अन्ना साहब, क्या इससे भ्रप्टाचार खत्म हो जाएगा?

E-mail Print PDF

अंचल सिन्‍हाइससे पहले तक एक बार फिर लगने लगा था कि अब किसी भी तरह के जनांदोलन को पनपने का मौका नहीं है क्योंकि कोई चेहरा किसी जनांदोलन के नेतृत्व के लिए दिखता नहीं था। अब अन्ना हजारे जैसे लगभग गुमनाम या यों कहिए कि किसी एक राज्य में ही चर्चित नाम के सामने आने से एक आस जग गई है। लगता है कि गांधी- इंदिरा गांधी वाला गांधी नहीं- और जयप्रकाश के बाद नेतृत्व की जो खाली जगह बची थी उसके लिए एक नाम सामने आ गया है।

अन्ना हजारे के इस अनशन ने सरकार को भले ही चौकस कर दिया हो, पर इसका कोई बहुत प्रभावशाली परिणाम निकलेगा इसमें मेरे जैसे आदमी को थोड़ा संदेह है। 1972 में गुजरात में चिमनभाई पटेल की सरकार के खिलाफ ऐसा ही आंदोलन हुआ था पर उससे केवल उनकी सरकार ही गिरी थी। कोई आमूल बदलाव नहीं हो पाया था। उसके तुरंत बाद 1974 में बिहार में आंदोलन हुआ और तबतक गुमनामी में जी रहे जयप्रकाश नारायण अचानक एक ऐसे नेतृत्व के रुप में उभरे कि इंदिरा गांधी की सत्ता समाप्त हो गई। अब यह बात और है कि उनसे छीनी गई सत्ता को मोरारजी भाई और चरण सिंह जैसों की जिद और नासमझी ने जल्दी ही खो दिया और राजनीति में माहिर इंदिरा गांधी ने अनेक विरोधी नेताओं को अपना एजेंट बनाने में सफलता हासिल करके फिर सत्ता पर कब्जा जमा लिया। पर हमें याद रखना चाहिए कि जेपी आंदोलन भी मूलतः भ्रष्‍टाचार के विरुद्ध ही था।

अन्ना हजारे इस समय एक उम्मीद की तरह दिखने लगे हैं इसलिए देश भर के लोग उनके साथ होते दिख रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि क्या केवल एक जन लोकपाल बिल पास कर देने भर से देश से भ्रप्टाचार मिट जाएगा? हो सकता है कि एक दो दिन में सरकार झुक जाए और बिल पास कर देने का नाटक भी कर दे पर क्या इससे देश में बदलाव हो जाएगा? जेपी ने अपने आंदोलन के दौरान कहा था कि केवल सरकार बदलने से देश नहीं बदलेगा। इसके लिए हमारी राजनैतिक और आर्थिक व्यवस्था में पूरी तरह बदलाव होना चाहिए। आज अन्ना हजारे और उनके तमाम समर्थकों को केवल रोमांचकारी काम तक सीमित नहीं रहना चाहिए और इस आंदोलन को व्यवस्था बदलने के आंदोलन के रुप में बदलने की तैयारी करनी चाहिए।

अब जब देश भर के छात्र, फिल्मी सितारे, वकील, दूसरे सामाजिक कार्यकर्ता और तमाम लोग अन्ना हजारे के साथ होने का दावा कर रहे हैं तो उन्हें यह भी समझना ही चाहिए कि केवल एक बिल पास कराने से व्यवस्था नहीं बदलती। ठीक है कि इससे एक उम्मीद जरुर बंध जाती है, लेकिन कांग्रेस या उससे पैदा हुई दूसरी पार्टियों की सरकार जबतक बनती रहेगी तबतक देश की वर्तमान व्यवस्था नहीं बदल सकती। इस समय जो तीन महारथी और महान कहे जाने वाले अर्थशास्त्री देश की अर्थव्यवस्था चला रहे हैं, क्या वे अमरीकी पूंजीवाद की दलाली नहीं करते? जो लोग विश्वबैंक और आईएमएफ की रोटी खाते रहे हों, क्या वे किसी भी जनपक्षीय व्यवस्था को पनपने देंगे? ऐसे में एक बिल पास करा देने से कितना लाभ जनता को मिलेगा?

