा देश तप रहा है. भारत जीत क्या गया, देश में मानो 1947 की आजादी सरीखी जश्न शुरू हो गया. क्या नेता, क्या जनता. सब मगन. सब नाचने-झूमने लगे. हद तो तब हो गई जो गंभीर दिखने वाली सोनिया गांधी भी नाचने लगीं. कल दिल्ली के आईटीओ पर भारत की जीत के बाद तिरंगा लहरा रहे क्रिकेट प्रेमियों के जश्न में सोनिया गांधी भी शामिल हो गईं.

बताते हैं कि वे भी जमकर झूमीं-नाचीं. कांग्रेस अध्यक्ष के नाच को देखकर कई लोगों ने दांतों तले उंगलियां दबा लिया. कुछ का कहना था कि देश के नेताओं से ऐसे आचरण की उम्मीद नहीं थी, खासकर सोनिया गांधी से. यह सब हुआ कल रात 11 बजे. आईटीओ चौक के पास बहादुर शाह जफर मार्ग पर सोनिया के नाच के कारण बहुत बड़ा जाम लग गया. पर नेताओं को इससे क्या मतलब. वे तो भड़की हुई भावनाओं में गोते लगाने के आदी हैं. बताते हैं कि सोनिया का काफिला उधर से गुजर रहा था. जब बहादुरशाह जफर मार्ग पर जश्न मना रहे क्रिकेट प्रेमियों ने सोनिया के काफिले को देखा तो उसे रोक लिया. यहां यह भी सोचने वाली बात है कि ब्लैक कैट कमांडो और जेड प्लस सुरक्षा से घिरीं सोनिया का काफिला भला रोका कैसे जा सकता है. संभवतः उन्होंने खुद रुकने का निर्णय लिया होगा.

पर कहा तो यही जा रहा है कि वे क्रिकेट प्रेमियों के आग्रह पर वह गाड़ी से निकलीं. फिर तिरंगा लहराते, हाथ मिलाते और विजयी भाव से युक्त उनका काफिला जनसमूह के संग हो चला. सोनिया ने लेक्चर भी दिया. उन्होंने कहा कि भारतीय टीम ने विश्वकप जीतकर देश का सिर ऊंचा किया है. सोनिया लोगों के साथ मिलकर ‘इंडिया-इंडिया’ और ‘वंदेमातरम’ की धुन भी गुनगुनाईं. सोनिया की इस नौटंकी के कारण आईटीओ चौराहे से दिल्ली गेट तक भयंकर जाम लग गया. गाड़ियां रेंगने लगीं. जाम में फंसे लोग क्रिकेट और सोनिया को गालियां दे रहे थे. पुलिस जाम से जबरन निजात पाने की कोशिश में लगे दिल्लीवालों से तू-तड़ाक कर रही थी और उन्हें उनकी औकात समझा रही थी. पर इससे सोनिया को क्या मतलब. सोनिया ने क्रिकेट के राजनीतिकरण का जो बेहद समझदार व सतर्क खेल खेला, उसे कुछ लोग समझ पा रहे हैं, और कुछ लोग ना-समझते हुए सोनियामय हुए जा रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले ही दिनों ट्रेन जाम करने वालों को फटकारा था और इसके लिए सरकारों को भी लताड़ा था. जाम लगाना अपराध है, तो यह नियम सब पर लागू होना चाहिए. सोनिया गांधी को अगर क्रिकेट जीत का जश्न मनाने का इतना ही शौक था तो वे अपने घर के आगे सबको बुलवा लेतीं और आराम से नाचती-गातीं. वहां टीवी वाले पहुंचकर पूरे देश को उनका नाच गाना लाइव दिखा देते. पर सोनिया ने बीच सड़क पर चल रहे जश्न में शरीक होकर न सिर्फ हजारों लोगों को जाम में फंसा डाला बल्कि अपने सतही व स्टंट वाले एप्रोच का भी परिचय दे दिया. घपलों-घोटालों-समस्याओं से घिरी केंद्र सरकार और सोनिया गांधी अगर नाच-गा कर या क्रिकेट के बुखार में तप रहे लोगों के साथ कदमताल करके खुद को बचाना या बरी करना चाहते हैं तो भूल जाएं. इस देश की जनता बहुत समझदार है. वोट के दिन आने पर वो सोनिया और मनमोहन की एक-एक करतूत का हिसाब करेगी.

वैसे, आपको क्या लगता है, सोनिया गांधी का इस तरह नाच-गाना और जाम लगाना ठीक था?

यशवंत

एडिटर

भड़ास4मीडिया


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