पत्रकार सुरक्षा बिल को क्या मंत्रियों का समर्थन मिल पाएगा?

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विजय सिंह मुंबई, मिड डे के वरिष्ठ पत्रकार जेडे की हत्या के बाद तीन वर्षों से लंबित पडे़ पत्रकारों पर होने वाले हमले को गैर जमानती बनाने संबंधी कानून को लेकर महाराष्ट्र में एक बार फिर सरगर्मी बढ़ गई है. महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी इस विधेयक का समर्थन करती हैं. हम चाहेंगे कि यह कानून जल्द से जल्द बनाया जाए.

इस बीच मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने इस विधेयक के प्रारुप को बुधवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में रखने की बात कही है. वहां से मंजूरी के बाद इसे विधानमंडल के मानसून सत्र में सदन के पटल पर रखा जा सकेगा. सोमवार को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह सहित पार्टी के प्रनिधिमंडल के साथ हमने मुख्यमंत्री चव्हाण से मुलाकात कर जेडे हत्याकांड में दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किए जाने और जेडे के परिवार की मदद करने की मांग की है.

पत्रकार परिषद में पत्रकारों ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि पिछले तीन सालों से पत्रकार हमला विरोधी कानून का विधेयक लंबित पड़ा है. इस बारे में कांग्रेस की क्या नीति है? चव्‍हाण ने कहा कि पार्टी की स्पष्ट नीति है कि यह कानून बनना चाहिए. मैं अपने पार्टी के मंत्रियों से अपील करुंगा कि वे इस विधेयक का समर्थन करें. दरअसल शिवसेना सहित राकांपा के कई मंत्री इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि पत्रकार की हत्या मामले को लेकर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव व महाराष्ट्र के प्रभारी मोहन प्रकाश ने फोन पर मामले की जानकारी ली है. 

भाजपा भी विधेयक के समर्थन में : वरिष्ठ भाजपा नेता विधान परिषद में विरोध पक्ष के नेता पांडुरंग फुंडकर ने कहा है कि सरे आम एक वरिष्ठ पत्रकार की हत्या राज्य के गृह मंत्रालय के लिए शर्म की बात है. उन्होंने कहा कि पत्रकारों पर हमले रोकने के लिए सरकार को तुरंत कानून बनाना चाहिए.

अन्ना भी समर्थन में आए :  इस बीच सुप्रसिद्ध समाजसेवी अन्ना हजारे ने भी पत्रकार की हत्या किए जाने की निंदा करते हुए कहा है कि मीडिया पर हमला लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है. उन्होंने कहा कि पत्रकारों पर हमले रोकने के लिए कडे़ कानून की जरुरत है. सरकार को यह कानून बनाना चाहिए. इस बारे में मैं मुख्यमंत्री चव्हाण से बात करुंगा.

नेताओं को क्यों है एतराज : यह विधेयक पिछले तीन साल इस लिए अटका पड़ा है क्योंकि इसकों लेकर नेताओं में एक राय नहीं बन पा रही है. पिछले साल सितंबर में इस पर सहमति बनाने के लिए तत्‍कालीन मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी. पर इस बैठक में विधेयक को सभी दलों का समर्थन नहीं मिल सका. दरअसल पत्रकारिता के नाम पर कुछ भी उलुल-जलूल काम करने वाल़े गली-कूचों से निकल रहे अख़बार वालों की वजह से महाराष्ट्र में पत्रकारों पर होने वाल़े हमलों के मामले को गैर-जमानती अपराध बनाने वाला विधेयक पारित नहीं हो पा रहा है. नेताओ को आशंका है कि विधेयक पारित हो जाने के बाद खबरों के नाम पर ब्लैकमेलिंग करने वाले लोग इस कानून का दुरुपयोग करने लगेंगे.

महाराष्ट्र में पत्रकारों पर हमले की बढ़ती घटनओं को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने पत्रकारों पर हमले को गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में लाने की योजना बनाई है. इसके लिए विधानसभा में विधेयक लाना होगा. विधेयक पर आम सहमति बनाने के लिए सितंबर, 2010 में सरकारी अतिथि-गृह सह्याद्री में सभी पार्टियों के नेताओ की बैठक बुलाई गई थी. बैठक में शामिल लगभग सभी दलों के नेताओं ने विधेयक के मौजूदा स्वरूप पर आपत्ति जताई.

बैठक में शामिल समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक अबू आसिम आज़मी ने इस पत्रकार से कहा था कि हम इस कानून के विरोध में नहीं है. लेकिन यह कानून किन पत्रकारों के लिए होना चाहिए. पत्रकारों का वर्गीकरण जरुरी है. आज़मी ने कहा कि हफ्ते-महीने में दो-चार पन्ने का अख़बार निकलने वाल़े कुछ लोग किसी के बारे में कुछ भी छाप देते हैं. ऐसे लोग तो इस कानून की आड़ में लोगों का जीना मुहाल कर देंगे. उन्होंने बताया कि बैठक में शामिल लगभग सभी नेताओं की यही राय थी. यदि इस विधेयक पर सहमति बन गई होती तो पिछले साल ही महाराष्ट्र विधान मंडल के नागपुर अधिवेशन में इस विधेयक को पेश किया जा सकता था. इस विधेयक  का सबसे ज्यादा विरोध शिवसेना की तरफ से हैं. क्योंकि शिवसेना के लोग मीडिया पर हमले के लिए सबसे अधिक बदनाम रहे हैं.

लेखक विजय सिंह कौशिश नवभारत, मुंबई के वरिष्‍ठ संवाददाता हैं.


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Comments (5)Add Comment
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written by kesharsingh bisht, June 15, 2011
achhi report hai. good.
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written by laxman, June 14, 2011
achi report hai sir ...padh kar patrakar ki surksha bill ke rukne ka karan pata chal...
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written by Indian citizen, June 14, 2011
पुलिस कानूनों का दुरुपयोग करती है तो क्या पुलिस महकमा बन्द कर दिया गया. मन्त्री घोटाले करते हैं तो क्या मन्त्री बनाना और बनना बन्द कर दिये गये.
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written by rahul sharan, June 14, 2011
loktantra ke chouthe stambh par hamle na ho, iske liye patrakaar hamla virodhi kanoon jaldi se jaldi parit karna chahiye.anya rajyo m bhi is tarah ke kadam uthana jaruri h taki patrakar nirbhik hokar kam kar sake.
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written by Rajesh Kumar, June 14, 2011
Patrakaron ke hit ki is bidheak ko manjori milni hi chahiye. kyonki aaye din patrakaron par gunda mawaliyon dwara jan lewa hamla kiya jata hia aur patrakar unke khilaf kanun nahi rahne ke karan koyee bhi karawaye nahi kara sakte hain.jisse un gunda mawalion ka mnobal barhta rahta hai.

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