बाबा रामदेव पर इंडिया टीवी वाले रजत शर्मा की टिप्पणी

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Deshpremi Bharatvanshi नामक किन्हीं सज्जन ने This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it मेल आईडी से ग्रुप में मीडिया के सैकड़ों लोगों को एक मेल किया है, जिसमें एक लेख है और लेखक के बतौर इंडिया टीवी के मालिक रजत शर्मा का नाम है. चूंकि ये मेल रजत शर्मा की मेल आईडी या इंडिया टीवी की मेल आईडी से आफिसियली नहीं आया है, इसलिए ये कनफ्यूजन है कि वाकई ये लेख रजत शर्मा का है या नहीं.

लेकिन भेजने वाले ने जब भेज ही दिया है तो इसे हम भी छाप देते हैं, और, उम्मीद करते हैं कि इंडिया टीवी की तरफ से कमेंट आएगा कि यह लेख रजत शर्मा का है या नहीं. लेख में रजत शर्मा का बाबा के प्रति अदभुत प्रेम दिख रहा है, जो कि इन दिनों का ट्रेंड भी है. बाजारू मानक के हिसाब से नंबर वन बने चैनल के मालिक रजत शर्मा बाबा रामदेव के बारे में क्या सोचते हैं और क्या कुछ बोलते हैं, यह इसे पढ़कर जाना जा सकता है, बशर्ते यह लेख रजत शर्मा का ही हो.

एडिटर

भड़ास4मीडिया

 


 

मैंने बाबा से कहा था- कोई सरकार इतनी बड़ी गलती नहीं करेगी

रजत शर्मा

इंडिया टीवी

5 जून को स्वामी रामदेव ने मुझसे पूछा था कि क्या ऐसा हो सकता है कि पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश करे ? मैंने उनसे कहा कि कोई भी सरकार इतनी ब़ड़ी  गलती नही करेगी “ आप शांति से अनशन कर रहे हैं ,आपके हज़ारो समर्थक मौजूद हैं, चालीस TV Channels की OB Vans वहां खड़ी हैं.” .. मैंने उनसे कहा था 'सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह ऐसा कभी नहीं होने देंगे'...मेरा विश्वास था कि कांग्रेस ने Emergency के अनुभव से सबक सीखा है...पिछले 7 साल के शासन में सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह ने ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे ये लगा हो कि वो  पुलिस और लाठी के बल पर अपनी सत्ता की ताकत दिखाने का कोशिश करेंगे

लेकिन कुछ ही घंटे बाद सरकार ने मुझे गलत साबित कर दिया..मैंने स्वामी रामदेव से कहा था कि आप निश्चिंत होकर सोइये... देर रात मुझे इंडिया टीवी के Newsroom से फोन आया : "सर, रामलीला मैदान में पुलिस ने धावा बोल दिया है"...फिर उस रात टी वी पर  जो कुछ   देखा ,आंखों पर विश्वास नहीं हुआ कोई ऐसा कैसे कर सकता है ...कैमरों और रिपोर्ट्स की आंखों के सामने पुलिस ने लाठियां चलाईं, आंसू गैस के गोले छोड़े, बूढ़े और बच्चों को पीटा, महिलाओं के कपड़े फाड़ दिए...मैंने स्वामी रामदेव को अपने सहयोगी के कंधे पर बैठकर बार-बार पुलिस से ये कहते सुना- "यहां लोगों को मत मारो, मैं गिरफ्तारी देने को तैयार हूं"...लेकिन जब सरकार पांच हजा़र  की पुलिस फोर्स को  कहीं  भेजती है तो वो फोर्स ऐसी बातें सुनने के लिए तैयार नहीं होती...पुलिस वालों की Training डंडा चलाने के लिए होती है, आंसू गैस छोड़ने और गोली चलाने के लिए होती है पुलिस ये नही समझती कि जो लोग वहां सो रहे हैं वो दिनभर के भूखे  हैं , अगर वहां मौजूद भीड़ उग्र हो जाती है तो पुलिस गोली भी चला देती...वो भगवान का शुक्र है कि स्वामी रामदेव के Followers में ज्यादातर बूढ़े, महिलाएं और बच्चे थे या फिर उनके चुने साधक थे जिनकी Training उग्र होने की नहीं है

