क्यों पड़ी सुब्रत रॉय को विज्ञापन की ज़रुरत?

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प्रकाश सुब्रत रॉय जब भी अपने नाम से कोई विज्ञापन देते हैं, बड़ा जोरदार देते हैं.  एकदम पठनीय और चर्चा के लायक.  (याद कीजिये कोमनवेल्थ गेम्स के पहले भ्रष्टाचार को लेकर सुब्रत रॉय का विज्ञापन, जिसमें देश की इज्ज़त का हवाला देकर जांच टालने की बात थी.) पहली नज़र में वह एक ईमानदार कोशिश लगती है लेकिन बाद में वह आम तौर पर विवादों में आ जाता है क्योंकि उसमें उनका दंभ और आडम्बर तो सामने आता ही है, उनकी चालाकियां भी साफ़ नज़र आ जाती हैं.

इसके लिए वे अपने 'वर्करों' की कंपनी के करोड़ों रुपये हर साल फूंक देते हैं. इससे उनकी कंपनी (कथित परिवार) के छवि बने या बने उनकी ज़रूर बनने का भ्रम होने लगता है. सुब्रत रॉय का सारा साम्राज्य ही इसी छवि के सहारे चल रहा है. दस मई को अखबारों में पहले पेज पर श्री सुब्रत रॉय का नाम लिए बिना उनके ''परिवार' का अविश्वसनीय विज्ञापन देख कर मैं आश्चर्यचकित रह गया.  विज्ञापन में लिखा था -- ''जिस प्रकार देश के कुछ प्रमुख समाचार पत्रों व इलेक्ट्रानिक मीडिया के माध्यम से यह कहानी प्रकाशित/ प्रचारित की गयी है कि हमारे चेयरमैन को सम्माननीय सुप्रीम कोर्ट में चल रहे कोर्ट की अवमानना से सम्बंधित केस के बारे में नोटिस दी गयी है उससे हम आश्चर्यचकित हैं.''

आगे नए पैरे में बोल्ड हर्फों में छपा था ''हम उन मिथ्यारोपों से भी विक्षुब्ध हैं, जिनके द्वारा 2 जी स्कैम या जो कम्पनियाँ कथित तौर पर इसमें नामित की गयी हैं, के साथ हमें भी जोड़ा जोड़ा जा रहा है.'' आगे विज्ञापन में सफाई दी गई कि ये तमाम आरोप गलत और मनगढ़ंत हैं और हमारी छवि बिगाड़ने के इरादे से लगाए जा रहे हैं. यह बात विज्ञापन में ही कबूल की गयी है ''अवमानना सम्बंधित वाद सम्माननीय सुप्रीम कोर्ट के सम्मुख न्यायाधीन है. अतएव हम इसकी सुनवाई के दौरान अपनी निर्दोषिता को सिद्ध करने के लिए अपना पक्ष / उत्तर उसके समक्ष प्रस्तुत करेंगे और परिणाम की प्रतीक्षा करेंगे.''

कुछ पत्रकार साथी कह रहे हैं कि यह माननीय सुप्रीम कोर्ट की अवमानना है.  तीन पैरे के इस विज्ञापन में तीन बातें लिखी है.  (1) मीडिया ने इस केस के बारे में जो कवरेज दिया है हम (यानी सहारा इण्डिया परिवार)  उससे आश्चर्यचकित हैं. आश्चर्यचकित क्यों हो और क्यों ये विज्ञापन छपवा रहे हो? क्या इसलिए आश्चर्यचकित हो कि मीडिया ने कवरेज क्यों किया जबकि आप बड़े विज्ञापनदाता हो? क्या इसलिए आश्चर्यचकित हो कि आपने निजी तौर पर अनेक मीडियाकर्मियों को ''मैनेज'' कर रखा है? क्या आप अपने आप को केवल इस योग्य मानते हो कि मीडिया केवल आपका गुणगान करने के लिए है?

