27 दिन से बिजली-पानी को तरस रहा है एक पत्रकार का परिवार

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: घर जाते हुए डर लगता है एक पत्रकार को : घपले-घोटाले की खबर लिखने की मिली सजा : तरह तरह से प्रताड़ित किए  जा रहे परिजन : hello, pl. find article, the case of a journalist who has been suffering just because he has raised his voice against corruption. i know azad khalid for last more than 10 years. he has been a fearless journalist.

worked with Sahara Tv, India Tv also head channel one news, and worked with many other channels.he had also produced a crime programme 'taftish' off late he has been associated with a weekly news paper "the man in opposition" whose publisher and editor is his father.and he is at present consultant editor of a weekly news paper 'ek kadam aage' and 'citybites'.

i came to know about what azad khalid has been facing for last 27 days when he informed me today in detail about his rift with the ghaziabad administartion related to some of the stories he had filed.hence i thought that it would be a perfect day to raise his voice as we are celebrating international journalism day today in the hope that justice would be done to him.

i sincerely hope that journalist community would come up to find out the truth about the azad khalid case and if he is right then help him to get justice. i have been into media for last 15 years worked with Jain TV, Iran TV, Shakti TV, looked after news at jain tv and Iran TV and programming at shakti tv and property tv. at present working with news paper 'ek kadam aage' and 'citybites'

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A R Abidi

एक डीएम की गुंडागर्दी और पत्रकार जगत की चुप्पी

एआर अबीदी

भीषण गर्मी में पिछले 27 दिनों से एक पत्रकार का परिवार बिजली और पानी को तरस रहा है। पिछले 27 दिनों से एक पत्रकर अपने घर जाते हुए डर रहा है। उसको खुलेआम घूमते हुए घबराहट होती है। इसलिए नहीं कि वह कोई अपराधी या भगोड़ा है। बल्कि उसने उत्तर प्रदेश में चल रहे कुछ घोटालों को उजागर करने की कोशिश की थी। और गाजियाबाद के जिलाधिकारी हृदयेश कुमार का दावा है कि जिले में वही होगा जो हम चाहेंगे। अगर हमारे खिलाफ ख़बर छापोगे तो बर्बाद कर दिये जाओगे। इस धमकी के बाद पत्रकार आजाद खालिद ने इसकी शिकायत सेंट्रल विजिलेंस कमीशन, प्रधानमंत्री, सीबीआई समेत प्रेस काउंसिल आफ इंडिया से लिखित रूप में की थी।

इसके जवाब में प्रेस काउंसिल ने जांच शुरू कर दी लेकिन दिलचस्प बात यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच उसी अधिकारी को सौंप दी जिसके खिलाफ शिकायत की गई थी। अब इसे उस पत्रकार की बेवकूफी कहें या करप्शन के खिलाफ छेड़ी गई जंग से ना भागने की जिद। पत्रकार ने जिलाधिकारी हृदयेश कुमार के काले कारनामे जनता के सामने रखे और जब उस पत्रकार को फिर से धमकाया गया तो उसने अपने समाचार पत्र दि मैन इन अपोज़िशन में हृदयेश कुमार का चिठ्ठा खोलते हुए उनके और भी कारनामों को खोलने के लिए एक सिरीज़ चलाने का ऐलान कर दिया।

इसके बाद तो जिलाधिकारी हृदयेश कुमार अपना आपा ही खो बैठे। उन्होने अपने जिले की तमाम पुलिस और सभी सरकारी विभागों को पत्रकार और उसके परिवार के पीछे लगा दिया। इस बारे में खुद कई अधिकारियों का कहना है कि हम बेहद मजबूर हैं। उनका कहना था कि जिलाधिकारी के आदेश मानना हमारी मजबूरी है और खुले तौर पर डीएम हृदयेश कुमार ने हमको कहा कि किसी भी तरह से पत्रकार आज़ाद ख़ालिद को सबक सिखाओ। ये तमाम वही अधिकारी और पुलिस आफिसर्स है जो आम दिनों में हम जैसे पत्रकारों को बड़ा मान सम्माम और ध्यान देते हैं। अब सुनिए उन्ही अधिकारियों के कारनामे।

