भूत के पीछे पड़े लखन ने जवाब पर लगाए सवालिया निशान

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लखन सालवीपवन भूत जिसकी वाकपटुता का ही कमाल है कि उसने देश की जनता से करोड़ों रुपए ठग लिए हैं। वह उसकी मासिक पत्रिका भिजवाने का वादा कर लोगों से सदस्यता राशि के नाम पर रुपए लेता है। लेकिन पत्रिका भिजवाता नहीं है। लोग पत्रिका की मांग करते हैं या ठगी का आरोप लगाते हैं तो सफाई से कहता है ''यही मेरी कमजोर नस है'' कि मैं पत्रिका नहीं भिजवा पाता हूं।

डाक विभाग के असहयोग व कर्मचारियों द्वारा रिकार्ड में गबन के कारण पत्रिका नहीं भेज पा रहा हूं। लोग उसके द्वारा भोलेपन का नाटक कर दिए गए जवाब को सुनकर संतुष्ट हो जाते हैं। है ना वाकपटुता में उस्ताद। लेकिन क्या इस प्रकार के जवाब देकर हमेशा बचता रहेगा पवन कुमार भूत। पवन भूत की ठगी के शिकार अधिकतर युवा वर्ग हुआ है, पवन भूत द्वारा दिए गए विज्ञापनों पर युवा ही काम पाने की गरज से दौड़कर जाते हैं और ठगी के शिकार होते हैं।

पूर्व में मेरे द्वारा ''पुलिस व प्रेस के नाम पर ठगी का गोरखधंधा'' नाम के शीर्षक से एक लेख भड़ास4मीडिया को भेजा गया था। धन्यवाद दूंगा यशवंत जी को जिन्होंने गांव के गरीब व सच्चे एक ईमानदार पत्रकार के लेख को अपने न्यूज पोर्टल पर जगह दी। यशवंत जी व्यक्तिगत रूप से पवन भूत को जानते हैं, जिसके खिलाफ मैंने अपने लेख के माध्यम से आरोप लगाए थे। लेकिन भड़ास4मीडिया की यही खासियत है और दृढ़इच्छा शक्ति भी कि उस पर मेरी तथ्यात्क रिपोर्ट को स्थान दिया गया।

भड़ास4मीडिया पर ''पुलिस व प्रेस के नाम पर ठगी का गोरखधंधा'' नाम से प्रकाशित हुई खबर का असर ये हुआ कि पुलिस पब्लिक प्रेस के मालिक/संपादक पवन कुमार भूत तिलमिला उठे और मुझ पर झूठे आरोप लगा दिए। भड़ास4मीडिया के पाठकों ने उसके द्वारा लिखी गई प्रतिक्रिया को पढ़ा होगा, अवश्‍य ही सच्चाई को भी जान पाए होंगे। फिर भी मैं पवन भूत की प्रतिक्रिया पर पुनः अपनी प्रतिक्रिया लिख रहा हूं, जिसमें पवन भूत के साथ तमाम पाठकों, पत्रकारों व बुद्धिजीवियों के लिए सवाल छोड़ रहा हूं, जो अपने आप में मेरी प्रतिक्रिया तो है ही, ये सवाल पुलिस पब्लिक प्रेस के नाम से किए जा रहे गोरखधंधे की हकीकत को भी सामने ला पाएंगे।

पहला सवाल पवन भूत ने भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित हुए मेरे लेख की प्रतिक्रिया में कोई तथ्यात्मक टिप्पणी क्यों नहीं की? पवन भूत के काले कारनामों की जानकारियां मुझे है लेकिन तथ्यों की कमी के कारण मैं उन्हें सार्वजनिक नहीं कर सकता। पवन भूत ने मेरे लेख पर प्रतिक्रिया लिखी है और सफाई दी है कि -

1. 10 हजार लेकर बांट रहा है प्रेस कार्ड - पवन भूत ने लिखा कि हमारे शुभचिंतक जो कि हमें विज्ञापन अनुदान देते है, उन्हें हम एसोसिएट रिपोर्टर का कार्ड मुफ्त में देते हैं। हमारी यह योजना ठीक आईबीएन7 की सिटीजन जर्नलिस्ट मुहिम की तरह ही है। लेकिन पवन भूत ने यह नहीं बताया कि कितने और किन-किन लोगों को एसोसिएट रिपोर्टर के कार्ड मुफ्त में दिए है। पवन भूत ने देश में हजारों लोगों को 2500-2500 रुपए लेकर रिपोर्टर बनाए हैं। रिपोर्टरों द्वारा बनाए गए पाठकों को ना तो पत्रिका भेजी गई ना ही बीमा पॉलिसी दी गई। राजस्थान के भीलवाड़ा, अजमेर, उदयपुर, राजसमन्द जिले व गुजरात के एक दर्जन भर जिलों के हजारों लोग ठगी के शिकार हुए है। ठगी के शिकार हुए कुछ लोगों की सूची -

