महासमुंद का जनसंपर्क विभाग और पत्रकार : अंधा पीसे- कुत्‍ता खाय

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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से नजदीक का जिला है महासमुंद। जहां पत्रकारिता में इन दिनों 'अंधा पीसे, कुत्ता खाए'  वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। यहां जनसंपर्क विभाग के द्वारा जारी खबरों में रोज-रोज गलती कोई नई बात नहीं। लंबे अर्से से जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी खबरों में गलती पर गलती देखी जा रही है। अब तो महागलती होने लगी है।

शासन-प्रशासन और मीडिया के बीच की सेतु जनसंपर्क विभाग के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी जब गलती पर गलती करेंगे तो लोक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आम आदमी को कितना सही-सही मिल पाएगा। इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। यहां हम पत्रकारों की कार्यप्रणाली पर आखिरी में प्रकाश डालेंगे। पहले बात करते हैं, जनसंपर्क विभाग की गलतियों की। नीचे संलग्न जनसंपर्क विभाग के समाचार-पूर्व सरपंचों से राशि वसूली जारी पर जरा गौर करें। आप पाएंगे कि पूर्व सरपंचों से वसूली गई है 11 लाख 8 हजार 68 रुपए मात्र। और जनसंपर्क विभाग का गणित इतना कमजोर है कि एक करोड़ दस लाख आठ हजार 68 रुपए वसूली होना बता दिया गया। अनेक अखबारों में यह गलत समाचार अक्षरशः प्रकाशित भी हो गया।

दरअसल माजरा यह है कि एसडीएम ने पूर्व सरपंचों से बकाया वसूली अभियान चला रखा है। इस क्रम में बागबाहरा जनपद क्षेत्र के पूर्व सरपंचों से सात लाख 83 हजार 68 रूपए और महासमुंद जनपद क्षेत्र के पूर्व सरपंचों से तीन लाख पच्चीस हजार वसूल किया गया है। इस प्रकार कुल राशि हुई 11 लाख 08 हजार 68 रुपए। इसे अंकों में हम लिखेंगे 1108068 रुपए। इसे जनसंपर्क विभाग के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों ने पढ़ा एक करोड़ दस लाख आठ हजार 68 रुपए। और समाचार बनाकर समाचार पत्रों में 8 जुलाई को भेजा। भेजे गए समाचार का मूल नीचे अक्षरशः प्रकाशित है। ये तो हुआ जनसंपर्क विभाग की महागलती। महागलती इसलिए कह रहे हैं कि इसके पहले जनसंपर्क विभाग ने अनेकों ऐसी गलतियां की है, जिसे पढ़कर आप दांतों तले ऊंगली दबा लेंगे। इस साल ग्राम सुराज अभियान के दौरान कलेक्टर का सरनेम ही बदल दिया। हमारे पत्रकार साथी भी इतनी मदहोशी में रहते हैं कि कलेक्टर का सरनेम बदला हुआ समाचार को भी अक्षरशः प्रकाशित कर डाले।

कुष्ठ मुक्ति महाअभियान के प्रचार के नाम पर पत्रकारों को एक-एक हजार रुपए कथित तौर पर जनसंपर्क अधिकारी द्वारा दिए जाने का मामला भी सुर्खियों में रहा। प्रत्यक्षदर्शी तो यहां तक बताते हैं कि महासमुंद के जनसंपर्क अधिकारी के रवैये से सख्त नाराज जनसंपर्क संचालनालय के आयुक्त व प्रमुख सचिव एन बैजेंद्र कुमार ने महासमुंद के जनसंपर्क अधिकारी को तत्काल हटाने का निर्देश दिया था। प्रशासन की छवि धूमिल करने वाले कृत्य के लिए कड़ी फटकार भी लगाई थी। महासमुंद प्रेस क्लब ने जनसंपर्क अधिकारी के रवैये से नाराज होकर निंदा प्रस्ताव भी पारित किया था। बावजूद रवैये में कोई सुधार नहीं आया और गलती पर गली और महागलती का दौर जारी है। ये तो हुआ जनसंपर्क विभाग की अंधेरगर्दी और अब बात करते हैं मीडिया के कर्णधारों की। अपने को ब्यूरो चीफ, वरिष्ठ पत्रकार और न जाने क्या-क्या कहने वाले साथी पत्रकार सबकुछ जानते हुए भी जनसंपर्क विभाग की खबरें अक्षरशः प्रकाशित कर पाठकों के कोप भाजन का पात्र बन रहे हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा- अंधा पीसे, कुत्ता खाए।