जब दिन में स्वामी रामदेव ने मुझे फोन किया था तो उन्होंने कहा था - कि किसी ने उन्हें पक्की खबर दी है कि ''आधी रात को हजारों पुलिसवाले शिविर को खाली कराने की कोशिश करेंगे'' और ये भी कहा कि ''पुलिस गोली चलाकर या आग लगाकर उन्हें मार भी सकती है''...मैंने स्वामी रामदेव से कहा था कि ''ऐसा नहीं हो सकता-हजारों पुलिस शिविर में घुसे ये कभी नहीं होगा और आप को मारने की तो बात कोई सपने में सोच भी नहीं सकता''...रात एक बजे से सुबह पांच बजे तक टी वी पर पुलिस का तांडव देखते हुए मैं  यही सोचता रहा कि रामदेव कितने सही थे और मैं कितना गलत...ये मुझे बाद में समझ आया कि स्वामी रामदेव ने महिला के कपड़े पहनकर भागने की कोशिश क्यों की...उन्होंने सोचा जब पुलिस घुसने की बात सही है

लाठियां चलाने की बात सही है  तो Encounter की बात भी सही होगी ...मैं कांग्रेस को अनुभवी नेताओं की पार्टी मानता हूं...मेरी हमेशा मान्यता रही है कि कांग्रेस को शासन करना आता है...लेकिन 5 जून की रात की बर्बरता ने मुझे हैरान कर दिया...समझ में नहीं आ रहा कि आखिर सरकार ने ये किया क्यों ?...उससे भी बड़ा सवाल  ये उठा कि कांग्रेस को या सरकार को इससे मिला क्या?

सरकार को मिला सुप्रीम कोर्ट का नोटिस जिसमें ये बताना पड़ेगा कि रात के अंधेरे में पुलिस की बर्बरता का औचित्य (justification) क्या था...सरकार ये कैसे कहेगी कि हमने ये इसलिए किया कि ये बताना था   कि सरकार की ताकत क्या होती है...हम जब चाहें किसी की भी जुबान पर लगाम लगा सकते हैं...कपिल सिब्बल ने उस दिन शाम को कहा था ( if we know to accommodate, we also know how to rein in)''हम अगर किसी के लिए  रास्ता बनाना  जानते है तो लगाम  लगाना भी जानते है”

कांग्रेस को क्या मिला..जो स्वामी रामदेव बीजेपी से नाता तोड़कर कांग्रेस की तरफ दोस्ती का हाथ बड़ा रहे  थे, उन्हें अपना दुश्मन बना लिया...जो स्वामी रामदेव RSS के लोगों से दूरी बना रहे थे, अपने साथ मुस्लिम नेताओं को खड़ा कर रहे थे ताकि उनकी ऐसी छवि बने जो सबको स्वीकार्य  हो  - उन्हें कांग्रेस ने धक्का देकर RSS के पाले में फेंक दिया...कांग्रेस ने रात को पुलिस से स्वामी रामदेव के समर्थकों की पिटाई करवा कर, मायावती और मुलायम सिंह दोनों को रामदेव के साथ खड़ा कर दिया...जो वृंदा करात स्वामी रामदेव की खुलेआम आलोचना करती थीं, वो रात को TV Channels पर रामदेव के समर्थन  में पुलिस के अत्याचार को सबसे सख्त शब्दों में निंदा करती नज़र आईं

कांग्रेस और सरकार दोनों अन्ना हजारे से परेशान थी...वो रामदेव को अन्ना हजारे के जवाब के रूप में देख रही थी ...लेकिन रात को पुलिस की लाठियों और आंसूगैस ने   इसे उल्टा  कर दिया...जो अन्ना और रामदेव एक दूसरे से उखड़े हुए थे अब साथ-साथ हैं...अन्ना हजारे रामलीला मैदान की पुलिस बर्बरता के खिलाफ अनशन करेंगे...अब सरकार इन दोनों से एक साथ  निबटना होगा

कांग्रेस को क्या मिला? मिला तो बीजेपी को...जो पार्टी बार-बार उठने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसके पास सरकार के खिलाफ कोई बड़ा मुद्दा नही  था...अब पूरी ताकत के साथ मैदान में है .कांग्रेस ने उसके हाथ में एक मुद्दा  दे दिया, रामदेव जैसा लीडर  दे दिया और करोड़ों लोगों का जनाधार ,लोगों को  लाठियां मार-मारकर बीजेपी को उपहार में दे दिया...अब कांग्रेस को बीजेपी से, रामदेव से, अन्ना हजारे की Civil Society से, मायावती से, मुलायम सिंह से, एक साथ लड़ना है...इसके बदले मिला क्या- लालू यादव का समर्थन  जिनके लोकसभा में सिर्फ चार  MP हैं और बिहार में सिर्फ बाईस  MLA हैं