गाजियाबाद स्थित कैला भट्टा आवास जहां आज़ाद खालिद अपने संयुक्त परिवार में अपनी माता जी के मकान में अपने भाइयों के साथ रहते हैं। वहां पर 2 किलोवाट का बिजली का स्वीकृत कनेक्शन उनके भाई के नाम लगा हुआ है। इसका आज तक का बिल जमा है। इसकी प्रतिलिपि जो चाहे देख सकता है। इसके बावजूद बिजली विभाग और गाजियाबाद पुलिस के दर्जनों अधिकारी सादी वर्दी और पुलिस वर्दी में दिनांक 03-05-11 को तक़रीबन 2.15 पर चारों तरफ से आजाद खालिद के घर को ऐसे घेर लेते हैं जैसे कि किसी आंतकवादी को घेरा जाता है। पूरे क्षेत्र को घेरने के बाद वहां पर आंतक का माहौल पैदा करके पुलिस वालों ने सबसे पहले पूरे घर की तलाशी ली और वहां पर मिलने वाली कई फाइलों और कागजात को अपने कब्जे में ले लिया। जब वहां पुलिस को कोई आपत्तिजनक वस्तु या हथियार आदि नहीं मिला तो इसके बाद पुलिस वालों और वहां मौजूद अधिकारियों ने आजाद खालिद के बूढे माता पिता और भाई से कहा कि ये कनेक्शन तो रिहायशी है और तुम इसका कामर्शियल इस्तेमाल कर रहे हो।

घर पर मौजूद आजाद खालिद के भाई ने अपने तर्कों और घर का मुआयना करा कर जब पूरी तरह से अधिकारियों को कन्वीन्स कर दिया कि यहां कोई कामर्शियल गतिविधि नहीं है और घर पर रखे लैपटाप का होना किसी भी व्यावसायिक गतिविधि का सबूत नहीं हो सकते, क्योंकि कम्प्यूटर और लैपटाप किसी के भी घर में पाए जा सकते हैं, तो इसके बाद आनन फानन में उन लोगों ने घर में लगा हुआ बिजली का मीटर उखाड़ा और वहां से रवाना हो गये। उखाड़े गये मीटर और घर से ली गई फाइलों और कागजात को लेकर सभी पुलिस वाले और अधिकारी वहां से चले गये। इस बीच आजाद खालिद अपने वसुंधरा स्थित कार्यालय पर थे और उनको यह बात फोन से बताई गई। शाम को आजाद खालिद को पता लगा कि कोतवाली थाने में उनके खिलाफ बिजली की चोरी का एक मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। इस मुकदमें में आरोप है कि आजाद खालिद खालिद ने बिजली के खम्बे से स्वीकृत कनेक्शन के अतिरिक्त एक केबल डाला हुआ था। हमने खुद जब वहां का मुआयना किया तो सर्वप्रथम पाया कि जिस खम्बे से केबल डालने की बात की गई है वहां पर तमाम तार प्लास्टिक कोटेड हैं और उनसे किसी भी प्रकार का केबल डालना सम्भव ही नहीं है।

साथ ही यदि कोई कनेक्शन लेना भी चाहेगा तो जन्कशन बाक्स से बिना जेई या विभाग के कर्मचारी के उसका ताला खोलना या कनेक्शन लेना सम्भव नहीं है। साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि आजाद खालिद वहां से भाग गये। उस दिन आजाद खालिद के मोबाइल की काल डिटेल से कभी भी ये साबित हो सकता है कि आजाद खालिद सुबह 11 बजे के बाद घर पर नहीं थे और जब पुलिस ने घर पर छापा मारा और केस बनाया तब आजाद खालिद कहां थे। आजाद खालिद और उनके परिवार के बीच 2 बजे के बाद हुई बातचीत के दौरान आजाद खालिद के मोबाइल की लोकेशन से भी ये साफ हो सकता है कि उस समय आजाद खालिद घर से कई किलोमीटर दूर अपने कार्यालय पर थे। इसके अलावा और भी कई सबूत बिजली विभाग और पुलिस द्वारा गढ़ी गई फर्जी एफआईआर की पोल खोलने के लिए काफी हैं। रात को ही आजाद खालिद को सूचना दी गई कि उनका अखबार जिस प्रेस पर छपता है उसको भी पुलिस ने सील कर दिया है और प्रेस मालिक पवन शर्मा, आजाद खालिद व उनके पिता के खिलाफ एक दूसरा मुकदमा 420 का गाजियाबाद के थाना लिकं रोड में दर्ज कर दिया है।

