प्रेस-वार्ताओं में असुविधाजनक सवालों से बचने के कुछ नुस्ख़े

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संजय

मुझपर हमला राष्‍ट्र पर हमला है, संस्कृति पर हमला है, नदियों पर हमला है... मुझे अपनी बात पूरी कर लेने दीजिए.. चांद पर हमला है, सूरज पर हमला है, शांति पर हमला है, क्रांति पर हमला है, धरती माता पर हमला है, आसमान पर हमला है...

हिंदू पर हमला है, मुसलमान पर हमला है, इंसान पर हमला है, जानवरों पर हमला है, ब्रह्मांड पर हमला है बिल्ली पर हमला है, चूहे पर हमला है, जो मुझे समर्थन दे रहे हैं, जो देने वाले हैं, जो दे सकते हैं, उन सब पर हमला है...

सरकार को इसकी क़ीमत चुकानी होगी...

मैंने कभी ऐसा नहीं कहा...

मैं अनर्गल सवालों के जवाब नहीं देना चाहता...

वे लोग इस लायक नहीं कि मैं उनपर कोई टिप्पणी करुं...

आपने बहुत सवाल पूछ लिए ( हें हें करके हंसते हुए) अब ज़रा उन्हें भी मौक़ा दें...

अभी सिर्फ़ इस मुद्दे पर बात कीजिए, भटकाईए मत...

मैंने ऐसा कब कहा....

जनता सब देख रही है, मेरा बोलना ज़रुरी नहीं है...

यह प्रशासन का काम है, पार्टी का नहीं..

इसपर सरकार निर्णय लेगी पार्टी नहीं...

देखिए, अब तो वे ऐसा कहेंगे ही.....

मैंने कभी ऐसा नहीं कहा...

देखिए, अब तो वे ऐसा कहेंगे ही.....

मैं उनका बहुत सम्मान करता हूं पर यह आरोप लगाकर उन्होंने घटियापने की इंतिहा कर दी...

अभी मेरी बात ख़त्म नहीं हुई है...

मैंने अभी अपनी बात शुरु तो की ही नहीं आप पहले ही निष्कर्ष पर पहुंच गए....

वे कोई हमसे अलग थोड़े ही हैं, गठबंधन का हिस्सा हैं।

वे हमारे गठबंधन का हिस्सा हैं तो क्या, लोकतंत्र में सभी को अपने विचार रखने का हक़ है.....

आप भी...ही ही ही ही.....

छोड़िए भी...हें हें हें हें......

चलिए...हो हो हो हो....

हा हा हा हा हा हा हा .........

लेखक संजय ग्रोवर ब्‍लॉगर हैं. यह लेख उनके ब्‍लॉग पागलखाना से साभार लेकर प्रकाशित किया गया है.


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