आज एक सिपाही 50 रुपए से बात शुरू करता है और हजारों तक जाता है और नहीं मिलने पर किसी भी निरपराध व्यक्ति को किसी भी केस में फंसाने की खुलेआम धमकी देता है। किसी भी आफिस में जाएं तो चपरासी से लेकर बाबू तक और बड़े अधिकारी तक रिश्वत की लालच भरी आंखों से ही सामने वाले को देखता है। यह हालत किसी भी विभाग के किसी भी आफिस में कोई भी देख सकता है। किसी भी राजनैतिक दल को चुनाव लड़ने के लिए करोड़ों और अरबों रुपयों की दरकार होती है जिसके लिए वह किसी बड़े व्यापारी के सामने खड़ा रहता है। व्यापारी जितना देता है उससे कई गुना ज्यादा बाद में जनता से ही लूटता है। क्योंकि हम ऐसी ही व्यवस्था में जी रहे हैं जहां पैसा ही प्रमुख चीज बन गई है।

हमारी सरकारें कागजी आंकड़े दिखाकर, शेयर बाजार में चढ़ाई को बताकर, जीडीपी का नाम लेकर देश की प्रगति का ढोल पीटता है और हम खुश होकर कहते हैं कि हम बहुत तरक्की कर रहे हैं। हम भूल जाते हैं हमारे ही देश के 65 फीसदी से ज्यादा लोग 20 रु प्रतिदिन की आमदनी पर जी रहे हैं। ऐसे में एक बिल पास करा देने से देश से भ्रप्टाचार खत्म हो जाएगा? लेकिन फिर भी अगर यह शुरुआत है और इससे देश की पूरी राजनैतिक और आर्थिक व्यवस्था बदलने का कोई रास्ता खुलता है तो हमें इसका पूरा पूरा समर्थन करना ही चाहिए।

मेरे जैसा आदमी इतना जरूर कहना चाहता है कि देश में कम से कम महात्मा गांधी की विकेंद्रित अर्थव्यवस्था का जन्म होना चाहिए और पूंजी को केंद्र से गांव तक नहीं, गांव से दिल्ली तक लाने वाला रास्ता बनाने की तैयारी करनी चाहिए। क्या अन्ना हजारे इस मौलिक बात को ध्यान में रखकर अपने आंदोलन को एक लंबी लड़ाई की ओर ले जाएंगे?

लेखक अंचल सिन्हा बैंक के अधिकारी रहे, पत्रकार रहे, इन दिनों उगांडा में बैंकिंग से जुड़े कामकाज के सिलसिले में डेरा डाले हुए हैं. अंचल सिन्‍हा से सम्‍पर्क उनके फोन नंबर +256759476858 या ई-मेल - This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it के जरिए किया जा सकता है.


