शर्म करो! 'नियत' नहीं 'नीयत' होगा सुदर्शन न्यूज वालों

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आज सुबह जैसे ही आंखें खुली, न्यूज देखने की हसरत से टीवी आन किया. सहसा सुदर्शन न्यूज की उस खबर की तरफ निगाहें बरबस ही ठहर गई. खबर थी 'सरकार की नियत साफ नहीं - अन्ना हजारे'. और बार-बार इस खबर को फ्लैश किया जा रहा था. सामने ही एक खूबसूरत एंकर काफी आत्म विश्वास के साथ बेधड़क न्यूज पढ़े जा रही थी. लेकिन टीवी पर प्रसारित 'नियत' शब्द दिल में कचोट रहा था.

और उस एंकर की खूबसूरती पर बदनुमा धब्बे जैसा दिख रहा था. यहां मानक शब्द ' नियत' नहीं 'नीयत' होना चाहिए था. इसी के साथ मैं खो गया अपनी पत्रकारिता के शुरुआती दिनों में. तब 2005 में हिन्दुस्तान, पटना के फीचर डेस्क से जुड़कर गुरु अवधेश प्रीत के सान्निध्य में पत्रकारिता की एबीसी सीख रहा था. उन दिनों पत्रकारिता के स्ट्रगलर छात्र श्री प्रीत का नाम काफी गर्व व सम्मान से लेते थे. साथ ही उनकी कही हुई बातों पर बारीकी से ध्यान देते थे.

दरअसल हमारा मानना था कि वे पत्रकारिता की ऐसी चलती-फिरती पाठशाला हैं, जिससे पास आउट होकर सैकड़ों सफल पत्रकार निकले हैं. हालांकि अवधेश प्रीत का शिष्य बन उनको झेलना सबके वश की बात नहीं थी, क्योंकि वे कड़ी परीक्षा लेते थे. एक दिन मैं एक आलेख लेकर उनके पास पहुंचा. क्लीन शेव व वेल मेंटेन लिबास में था. वे मेरा आलेख इत्मीनान से पढ़ते हुए अशुद्धियां भी काटे जा रहे थे, उनके चेहरे पर आ रहे नकारात्मक भाव-भंगिमा को देख मेरा कलेजा डांट की डर से धड़कने लगा.

आखिर हुआ वही, उन्होंने आगबबूला होते हुए कहा, यार सौरभ, समझ में नहीं आता तुम्हें पत्रकारिता के कीड़े ने कैसे काट लिया. न व्याकरण की जानकारी, न भाषा शुद्ध और न ही लेखन में रचनात्मकता. इस प्रतिष्ठित अखबार को रद्दी की टोकरी समझ लिए हो जो तुम्हारा कुछ भी ऊलुल-जुलूल लिखा छाप देगा. फिर मेरे द्वारा सॉरी कह आइंदा ऐसी गलती नहीं करने की बात से वे थोड़ा नम्र हुए. उन्होंने कहा, देखो, अशुद्ध लेखन से पाठकों के बीच अखबार व पूरी संपादकीय टीम के प्रति गलत संदेश जाता है. पत्रकारिता के क्षेत्र में सफल होने के लिए तुम्हारा छह फुट आठ इंच लम्बा कद व संजना-संवना नहीं बल्कि भाषा व व्यारण के संग रचनात्मक लेखन पर पकड़ ही काम आएगा. यही तुम्हारी जमा-पूंजी होगी. चमकाना ही है तो चेहरा नहीं कंटेंट चमकाओ तो बात बने. काश आज के मीडियाकर्मी भी इन चीजों को समझ पाते.

लेखक श्रीकांत सौरभ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता हैं.


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