भूत, भभूत और भय से आगे की खबरों का दौर

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भविष्यवाणी, भूत-प्रेत, भय, भभूत भारतीय न्यूज मीडिया से खत्म हो चुके हैं या जल्द ही खत्म होने जा रहे हैं। इसलिए नहीं कि इनकी टीआरपी नहीं है, बल्कि इसलिए कि चैनलों में शीर्ष के स्तर पर एक नया दायित्व-बोध उभरा है।

लगभग दो साल पहले जब एक क्षेत्रीय चैनल के छोटे-से कमरे में देश के सभी टीवी एडीटर्स ने बैठकर यह फैसला किया कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की लगातार गिर रही छवि को बेहतर करेंगे, तो जन्म हुआ ब्रॉडकास्टर एडीटर्स एसोसिएशन का। एसोसिएशन का उद्देश्य इतना भर था कि भटके हुए कंटेंट को बेहतर किया जाए। शायद ही कुछ लोगों ने इस सदाशयता को उस समय गंभीरता से लिया था। उदाहरण दिए जाने लगे कि कैसे एक न्यूज चैनल आज भी सांप-बिच्छू दिखा रहा है, दूसरा भूत-प्रेत दिखा रहा है और तीसरा प्रलय की आशंकाओं से डरा रहा है।

किसी भी संस्था के भटकने में कम समय लगता है, वापस पटरी पर आने में ज्यादा। लेकिन पटरी पर लाना संपादकों का वायदा था। भले ही सब कुछ पूरी तरह न सुधरा हो, लेकिन संपादकीय चेतना उस मुकाम तक आ गई है, जब अगर एक संपादक अपने पैरामीटर्स से भटकता है, तो चार अपने लोग उंगली उठाते हैं और एक अगर बेहतर करता है, तो चार अन्य मंथन शुरू कर देते हैं।

पिछले दो साल में राजनीतिक वर्ग की सबसे ज्यादा कोशिश रही कि मीडिया पर नकेल कसी जाए, किसी कानून के जरिये। हमने सरकार से और जनता से वायदा किया था कि दो साल में भटकाव खत्म होगा और तीन साल के अंदर भारतीय मीडिया अपनी सार्थक उपादेयता पर वापस लौटेगा। अयोध्या विवाद पर आए फैसले के दौरान भारतीय न्यूज मीडिया ने जिस शालीनता का परिचय दिया या हाल के मुंबई ब्लास्ट के दौरान जिस तरह का संयम बरता, वह इसका उदाहरण है।

आज सभी चैनलों ने स्वत:स्फूर्त चेतना के तहत अपने मनोरंजन के प्रोग्राम को कम करके उसमें खबरें डालना शुरू किया है। बाबाओं का टीवी पर दिखना कम हुआ है, ज्योतिष के प्रोग्राम सिर्फ अवसर विशेष या पर्व विशेष पर दिखाए जाने का सिलसिला शुरू हुआ है। स्टार न्यूज ने तो अपने यहां तीन देवियां, बोलो वत्स पहले ही बंद कर दिया था। इंडिया टीवी का कहना है कि सांप, बिच्छू, भूत-प्रेत, एलियन्स हमने अपने यहां से हटा दिया और प्राइम टाइम में 80 प्रतिशत शुद्ध खबरें होती हैं, जो रिपोर्टर बेस्ड होती हैं, मसलन पांच मिनट में 25 खबरें।

आजतक ने भी अपने कई प्रोग्राम हटा लिए और चैनल में लगातार मंथन चल रहा है कि धर्म कितना दिखाएं, किस तरह से दिखाएं। आईबीएन-7, जी, आजतक और स्टार ने मनोरंजन के अपने कार्यक्रमों को प्राइम टाइम में गुडबाय कर दिया। जी, स्टार, आईबीएन-7 ने वास्तु से तौबा कर लिया है। यह सब कोई आमूल-चूल बदलाव नहीं है, लेकिन खामियों को दूर करना भी कोई छोटी बात नहीं।

लेखक एनके सिंह साधना न्यूज के समूह संपादक तथा ब्रॉडकास्ट एडीटर्स एसोसिएशन के महासचिव हैं. उनका यह लेख हिंदुस्‍तान में प्रकाशित हो चुका है, वहीं से साभार लेकर प्रकाशित किया जा रहा है. उनसे संपर्क This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it के जरिए किया जा सकता है.


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