AddThis
Comments (6)Add Comment
...
written by madan gopal brijpuria, May 05, 2011
मे आपका सहयोग चाहता हू | ईश्वर कि कृपा से मेरे विचार मे एक आईडिया आया
है | यदि आप भी उस आईडिया को उचित समझते हो तो आप का सहयोग चहिये |
भारत कि तात्कालिक समस्याए है भ्रस्टाचार ,आतंकबाद ,नकली नोट ,बेईमानी
,मिलावट खोरी ,दुराचार इन सभी पर काबू पाने के लिए सभी लोगो का मानना है
कि कड़े नियम बनाये जाये |जबकि जब से जो जो नियम बनते है उसी नियम को
पालन करने बाला तुरंत बेईमानी करने लगता है | मेरे बिचार से हर बुराई कि
जड़ मुद्रा है | जब तक देश मे या प्रथ्वी पर मुद्रा हस्तांतरित बाली चलती
रहेगी तब तक कोई समस्या का हल नहीं मिल पायेगा |
मेने ईश्वर के आशीर्वाद इसका हल बना लिया है |
देश मे मुद्रा बंद करके बैंक द्वारा लेनदेन होना चाहिए |
मेरे पास पूरा प्लान है जिसमे हर रूकावट का उत्तर है |
उसे पूरा लिखकर भेजना मेरे लिए मुश्किल है |
मे सिर्फ फ़ोन पर ही बिस्तर से बता सकता हू | क्योकि मेरी आदत मे नहीं है
| पूरा लिख पाना |
आपका
मदन गोपाल ब्रिजपुरिया
करेली म . प्र .
contect no 09300858200
07793270468
id
[email protected]
...
written by madan gopal brijpuria, May 05, 2011
मे आपका सहयोग चाहता हू | ईश्वर कि कृपा से मेरे विचार मे एक आईडिया आया
है | यदि आप भी उस आईडिया को उचित समझते हो तो आप का सहयोग चहिये |
भारत कि तात्कालिक समस्याए है भ्रस्टाचार ,आतंकबाद ,नकली नोट ,बेईमानी
,मिलावट खोरी ,दुराचार इन सभी पर काबू पाने के लिए सभी लोगो का मानना है
कि कड़े नियम बनाये जाये |जबकि जब से जो जो नियम बनते है उसी नियम को
पालन करने बाला तुरंत बेईमानी करने लगता है | मेरे बिचार से हर बुराई कि
जड़ मुद्रा है | जब तक देश मे या प्रथ्वी पर मुद्रा हस्तांतरित बाली चलती
रहेगी तब तक कोई समस्या का हल नहीं मिल पायेगा |
मेने ईश्वर के आशीर्वाद इसका हल बना लिया है |
देश मे मुद्रा बंद करके बैंक द्वारा लेनदेन होना चाहिए |
मेरे पास पूरा प्लान है जिसमे हर रूकावट का उत्तर है |
उसे पूरा लिखकर भेजना मेरे लिए मुश्किल है |
मे सिर्फ फ़ोन पर ही बिस्तर से बता सकता हू | क्योकि मेरी आदत मे नहीं है
| पूरा लिख पाना |
आपका
मदन गोपाल ब्रिजपुरिया
करेली म . प्र .
contect no 09300858200
07793270468
id
[email protected]
...
written by संजय बनारसी, April 08, 2011
आपकी चिंताए जायज हैं अंचल जी। लेकिन सड़ांध के बाद ही ऐसी नौबत पैदा होती है। और कुछ नहीं मुझे तो छोटी मोटी क्रांति लग रही है, जहां देखों अन्‍ना की बात हो रही है। समर्थन हो रहा है थोड़ी बहुत आलोचनाएं हो रही हैं। अब अगर आपकी आशंका सही है और कुछ भी नहीं हो तब भी ये क्‍या कम है कि भ्रष्‍टाचार से कराह रहा आदमी सामने तो आया। हाथ से हाथ मिलाकर खड़ा हुआ, यही रहा तो हो सकता है कि कल कुछ हो जाएं। आखिर आपने भी अपने विषय में ट्रायल एंड एरर की थ्‍योरी पढी होगी। मुर्दा बने रहने से तो अच्‍छा है जो कुछ हो रहा है। अराजकता तो नहीं हो रही। लूट मार तो नहीं हो रही। खाली अहिंसा से भ्रष्‍टाचार को भगाने की बात हो रही है। इस चेतना में आपको गलत क्‍या दिख रहा है। अब भगवान आकर आंदोलन करें तभी गारंटी हो सकती है नहीं तो गारंटी इस मृत्‍युलोक का प्राणी तो नहीं दे सकता।
...
written by arun sharma, April 08, 2011
aap ne bahut accha likha hai
...
written by मदन कुमार तिवारी , April 08, 2011
सर जी यह आंदोलन पुरी तरह भटकाने वाला है , जन लोकपाल निल का मसौदा पढने पर पता चल जायेगा । अभी जनता अक्रोशित है । जरुरत है उसे अक्रोशित रहने दे , उसके आक्रोश के डर से शायद कुछ सुधार हो या सुधार के लिये राजनीतिक स्तर पर एक सार्थक पहल शुरु हो । लेकिन अगर इस आक्रोश एक व्यर्थ के बिल को पास करवाने तक सिमित कर दिया गया तो फ़िर बहुत प्छताना पडेगा । एक बार गुब्बार निकल गया तो फ़िर कुछ नही होगा । इस बिल के ड्राफ़्ट करने वालों से लेकर अन्ना हजारे के आंदोलन की शुरुआत से जुडे लोगों को देखेंगे तो सचाई पता चल जायेगी कि किस तaह के oोगो का खेल है यह और उनकी मंशा क्या है ।
...
written by rashbihari dubey, April 08, 2011
inn jaise log khali ansan hikar sakte hain.
are chor neta aur adhikari ko laat juta karne se sudhrega ,ansan se nahi.

Write comment

busy