युवा पत्रकार हिमांशु डबराल ने घोषित की अपनी संपत्ति

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हिमांशु कुछ दिनों से कई पत्रकारों को यह कहते देख रहा हूँ कि पत्रकारों को भी अपनी संपत्ति का ब्यौरा देना चाहिए...लेकिन उनको जगह-जगह कोरा भाषण देने की बजाय अपनी बात की शुरुआत अपनी सम्पूर्ण संपत्ति का विवरण बताते हुए करनी चाहिए थी.  मेरा भी मानना है की लोकतंत्र के चारों स्‍तम्भों से जुड़े लोगों को अपनी सम्पत्ति का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करना चाहिए.

उन में न्यायपालिका के बाद सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी प्रेस की है, क्योंकि उसे तो न्याय पालिका से भी अधिक सचेत, निष्पक्ष और त्वरित होना पड़ता है. इसलिए सीज़र की पत्नी की तरह प्रेस और मीडिया के पहियों यानी पत्रकारों को तलवार की धार पर चलने की आदत होनी चाहिए. राडिया कांड के बाद लोकतंत्र के इस चौथे खम्भे पर भी खासा कीचड़ उछला है. इस बीच और एक महत्वपूर्ण बात यह हुई है कि विधायिका से सम्बद्ध लोगों यानी नेताओं के सामान ही कार्यपालिका और न्यायपालिका से जुड़े अधिकारियों के लिए उनकी संपत्ति की सार्वजनिक घोषणा अनिवार्य कर दी गयी है.

ऐसे में क्या लोकतंत्र के चौथे खम्भे यानी प्रेस और मीडिया के कार्यकारियों यानी पत्रकारों को तो स्वयं ही अपनी संपत्ति का विवरण सार्वजनिक नहीं कर देना चाहिए? इसी भावना से मैं अपनी संपत्ति घोषित कर रहा हूँ और मैं इस बारे में भाषण करने वाले सभी वरिष्ठ पत्रकारों और अपने सभी पत्रकार साथियों से अनुरोध करता हूँ कि वे भी आगे आएं और अपनी संपत्ति की सार्वजानिक घोषणा करें. अब तो आइये पत्रकार जी मैदान में.

मेरी संपत्ति :

बैंक बैलेंस - 30 ,000  रुपये

1 बाईक

1 लैपटॉप

2 मोबाइल

अन्य- 30,000  के लगभग

और मेरे परिवारवाले, गुरुजन और मित्रमंडली.

हिमांशु डबराल


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