पुलिस की लाठियां चलाने और लोगों का खून बहाने की टाइमिंग भी कमाल की थी कपिल सिब्बल ने रामदेव से हुई डील की चिट्ठी दिखाकर भ्रम पैदा कर दिया था..रामदेव defensive पर थे...वो बार-बार सफाई दे रहे थे कि चिट्ठी में सिर्फ इतना लिखा है कि हमारी सारी मांगें पूरी हो जाएंगी तो दो दिन के बाद अनशन खत्म हो जाएगा...लेकिन रात में 5000 की पुलिस फोर्स  भेजकर सरकार ने रामदेव को Offensive कर दिया...अब वो लगाताक उन सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह पर हमला कर रहे हैं जिनका नाम लेकर उन्होंन पिछले पांच साल में एक शब्द नहीं कहा था.

दिग्विजय सिंह ने स्वामी रामदेव को ठग कहा, उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण को चोर कहा...सरकार से उनकी जांच कराने की मांग की...फिर हिंदुस्तान टाइम्स में खबर छपी कि CBI और ED स्वामी रामदेव के ट्रस्ट और कंपनियों की जांच करेगी...अगर स्वामी रामदेव ठग हैं तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उनसे अनशन वापस लेने की अपील क्यों की ?...प्रधानमंत्री ने एक ठग को चिट्ठी लिखकर ये क्यों कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आपकी मुहिम सही है...अगर स्वामी रामदेव के ट्रस्ट और कंपनियों की जांच होनी है तो देश के Finance Minister प्रणब मुखर्जी तीन और मंत्रियों के साथ उन्हें एयरपोर्ट पर लेने क्यों गए?...अगर कपिल सिब्बल ये जानते थे कि स्वामी रामदेव भरोसे के आदमी नहीं हैं तो फिर सरकार ने भ्रष्टाचार और कालेधन के सवाल पर उनकी ज्यादातर मांगें क्यों मान ली हैं कपिल सिब्बल ने प्रेस कांफ्रेस बुलाकर ये क्यों कहा कि हमने स्वामी रामदेव की सभी मांगे मान ली हैं ?...क्या ये सरकार ऐसे व्यक्ति के साथ डील कर रही थी जिसकी जांच CBI और ED को करनी है

कौन विश्वास करेगा स्वामी रामदेव पर ठगी और बेईमानी जैसे आरोपों का ? दिग्विजय सिंह की बात समझ में आती है, उनका अपना एजेंडा है...लेकिन सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह ने तो कभी ऐसे एजेंडे को नहीं अपनाया...क्या अब CBI और ED के दम पर फिर से साबित किया जाना है कि सरकार की ताकत क्या होती है?...स्वामी रामदेव को ये बताना है कि हमसे लड़ोगे तो तुम्हारा दिमाग ठिकाने लगा देंगे

अगर सरकार ने ये करके अपना इकबाल जतला भी दिया तो क्या मिलेगा ? ...लोकतंत्र में कोई भी जनता का विश्वास राजनैतिक दलों के लिए ऑक्सीजन का  काम करता है...सत्ता का अहंकार- किसी भी पार्टी के लिए तेजाब का काम करता है...इतिहास गवाह है कि लोकतंत्र में डंडे के बल पर शासन नहीं चलता...जो सरकारें विरोध के स्वर का सम्मान करती हैं, शांतिपूर्ण ढंग से आलोचना करने वालों की बात सुनती हैं, वही सरकारें ज्यादा दिन चलती हैं...ये फैसला कांग्रेस को करना है  कि उसे आक्सीज़न  चाहिए या तेज़ाब.


