भ्रष्‍टाचारियों की बेचैनी और षडयंत्र

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विनय बिहारी सिंहयह अचरज नहीं है कि भ्रष्टाचारियों ने अन्ना हजारे पर एक साथ हमला कर दिया है। उन पर तरह- तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। कोशिश है कि लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने वाली कमेटी को काम ही न करने दिया जाए। अन्ना हजारे की ईमानदारी पर तो वे ही लोग शक कर रहे हैं, जो भ्रष्टाचार में डूब-उतरा रहे हैं और उन्हें डर है कि जिस बुनियाद पर वे खड़े हैं, वही नहीं रहेगा तो उनका क्या होगा।

अगर भ्रष्टाचार का तंत्र इतना ताकतवर हो चुका है कि वह अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज को दबाने, कुचलने की कार्रवाई तुरंत करता है। लेकिन अन्ना हजारे इसलिए सुरक्षित हैं क्योंकि पूरा देश उनके साथ है। उनके खिलाफ बोलने के लिए किराए के टट्टुओं को रखा गया है। इनमें कुछ छद्म बुद्धिजीवी भी शामिल हैं जो अन्ना हजारे को आत्मविश्लेषण की सलाह देते हैं। ऐसे उधार के दिमाग वालों को लगता है कि उनकी बातों में दम है लेकिन जो भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे हैं, उन्हें मालूम है कि किराए के ट्ट्टुओं, भ्रष्टाचार की लगाम हाथ में लेनेवालों और दलालों की हैसियत क्या है।

आम आदमी अपनी लड़ाई में कुछ भी नहीं खोने वाला है। वह पहले से ही हाशिए पर कर दिया गया है। अब उसके पास है ही क्या? इसलिए वह निडर है। लेकिन जो अन्ना हजारे पर हमला बोल रहे हैं या अपने किराए के टट्टुओं से बयान दिलवा रहे हैं, उनके पास खोने के लिए पूरा भ्रष्टतंत्र ही है। इसलिए वे ज्यादा तिलमिलाए हुए हैं। उनका वश चले तो अन्ना हजारे और उनके समर्थकों को दूसरे लोक में भेज दें। लेकिन यह संभव नहीं है। अन्ना हजारे ने पूरे देश के असंतोष को एकजुट कर दिया। कोई भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई नहीं कर सकता था। अन्ना हजारे इसके लिए उपयुक्त व्यक्ति हैं। उनके लिए हर देशवासी के दिल में गहरा सम्मान है।

भ्रष्टाचारियों के अगुवा कहते फिर रहे हैं कि इस लोकपाल विधेयक से भ्रष्टाचार नहीं खत्म होगा। उनसे पूछा जाना चाहिए कि तो क्या भ्रष्टाचार को यूं ही फलने- फूलने दें? पहले भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कदम तो उठे। फिर और भी आंदोलन होंगे। यह तो महज शुरूआत है। देश में एक नई चेतना आई है। अगर इस चेतना को पोषण मिला तो भारत भ्रष्टाचार मिटाने वाला विश्व का पहला देश होगा। लेकिन यह आसान काम नहीं है। लंबी लड़ाई की जरूरत है। यह लड़ाई संगठित हो कर ही लड़ी जा सकती है। क्योंकि भ्रष्टाचारी बेहद संगठित हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ इसी तरह गांव-गांव में संगठन बने। भ्रष्टाचारियों के खिलाफ हल्ला बोल हो। तब आम आदमी को उसका हक मिलेगा। लेकिन इस आंदोलन को हिंसक नहीं होना चाहिए। अहिंसक आंदोलन में बहुत दम है।

लेखक विनय बिहारी सिंह कोलकाता के वरिष्ठ पत्रकार हैं और हिंदी ब्लाग दिव्य प्रकाश के माडरेटर भी। उनसे संपर्क करने के लिए This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it का सहारा ले सकते हैं।


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