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2. किरण बेदी नहीं है साथ - मैंने लिखा था कि पवन भूत किरण बेदी के नाम का उपयोग कर (आड़ लेकर) ठगी कर रहा है। मैंने उदाहरण दिए थे कि अखबारों में विज्ञापन, पम्पलेट, सदस्यता फार्म व स्वयं की पत्रिका में किरण बेदी का फोटो छापता है। पवन भूत ने इस पर कोई तथ्यात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी है। पाठकों का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा हाल ही के अन्ना हजारे के आमरण अनशन की ओर। क्या अन्ना हजारे की बजाए कोई आम आदमी अनशन पर बैठता और उसके साथ किरण बेदी, अरूणा रॉय, स्वामी अग्निवेष नहीं होते तो क्या देश की जनता उसे समर्थन देती, फेसबुक सहित सभी सोशल नेटवर्किंग साइट पर युवाओं का जोश्‍ा दिखाई देता और लोकपाल विधेयक के संबंध में सरकार मांगे मानती? शायद ऐसा कुछ ना हो पाता। ये इसलिए हुआ क्यूंकि अन्ना हजारे आमरण अनशन पर बैठे। ठीक उसी तरह पुलिस पब्लिक प्रेस से नहीं, देश के युवा किरण बेदी से प्रभावित होकर पुलिस पब्लिक प्रेस से जुड़ रहे हैं। इसलिए ही तो पवन भूत अपने हर पम्पलेट व विज्ञापन में किरण बेदी का फोटो छपवाता है।

भूत

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3. 18 बैंकों में खाते - मैंने बैंक खातों का जिक्र ये साबित करने के लिए किया था कि पवन भूत देश्‍ा के छोटे से छोटे गांव के रिपोर्टर से सदस्य बनवाकर सदस्यों से प्राप्त राशि को शीघ्र अपने हाथों में लेने के लिए बैंकों को इस्तेमाल करता है। 18 से अधिक बैंकों में खाते हैं इसलिए कि गांव में कोई ना कोई बैंक तो होता ही है। वैसे बैंक खातों से मुझे कोई आपत्ति नहीं है और होती तो भी क्या हो जाता। मुझे तो आपत्ति महज इस बात की है कि वो सदस्यों को पत्रिका नही भेजता और ना ही बीमा करवाता है।

4. पत्रिका नहीं भेजता - पवन भूत ने लिखा कि पत्रिका नहीं भेज पाना ''यही मेरी कमजोर नस है'' ये बिल्कुल सामान्य होकर लिखा गया है। ये सच भी है। पवन भूत पुलिस पब्लिक प्रेस का संपादक है और मालिक भी। वह 2500 रुपए लेकर रिपोर्टर बनाता है, एसोसिएट रिपोर्टर बनाता है, 400, 1000 व 3000 रुपए लेकर क्रमश: वार्षिक, द्विवार्षिक व आजीवन सदस्य बनाता है। जिन्हें योजना के मुताबिक पत्रिका नहीं भेजी जाती व बीमा नहीं करवाया जाता है। समझ में नहीं आता पवन भूत किस लिए रिपोर्टर बना रहे हैं और किस लिए पत्रिका के सदस्य बना रहे हैं, जबकि वो कई सालों से पत्रिका नहीं भेज पा रहे हैं। पवन भूत का नैतिक दायित्व है कि जिन लोगों से पत्रिका के नाम पर पैसे लिए हैं उन्हें राशि वापस लौटावें।

''यही मेरी कमजोर नस है'', ''डाक विभाग से सहयोग नहीं मिलने के कारण'' व ''कर्मचारियों द्वारा गबन करने के कारण'' मैं पत्रिका नहीं भेज पा रहा हूं क्या ऐसा हो सकता है, और अगर ऐसा हुआ तो पुलिस व पब्लिक में सामंजस्य स्थापित करने वाले पवन भूत ने डाक विभाग के खिलाफ कोई शिकायत क्यों नहीं की, क्यों गबन करने वाले वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की? नीचे वे सदस्य जिन्हें ना तो पत्रिका भेजी गई ना ही बीमा पॉलिसी -

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पवन भूत ने अपनी प्रतिक्रिया में बहुत उलजलूल लिखा है। जैन टीवी को किन्हीं अन्य टीवी चैनलों का पिता बताया, पुलिस नाम से 1400 पत्रिकाओं का निकलना बताया, मुझे व मुकेश पाठक को उसके कार्यालय में से सामान लेकर चले जाना बताया। उसने यह भी लिखा कि लखन सालवी ने किरण बेदी को परेशान किया। साथियों, अगर पवन भूत के कथन सच है तो फिर मेरे सवाल हैं कि पुलिस पब्लिक प्रेस के संपादक जी ने लखन सालवी व मुकेश पाठक के खिलाफ एफआईआर दर्ज क्यों नहीं करवाई, लखन सालवी ने किरण बेदी को परेशान किया तो उन्होंने क्यों शिकायत नहीं की?

भड़ास4मीडिया के सभी पाठकों से विनम्र आग्रह है कि इस लेख में लेखक द्वारा खड़े किए गए सवालों के उत्तर खोजने की चेष्टा करें, पुलिस पब्लिक प्रेस के मामले में गहनता से अध्ययन करें। सच्चाई आपके समक्ष होगी.......... और आखिर जीत सत्य की ही होगी। जय हिन्द

लखन सालवी

974, बंकेश्‍वरी निवास,

कोशीथल, जिला-भीलवाड़ा (राज)

मोबाइल - 91 9828081636


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Comments (1)Add Comment
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written by Fardin, April 10, 2011
लखन जी,
परेशान होने कि जरुरत नहीं है. देश में आजकल चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया का काम महत्वपूर्ण काम यही हो गया है.
मै जानता हूँ कि पवन कुमार भूत निहायत ही चोर है.. और उस से जुड़े सभी लोग भी जानते है कि पवन भूत चोर है लेकिन अभी तक किसी ने इसके खिलाफ आवाज उठाई नहीं है. आप और भड़ास फॉर मीडिया के यशवंत जी को धन्यवाद् जिन्होंने पवन की असलियत को सामने रखा है. ....... मै आपके साथ हूँ..... आन बिजी हूँ कल फ़ोन करूँगा

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