नंगा पत्रकार नहाएगा क्‍या और निचोड़ेगा क्‍या!

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अरुण मीडिया संस्थानों में शीर्ष पदों पर तैनात पत्रकारों ने तो फरमान जारी कर दिया कि जमात के सभी लोग अपनी संपत्ति का ब्योरा दें, पर क्या कभी उन लोगों ने सोचा कि अपने नीचे काम कर रहे पत्रकारों को वे क्या मेहनताना देते हैं, जिसे वो अपनी संपत्ति के रूप में पेश कर सकें। दिहाड़ी मजदूरी से भी कम वेतन पर काम करने वाले पत्रकारों के लिए शायद ये किसी मज़ाक से कम नहीं कि वो बेचारे अपने फटेहाल होने का तमाशा सबके सामने करें।

मोटी सैलरी पर काम करने वाले और बड़ी गाड़ियों में घूमने वाले इन पत्रकारों से मेरा बस यही सवाल है कि नंगा नहाएगा क्या और निचोड़ेगा क्या... भाई इस बात का लबोलुआब यही है कि इस फील्ड में गिनती के पत्रकारों की बात की जाए तो वो अपनी संपत्ति का ब्योरा देते या सुनाते अच्छे लगेंगे। आखिरकार उनके थैले से कुछ ना कुछ तो निकलेगा ही। मैं यहां मीडिया में लाई जा रही पारदर्शिता की मुहिम से बचने की कोशिश नहीं कर रहा बल्कि अपने फटेहाल का तमाशा नहीं बनाना चाहता। यही वजह है कि मेरे जैसे कई पत्रकार इस मुहिम में शामिल होने से पहले कतरा रहे हैं कि कहीं वो लोगों के बीच मज़ाक बनकर ना रह जाएं।

इन शब्दों के ज़रिए मैं वरिष्ठ मार्गदर्शकों का अपमान नहीं करना चाहता बल्कि चाहता हूं कि वे पहले अपने नीचे काम कर रहे लोगों की सैलरी पर ग़ौर करे कि कहीं आपके जाने के बाद बेचारे अपनी तंगहाली और बदहाली पर आपको बुरा भला तो नहीं कहते या घुट-घुट कर काम करने पर कहीं मजबूर तो नहीं। मेरे ख्याल से पत्रकारिता में गंध फैलाने वाले जिन पत्रकारों का नाम प्रकाश में आया है वे सभी कहीं ना कहीं किसी न किसी संस्थान के बड़े पदों पर बैठे थे और हैं भी। मीडिया के सभी सीनियर्स से यही कहना चाहता हूं कि इस आदेश को जारी करने से पहले एक बार पड़ताल तो जरूर कर लीजिए कि कहीं आपके संस्थान में भी कोई शोषित तो नहीं हो रहा,  नहीं तो आखिर में बेचारा वो भी कहने पर मजबूर हो जाएगा कि नंगा नहाएगा क्या और निचोड़ेगा क्या।

मेरी संपत्ति का ब्‍यौरा

1. एक टीवी 21 इंच

2. एक डिज़िटल कैमरा

3. दो फोन 3000-5000 के बीच वाले खरीदे हैं।

अरुण सिन्‍हा


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