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Comments (13)Add Comment
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written by P Negi, June 13, 2011
यशवंत जी इस लेख की आरम्भ में अपने लिखा है " लेख में रजत शर्मा का बाबा के प्रति अदभुत प्रेम दिख रहा है" कमाल है, जो हुआ उस सर सारी दुनिया थू थू कर कर रही है और आपको इसमें भी बाबा प्रेम दीखता है. जो हुआ वो लोकतान्त्रिक तो कतई नहीं था साथ ही वीभत्स भी था. कभी तो नकारात्मकता का चश्मा उतर दिया करो आप. मुझे तो लगता है की आप भी दिग्विजय के रस्ते पर न चले जाएँ- ""जो तुमको हो पसंद .. वही बात कहेंगे""
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written by R.Rastogi, June 13, 2011
हमारे देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि दुनिया के "सबसे बड़े लोकतंत्र" को वो कॉंग्रेस पार्टी चला रही है, जिसका नेत्रत्वा आज़ादी के बाद से ही "राजतन्त्र" के हाथों में है. रजा कि मौत के बाद उसकी बेटी ने राज किया, बेटी के बाद फिर उसके बेटे ने राज किया, बेटे के जाने के बाद बेटे कि पत्नी राज कर रही है, और पत्नी के बाद फिर से बेटा "युवराज" बनकर राज करने को तैयार है, आखिर समझ में नहीं आता कि इसे लोकतंत्र कहें या राजतन्त्र ?? आखिर पिछले ६० सालों में इस देश में कोई ऐसा परिवार नहीं हुआ जो कॉंग्रेस में नेतृत्व कर सके?? या कि उसे मौका ही नहीं दिया गया.
हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी. बापू जी स्वर्ग सिधार गए, लेकिन दुर्भाग्य है कि उनके बेटों, पोतों के बारे में भारत के आधा से ज्यादा लोग नहीं जानते. वो जानते हैं तो बस सोनिया गाँधी, रह्हुल गाँधी. जो कभी गाँधी थे ही नहीं. जो आज भी गाँधी नाम इसलिए रखते हैं, क्योंकि इस नाम से उनको गारंटी मिलती है इस देश पर राज करने कि और "राजा का बेटा राजा" युक्ति को चरितार्थ करने की.
काले धन की जांच करने से पहले इटली में सोनिया मेमसाहब के परिजनों की संपत्ति की जांच होनी चाहिए, जो भारतीयता का पल्लू ओढ़े इस देश की जनता को बेवक़ूफ़ बना रही है. पूछिए ज़रा इनसे की क्या इस देश की सच्ची बहु वो करवा सकती है जो रामलीला मैदान पर देखने को मिला.? आखिर जब पूरे विश्व का मीडिया बाबा रामदेव की इस मुहीम पर नज़रें गढ़ाए बैठा था तो इस देश की ठेकेदार इस महिला ने एक शब्द तक नहीं बोला. बस अपने प्यादों...के ज़रिये (जिनमे पहले नंबर पर हैं दिग्विजय सिंह) अपनी बात बताती रही. ये वही भारतीय बहू है जिसने सत्य पर असत्य की विजय के प्रतीक रामलीला मैदान पर पहली बार सत्य का मानमर्दन करते दिखाया.
शर्म आती है कॉंग्रेस के उन नेताओं पर जो खुद को भारतीय कहते हैं. और एक विदेशी मेमसाहब और उनके कथित युवराज की गुलामी करते हैं. खासकर दिग्विजय सिंह को तो डूब ही मरना चाहिए. इतना वफादार तो सबसे बेहतरीन ब्रीड का कुत्ता भी नहीं होता जितना की ये हैं.
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written by faisal khan, June 13, 2011
rajender bhai ne likha hai ki jab musalman apne baap ke nahi huve to kisi aur ke kiya honge.bhai aap shayad apne bare mai likh rahe hain aaj tak ki hindustan ka itihas utha kar dekh lo bahar se jab bhi akrman kari aaye to ghaddari karne wale kaun the.samajh mai aayi ya nahi doosri baat ye ki musalman is desh ke sachche hamdard hain aur unko aap jaise zaleel logon se koi sertificate nahi chahiye.agar aap sochte hain ki ye desh apka hai to mughalta nikal den ye desh na to aap ka hai aur na hi aapke baap ka.agar musalman ko is desh se nikalne ki ghalat fehmi dimagh mai hai to foran nikal do apki itni auqat nahi hai musalman isi desh mai rahega aur rehta aaya hai jahan musalmano mai kuchh ghalat log hain to us se zayada apme bhi hai ghalat log sab jagah hote hain jaise ki aap hain musalman aap jaison ke rehmo karam par yahan nahi reh raha aur rahi baat bakwas karne ki to bhai vo koi bhi kar sakta hai lekin tumhara haal vo hai ki sale kar kucch nahi sakte sirf likh kar apni bhadas nikal lete hai.sirf aik mashwara dunga ki 7 janam tak tumhara mansuba poora hone wala nahi hai.musalman isi desh mai rahega yahin paida hoga yahin marega aur rahi baat musalman ki desh bhakti ki to tum se zayada desh bhakt hai samajh gaye ya kuchh aur samjhaon.likhne se mardangi ka pata nahi chalta kabhi is mardangi ko azma kar dekhna,,m faisal khan(saharanpur)
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written by Sunil Balyan, June 13, 2011
पहली लाइन में ही गलत लिखा है की स्वामी रामदेव ने 5 जून को पूछा था , मुझे लगता है की ये 4 जून होना चाहिए
क्योकि 5 जून की सुबह 1 :30 बजे लाठी चार्ज शुरू हो गया था
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written by anil arya, June 13, 2011
yah lekh Dainik Bhaskar men prakashit ho chuka he..maine khud ise padha he...
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written by vikrant srivastav, June 13, 2011
we are with ramdev , ......the govt. will have to aslo provide Baba's
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written by vikrant srivastav, June 13, 2011
this is totally right ...con. are not able to rule over us..they forgotten their duties , all Indians are agree with Baba Ramdev...i am also with him.....vs
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written by Rajendra Kumar Singh, June 13, 2011
मेरी निगाह में सरकार का रिमोट कण्ट्रोल कही और है. जिस सोनिया गाँधी को देश का सबसे बड़ा हमदर्द कांग्रेस बताती है, मै तो समझाता हु की वो सिर्फ और सिर्फ देश की दुश्मन है. जब भी कोई देश की संस्कृति, सभ्यता, भाषा, सम्मान, राष्ट्र गौरव की बात करता है, तो ये कांग्रेस वाले, सियार की तरह एक स्वर में चिल्लाते है की इसके पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का हाथ है. इसका मतलब है की देश की संस्कृति, सभ्यता, भाषा, सम्मान, राष्ट्र गौरव की बात करना सिर्फ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कम है. कांग्रेस का कम सिर्फ मुस्लिमो का तुस्टीकारन करना है. चाहे उससे देश गर्त में चला जाय. इनको ये समझ में नहीं आता है की जब मुस्लमान अपने बाप के नहीं हुए तो इनके क्या होंगे. किसी भी आतंकवादी को सजा न देना, आतंकवादियों का परोक्ष रूप से समर्थन करना. ये सोचते है की जब ये लादेन या daud का समर्थन करेंगे तो देश में मुसलमानों का वोट इन्हें मिल जायेगा. अपनी इस करनी से ये सारी मुस्लमान जनता को आतंकवादियों की श्रेणी में खड़ा कर देते है. बहुत ही अफ़सोस के साथ खाना पड़ रहा है की हमारा देश पुनः विभाजित हो चूका है, इंडिया और भारत.
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written by Abhay Kumar, June 13, 2011
Abhay Kumar,