ये है जनसंपर्क विभाग की खबर -


जनसंपर्क कार्यालय, महासमुंद

समाचार

पूर्व सरपंचों से राशि वसूली जारी

महासमुन्द, आठ जुलाई 2011/ जिले में महासमुंद और बागबाहरा विकासखण्ड के अंतर्गत ऐसे भूतपूर्व सरपंच जिन्होंने निर्माण कार्य की राशि आहरण कर निर्माण कार्य पुरा नहीं कराया, उनसे बकाया राशि वसूली की कार्रवाई की जा रही है। इसके तहत महासमुंद अनुविभाग में अब तक 97 भूतपूर्व सरपंचों/पंचायत पदाधिकारियों से एक करोड़ दस लाख आठ हजार 68 रूपए की राशि वसूली की जा चुकी है।

अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिन भूतपूर्व संरपचों ने निर्माण कार्यों हेतु राशि का आहरण कर निर्माण कार्य पुरा नहीं कराया, उनके विरूद्ध पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 92 के तहत कार्रवाई की जा रही है। इसके तहत अब तक जनपद पंचायत बागबाहरा के भूतपूर्व सरपंचों से सात लाख 83 हजार 68 रुपए और महासमुंद के भूतपूर्व सरपंचों से तीन लाख 25 हजार रुपए वसूल किया गया है। बताया गया वसूली कार्रवाई के तहत आज ग्राम पंचायत अछोला के भूतपूर्व सरपंच श्री बिसहत राम धु्रव से 15 हजार, ओंकारबंद के श्री नीरज चंद्राकर से 25 हजार रुपए, कुलिया की भूतपूर्व सरपंच श्रीमती डूमेश्वरी सिन्हा से 36 हजार 539 और कुर्रूभाठा के भूतपूर्व सरंपच श्री हिम्मतलाल से 20 हजार रुपए वसूल किया गया। इस तरह कुल 96 हजार 539 रुपए इस कार्रवाई में वसूल किए गए।

क्र/26

लेखक आनंद साहू महासमुंद में पत्रिका के ब्‍यूरोचीफ हैं.


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Comments (4)Add Comment
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written by anand sahu, mahasamund, July 17, 2011

