हमलोगों के खिलाफ साजिश रची गई, पुलिस-पत्रकार भी मामले में लिप्‍त

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संपादक महोदय, पत्रकारों पर हमले और ब्लैकमेलिंग सम्बंधित थाना इकदिल में दर्ज रिपोर्ट सम्बन्धी खबर के 30 अप्रैल को प्रकाशन से सम्बंधित हम पत्रकारों के हितों को गहरा धक्का लगा है. यह खबरें पूरी तरह से तथ्यहीन मनगढ़ंत, भ्रामक, मानहानि कारक तथा एक पक्षीय  हैं. यह समाचार पत्रकारीय धर्म के विपरीत है. सारा षणयंत्र शिक्षा मित्र के पति द्वारा  अपनी गलती पर पर्दा डालने के लिए रचा गया है. जिसमें पुलिस और पत्रकार भी शामिल हैं.

घटना वाले दिन दिनांक 28 अप्रैल गुरुवार को हम दोनों  लोग निजी कैमरामैनों के साथ पमेश्वर दयाल शर्मा के बुलावे पर अड्डा बराखेडा स्थित प्राथमिक विद्यालय पर शिक्षा मित्र नीलम यादव के बारे में प्रधानाध्यापक का बयान रिकार्ड करने गए थे. चूंकि यह बताया गया था कि उक्त शिक्षा मित्र केवल हस्ताक्षर करने विद्यालय आती हैं और स्थानीय होने के कारण उनके पति की दबंगई विद्यालय प्रशासन पर चलती है तथा यह शिक्षा मित्र 2003  में नियुक्ति के बाद बिना विभागीय अनुमति के उच्च शिक्षा भी प्राप्त कर चुकी हैं.  इसलिए बीएसए कार्यालय के एक पत्र को दिए जाने पर ही हम दोनों पमेश्वर दयाल शर्मा सहायक अध्यापक जूनियर हाई स्कूल अड्डा बराखेडा के आमंत्रण पर पहुंचे थे, जहां शिक्षा मित्र के स्कूल से गायब होने पर प्राथमिक विद्यालय के हेडमास्टर जबर सिंह ने कैमरे के सामने अपना बयान दर्ज कराया, जिसे उच्चाधिकारियों सहित शासन व महामहिम राज्यपाल महोदय को भी भेजा जा चुका है.

इस मामले की भनक लगते ही शिक्षा मित्र के पति सत्येन्द्र यादव ने अपने 10-12 साथियों के साथ आकर एकाएक हमला बोल दिया, किन्तु हम सभी तुरंत निकल आये.  हम दोनों ने इस घटना की लिखित तहरीर पुलिस को दी, परन्‍तु हमारे तहरीर को नजरअंदाज कर इकदिल थाना पुलिस  ने किसी लालच में बिना तथ्यों की पुष्टि के आनन-फानन में हम लोगों के खिलाफ ही एक पक्षीय मुकदमा दर्ज कर लिया, यह उच्च स्तरीय जांच का विषय है. यह भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि अक्सर सतर्क पत्रकारिता ने रिपोर्ट दर्ज करने वाले की षडयंत्रकारी बात को बिना तथ्यों की पुष्टि किये और बिना हमलोगों के पक्ष को जाने ही झूठा, मानहानिकारक तथा पत्रकारिता को बदनाम करने वाला समाचार प्रकाशित कर दिया गया.

हम दोनों समस्त तथ्यों की उच्चस्तरीय जांच कराएँगे और हमारे पक्ष को भी ससम्मान प्रकाशित न करने वाले समाचार पत्रों को अदालत और प्रेस परिषद के समक्ष न सिर्फ खड़ा करेंगे वरन मानहानि की क्षति-पूर्ति उत्तरदायी लोगों से वसूल करने के लिए न्यायिक जंग अवश्य लड़ेंगे.  चूँकि शिक्षा मित्र के दोष को छिपाने की गरज से अपराधिक मानसिकता वाले पति ने अपने षडयंत्र में पुलिस के साथ-साथ कई पत्रकारों को भी शामिल करने में कामयाबी हासिल की है इसलिए जनहित में इन तथ्यों का खुलासा होना आवश्यक है कि पुलिस और समाचार पत्रों को उसने किस-किस प्रकार अपने षडयंत्र, चरित्र हनन की राजनीति में शामिल किया और फर्जी लेन-देन को आधार बना डाला.

हम दोनों ने  इंस्पेक्टर की कारगुजारियों को ऊपर पहुंचाने तथा कई अधिकारियों की संलिप्तिता की जाँच प्रदेश शासन के कराए जाने के कारण ही इस प्रकरण में दोषी को सिर आँखों पर बिठा कर  हमलोगों की राजनीतिक एवं सामाजिक हत्या करने की संगठित साजिश की गई है,  जिसमे कुछ पत्रकार मित्र भी जाने-अनजाने लिप्त हो गए हैं, जिससे सच्चाई की हत्या हुयी है और पत्रिकारिता क्षेत्र में खुद को जिम्मेदार मानने वालों ने दोषी पक्ष के क़दमों में झुकते हुए उसे तो क्लीन चिट दी है, जबकि निष्पक्षता का गला घोंट कर हम लोगों के पक्ष की बात को नजर अंदाज कर पत्रकारिता धर्म की स्वयं खिल्ली उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है.

पारस त्रिपाठी/ नीरज महेरे

पत्रकार, इटावा


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