Among all the channel Heads Rajat Sharma has closet affiliation with Baba Ramdev. On many occasions Baba Ramdev issued Exclusive staement for India Tv/Rajat Sharma inspite of Many others channels in line.

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written by मदन कुमार तिवारी, June 13, 2011
लेख चाहे किसी का हो छप गया तो जवाब देना हीं पडेगा। पहली बात यह सुनों आजतक मैने पुलिस को खासकर हिंदुस्तान की पुलिस को इतना कम बल प्रयोग करते नही देखा था, इसी कारण से मुझे शक है कि रामदेव की चाल भी हो ससकता aै धरना ससमाप्त कराने का aa तरीका। दुसरी बात दिन में अर पुलिस आती तो ज्यादा हंगामा और नुकसान होता । तिसरी बात रामदेव ने गिरफ़्तारी की बात नही कहीं बल्कि बार-बार किसी जाहिल के सिखाने पर कहते हुये aजर आयें की दिन में वारंट लेकर आओ गिरफ़्तार करने। यार प्रिवेंटिव डिटेंशन के लिये वारंट नही लाना पडता है । कायर के पक्ष में तर्क के लिये धन्यवाद सहित रांची , छपरा सब ।
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written by balveer vaid, June 12, 2011
Bahot sahi kaha apne.lagata hai cong .ke netao ki umar ho gayi 60 our akal gayi naat.arthat akal kam nahi kar rahi cong.ki
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written by धीरेन्द्र, June 12, 2011
लिखा तो बिल्कुल ठीक है, पक्ष में हो या विपक्ष में रामदेव के. लेकिन बातें बिल्कुल उचित हैं.
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written by Raj Kanojia, June 12, 2011

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