पुलिस के मुताबिक आजाद खालिद फर्जी कागजात और झूठे घोषणा पत्र के आधार पर अखबार चला रहे थे जबकि आजाद खालिद और उनके पिता ने जिलाधिकरी और सूचना विभाग को अपने प्रिंटर द्वारा प्रेस का स्थान बदलने के लिए कई बार सूचना भी दी थी और उसके बारे में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी भी मांगी थी। जिलाधिकारी हृदयेश कुमार और सहायक सूचना निदेशक नवल कांत तिवारी ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह ना करते हुए प्रेस मालिक से घोषणा पत्र लेने के बजाए उल्टा आजाद खालिद और उनके पिता को फंसाने की साजिश रच डाली और जिलाधिकारी हृदयेश कुमार के इशारे पर एक ही दिन में दूसरी एफआईआर आज़ाद खालिद के खिलाफ दर्ज करा दी। दोनों मामलों के दर्ज होने बाद क्षेत्र के लोगों में जिला प्रशासन और डीएम हृदयेश कुमार के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने सड़क पर उतर कर जिलाधिकारी हृदयेश कुमार के विरोध मे प्रदर्शन का ऐलान कर दिया।

भट्टा पारसोल में किसानों के मामले पर घिर चुके प्रशासन को जब लगा कि एक नया बखेड़ा ना खड़ा हो जाए तो बीएसपी द्वारा अपने राष्ट्रीय महाचसिच और राज्यसभा के सांसद नरेद्र कश्यप को डैमेज कंट्रोल के लिए लगाया गया। सांसद महोदय ने दिनांक-07-05-11 को शाम लगभग 8 बजे अपने राजनगर स्थित आवास पर जिलाधिकारी हृदयेश कुमार, आज़ाद खालिद, वरिष्ठ बीएसपी नेता तय्यब कुरैशी और पत्रकारों के नुमाइंदे के तौर पर गाजियाबाद के वरिष्ठ पत्रकार और एक स्थानीय समाचार पत्र के सम्पादक सलामत मियां को बुलाकर मामले को सुलाझाने की कोशिश की लेकिन शायद जिलाधिकारी हृदयेश कुमार इस समझौते को भी मानने के मूड में नही थे। और ना तो अभी तक पत्रकार आज़ाद खालिद के घर की बिजली जुड़ी है और ना उनके खिलाफ लगे मुकदमे वापस किये गये। ऐसे में आज पत्रकारिता दिवस पर एक सवाल है कि क्या घोटालों को उजागर करने वाले पत्रकार को पुलिस से मुंह छिपाने की मजबूरी और पत्रकारिता जगत की खामोशी को ही पत्रकारिता कहा जाएगा।

पिछले तकरीबन 10 साल से पत्रकरिता से जुड़े और कई राष्ट्रीय चैनलों में खास ओहदों पर कार्य कर चुके आजाद खालिद के साथ हुए इस पूरे मामले को देख कर लगता है कि जिस ढंग से उत्तर प्रदेश का प्रशासन आजाद खालिद को सबक सिखाने में अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहा है वो पत्रकारिता जगत के लिए खतरे की घंटी है। हालांकि गाजियाबाद के पत्रकार संगटनों ने पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराने के लिए मांग करते हुए राष्ट्रपति महोदय को ज्ञापन भी भेजा है। पर अभी तक कहीं से कुछ हुआ नहीं है।


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