सुब्रत को नोटिस मिला और मीडिया ने खबर दे दी, इसमें गलत क्या है? क्या ये गलत है कि आपकी कंपनी के एक नौकर उपेन्द्र राय का नाम भी इसमें आप के साथ आ गया है और अपने ही मुलाजिम के नाम के साथ आपका नाम आना आपकी तौहीन है? क्या मीडिया ने यह छाप दिया कि आप टू जी घोटाले  में शामिल हैं? और अगर मीडिया ने कुछ गलत छापा या दिखाया है तो इसके खिलाफ देश के कानून में व्यवस्था है. फिर सुब्रत रॉय को ऐसे विज्ञापन क्यों छपवाने पड़े? सुब्रत रॉय तो खुद भी मीडिया का कारोबार करते हैं, अखबार और  टीवी चैनल चलाते हैं. क्या उनके अखबार में सुप्रीम कोर्ट के नोटिस की खबर उन्होंने छपने दी? इतने सच्चे थे तो सही  सही खबर अपने यहाँ ही छपवा देते?

वास्तव में देश के कुछ ही मीडिया ने सुब्रत को मिले नोटिस की खबर दी थी, लेकिन उसे सभी जगह रुकवाने में परिवार का ''कार्पोरेट कम्युनिकेशंस'' विभाग नाकाम रहा था. यह विज्ञापन उन मीडिया घरानों को सूचना था कि आपने हमारा ध्यान रखा है, हम आपका रखेंगे. जिन जिन अखबारों ने हमारे पक्ष में खबर दी है या चुप रहे हैं हम आनेवाले दिनों में उनका ध्यान रखेंगे. नीरा राडिया का ही फार्मूला हाई -- मीडिया बाईंग करते रहे, जो भी खिलाफ जाने की कोशिश करे उसे विज्ञापन रोक दो, फिर देखो, वह कैसे रेंगता हुआ आता है! ..सुब्रत रॉय इसलिए आश्चर्यचकित हैं कि मीडिया अभी पूरा बिकाऊ नहीं है. मीडिया में सच के पक्षधर अभी भी क्यों है?

(2) इस विज्ञापन के दूसरे पैराग्राफ में खुले तौर पर कहा गया है कि हम उन मिथ्यारोपों से भी विक्षुब्ध हैं, जिनके द्वारा 2 जी स्कैम या जो कम्पनियाँ कथित तौर पर इसमें नामित की गयी हैं, के साथ हमें भी जोड़ा जा रहा है. यह प्रतिक्रिया स्वाभाविक ही है. सुब्रत ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के साफ़-साफ़ लिख दिया है कि यह '' मिथ्यारोप'' है, मिथ्यापूर्ण आरोप. सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला दे हमने तो इसे '' मिथ्यारोप'' पहले ही कह दिया सो कह दिया अब आप को जो करना हो कर लो.

(3) दूसरा पैराग्राफ लिख देने के बाद फिर सुब्रत को अपनी छवि की फिक्र हुई या सुप्रीम कोर्ट का डर लगा तो फिर यह राग अलापा -- ''अवमानना सम्बंधित वाद सम्माननीय सुप्रीम कोर्ट के सम्मुख न्यायाधीन है. अतएव हम इसकी सुनवाई के दौरान अपनी निर्दोषिता को सिद्ध करने के लिए अपना पक्ष / उत्तर उसके समक्ष प्रस्तुत करेंगे और परिणाम की प्रतीक्षा करेंगे.''

गौर करें कि इस पूरे विज्ञापन में मीडिया के बहाने सुप्रीम कोर्ट से कन्नी काटकर सफाई दी गयी है. सुब्रत को सफाई तो देनी ही है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के सामने और यहाँ पर विज्ञापन में शायद मीडिया के बहाने सुप्रीम कोर्ट को भी निशाना लगाकर छवि बिगाड़ने का आरोप लगाया जा रहा है. इसमें चैयरमैन के अलावा और किसी का जिक्र नहीं है. क्या ये दूसरे लोग उनके गले की हड्डी बन गए है?

लेखक प्रकाश हिंदुस्‍तानी वरिष्‍ठ पत्रकार हैं.


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