राहुल प्यारे !
सबसे पहली बात तो ये कि मैने किसी भी पत्रकार साथी को कुत्ता नहीं कहा। दूसरी बात ये कि मैं अच्छी तरह जानता हूं कि ये कामेन्ट्स तुमने अपने किस अब्बा के इशारे पर लिखा है। तुम तो अभी बच्चे हो। अपने अब्बा जान से ही पूछ लिया होता कि अंधा पीसे और कुत्ता खाय का मतलब क्या होता है? चलो मैं ही बता देता हूं। मैं भी तो पत्रकार हूं। तुम सोच सकते हो कि मैं अपनी ही बिरादरी को श्वान की उपाधि कैसे दे सकता हूं। हम सब तो इंसान हैं ना, न केवल इंसान बल्कि तथाकथित बुद्धजीवी। दरअसल अंधा पीसे, कुत्ता खाय एक मुहावरा है जिसका अर्थ है-कोई देखने वाला नहीं है। जनसंपर्क विभाग के लोग कुछ भी परोस रहे हैं और हम आंख मूंदकर उसे अपने अखबारों में प्रकाशित कर रहे हैं। इसके लिए मैने इस मुहावरा का प्रयोग किया है। इसमें तुम्हारी गलती नहीं कि तुम मुझे बदजुबान कहो। बदजुबान तो तुम्हारा वह अब्बा जान है जो चौबीसों घंटे अश्लील बातें करते रहता है। जिसके इशारे पर संभवतः तुमने यह कामेंट्स लिखा है। संभव हो तुम्हारे नाम के आगे फर्जी सरनेम जोड़कर उन्होंने ही कामेंट्स पोस्ट कर दिया हो। कोई बात नहीं । अब तो समझ ही गए होगे कि अंधा पीसे और कुत्ता खाय क्या होता है। प्यारे, तुम्हे सोचना चाहिए अगर मैं पत्रकारों को कुत्ता संबोधित करता तो यह नहीं लिखता कि अंधा पीसे मैं ये लिखता कि अंधरी पीसे। जनसंपर्क के गलत समाचार के फेर में आम पाठक के पास कौन पिसा जा रहा है, इसका तुम्हे अंदाजा नहीं है। अभी बच्चे हो ना,बड़े होकर सब समझ जाओगे।
-आनंद साहू, महासमुंद छग
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written by Rahul Sachdeo, July 16, 2011
Patrkaron ko kutta kahne wale badjuban Anand Sahu ki maI Ninda karta hun.
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written by आनंद साहू, महासमुंद, July 13, 2011
तथाकथित उदित नारायण सिंग जी, नमस्कार!
आपने भास्कर के पत्रकारों को पत्रिका में भाव नहीं मिलने की बात भड़ास डाट काम पर पढ़ने संबंधी कामेंट्स लिखा है। जिसका इस प्रसंग से दूर-दूर तक कोई ताल्लुकात नहीं है। क्योंकि, मैं तो पत्रिका में 11 महीने से सेवारत हूं। और मेरी खबरों को प्राथमिकता से पत्रिका में बराबर स्थान मिल रहा है। तब ये बात कहां से आ गई कि भाव नहीं मिल रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि आप पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं और बौखलाहट में कामेंट्स लिखे हैं। यदि आपमें जरा भी साहस है तो अपने वास्तविक नाम, पता, मोबाइल नंबर और ईमेल पता के साथ सामने आएं। पहचान छुपाकर बुजदिलों की तरह कामेंट्स लिखने का क्या मतलब है ? रहा सवाल पत्रिका में भाव नहीं मिलने का तो उन लोगों को नहीं मिल रहा होगा, जो निकम्मे हैं। पत्रिका में मेहनतकश लोगों की बराबर कद्र है। मेरी तुलना कांग्रेस के दिग्विजय सिंह से कर रहे हैं तो अपने आप में बड़ी बात है। दिग्विजय सिंह ऐसे लीडर हैं जिनमें छत्तीसगढ़ को केंद्र सरकार में लालबत्ती दिलाने की कुबत तो है। ये जाहिर हो चुका है कि चरणदास महंत ने कल जो शपथ लिया, वह दिग्विजय सिंह की देन है। यदि आपका आशय विवादास्पद बयानों के लिए दिग्विजय सिहं के जाना जाने के संबंध में है तो मेरे इस लेख में ऐसा कोई भी अंश विवादास्पद नहीं है। जो भी है, आईने की तरह साफ है। हमारा उद्देश्य जनसंपर्क विभाग की गलती पर गलती और अब हो रही महागलती पर विराम लगाने का प्रयास करना है। आपके समान पहचान छुपाकर चुगली करना नहीं। जो भी कहना है अपनी पहचान के साथ सामने आकर कहें। हम स्वागत करेंगे। - आनंद साहू, महासमुंद
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written by udit naryan singh, July 12, 2011
bhadas.com per he mainey padha hai ke bhaskar ke patrkaron ko patrika me nahi mil raha bahwa to ye mahashye kahli baith kar kaya kare inka behi haal congress ke digvijay singh jaisha hai kuch nahi to yai hi sahi. akhir hai to bhaskar ke padish.


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