अपने ऊपर लगे आरोपों पर पवन कुमार भूत ने दी सफाई

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पवन  कुमार भूत: मेरी तरक्‍की से जलने लगे हैं कुछ लोग : ''पुलिस व प्रेस के नाम पर ठगी का गोरखधंधा'' समाचार किन्हीं लखन सालवी द्वारा आपकी बहुचर्चित हिन्दी पोर्टल 'भड़ास4मीड़िया' पर देख आश्चर्य और दुःख दोनों हुआ। किसी और तथाकथित वेबसाइट और अखबार ने ऐसा किया होता तो मैं नजरअंदाज कर डालता पर मेरी नजर में यशंवत जी व 'भड़ास4मीड़िया' का सम्मान है, इसी कारण सच को सामने लाने का विनम्र आग्रह करता हूं।

1. दस हजार में बंट रहा है प्रेस कार्ड - सच यह नहीं है, सच यह है कि हमारी तरफ से विज्ञापन संग्रह की यह एक योजना है और विश्वसनीय स्तर के कुछ प्रतिष्ठित स्नातक व हमारे शुभचिंतक जिनसे हमें विज्ञापन अनुदान मिलता है, उन्हें हमने "Associate Reporter" का कार्ड मुफ्त में दिया है। यह ठीक वैसे ही है जैसे "IBN 7 की Citizen journlist की मुहिम" इस पत्रिका का तो अपना ईमानदार आधार है, राष्ट्रीय स्तर की पत्रिका को चलाने में किस तरह के संसाधन चाहिये और उनके लिए कितने समझौते करने पड़ते हैं। यह किसी से छुपा नहीं है- हमारी तरफ से पत्रकारिता की गरिमा से किसी भी कीमत पर कभी कोई गलत काम नहीं किया गया।

2. किरण बेदी नहीं हैं साथ- सच है यह, पूरा सच है- 1990 में बीस साल से ज्यादा हो गये ''पुलिस पब्लिक प्रेस'' का जन्म हुए- 1500 से ज्यादा लोग, अठारह साल का पवन भूत, दस आईपीएस, चार मंत्री, परिवार के 40 हजार रुपये की लागत से पहला कार्यक्रम रिसड़ा हुगली में कर चुका हूं। कभी भी कहीं भी किरण बेदी का नाम इस्तेमाल नहीं किया गया। 50 से ज्यादा सेमिनार किये हैं- हमारे साथ माननीय किरण जी स्वंय आकर जुड़ी थीं। एक कार्यक्रम हमने रखा था- उन्होंने शिरकत की बस इतना ही- हां, व्यक्तिगत स्तर पर मैं उनका सम्मान करता हूं करता रहूंगा, उनसे मुझे प्रेरणा मिलती है। ज्यादा सच जानना हो तो किरण जी की बेवसाइट पर देख लें।

हमारा National Toll Free No 1800-11-5100 सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक पिछले 5 सालों से अनवरत कार्यरत है- MTNL Delhi को लगभग 2 लाख रुपये का भुगतान इस बाबत सबसे बड़ा सबूत है।

3. 18 बैंकों में खाते - सच हैं यह भी। मेरी व्यक्तिगत इच्छा है कि विश्व के सभी बैंकों मेरे खाते हों, लगभग 100, किसी को कोई आपत्ति। सारे खाते इन्कम टैक्स से सम्बंद्ध है, मेरे वेबसाइट पर उपलब्ध हैं, यह कौन सा अपराध है। सिवाय मेरी अदम्य इच्छा शक्ति, कड़ी मेहनत व सच्चाई के।

4. पत्रिका नहीं भेजता - कहीं यही एकमात्र मेरी कमजोर नस है। कुछ समय काल के लिए डाक विभाग के असहयोग व मेरे लखन सालवी, मुकेश पाठक जैसे कर्मचारियों के रिकार्ड गबन के कारण मैं पाठकों को पत्रिका समय पर नहीं भेज पाया। ईश्वर का शुक्रगुजार हूं अब यह काम पूरी ईमानदारी से किया जा रहा है और यह शिकायत दूर करने की जिम्मेवारी मेरी है। प्रयास जारी है।

प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, प्रेस कौंसिल, किरण बेदी, सोनिया गांधी इन सभी से शिकायत करने का सभी को अधिकार है। बिल्कुल सच है कुछ कमियां हमारे संस्थान में रही हैं, जैसे कि देश का सबसे बड़ा और पहला टेलीविजन चैनल जैन टीवी, जिससे आज हर कोई शिकायत करता फिरता है, किन्तु यह सच है कि हिन्दी टीवी पत्रकारिता के सैकड़ों स्वनामधन्य लोगों का यह चैनल पिता रहा है। आग्रह है, अगर किसी को किसी तरह की शिकायत है तो कृपया हमें 09310888388 पर भिजवायें। नकारात्मक सोच व काम से आप किसी की उन्नति नहीं रोक सकते।

और अंत में कड़ी मेहनत व सही सोच के साथ पायी गयी सफलता किसी के दिमागी दिवालियापन से खत्म नहीं होगी और अगर यह सब झूठ है, गोरखधंधा है तो पुलिस व प्रेस के नाम पर निकलने वाली हजारों पत्र-पत्रिकाओं की तरह यह भी बहुत जल्द ही काल-कवलित हो जायेगी। ध्यान रहे 1400 से ज्यादा पत्रिकायें पुलिस नाम से निकलती है और कहीं कोई करोड़पति नहीं बना।

मेरा मानना है पूरे देश में 'भड़ास4मीड़िया' जैसे एक अभिनव व अकेला प्रयास है और आप सफल हो रहे हैं, वैसे ही पुलिस पब्लिक प्रेस के काम को हमने बड़ी ईमानदारी व मेहनत से सफल किया है।

400 से ज्यादा युवा इसके साथ जुड़े हैं - ठगी करके रुपया कमाना हो तो दिल्ली जैसे शहर में लोग ''अवार्ड'' बांट कर घर चलाते हैं। हमने अब तक 20 लोगों को सम्मानित किया है। और कभी 100 रूपये का अनुदान नहीं लिया। सकारात्मक सोच के साथ हम अपने सीमित साधनों से जो कुछ कर पा रहे हैं, अगर किसी की काली नजर है तो हम क्या करें।

और लखन सालवी के बारे में- राजस्थान की मरूभूमि का एक युवक जो पत्रकारिता के माध्यम से जीवन-यापन करने की कामना रखता था। अब दूसरों को सफल होते देख पागल हो उठा है- कुछ समय के लिए भीलवाड़ा और सूरत कार्यालय में कर्मचारी रहा है। जितने समय उन्होंने काम किया अपना पैसा लिया और चलते-चलते ऑफिस के सामान लेकर चलते बने, माननीय किरण जी को रात-दिन परेशान किया। अंत में अब वहां इन साहब के सच की पोल खुल चुकी है। आशा है, ठगी के इस बादशाह की बातों में कहीं सच्चाई दिखेगी- धन्यवाद।

पवन कुमार भूत

संपादक

पुलिस, पब्लिक और प्रेस


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