अखबारों को नहीं पता कितने वर्ष पहले देश आजाद हुआ!

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आज देश का प्रत्येक नागरिक स्वाधीनता दिवस को बड़े ही धूमधाम से मना रहा है. जिस देश में हम रहते हैं, उस देश को आजाद हुए कितने वर्ष हो गए ये बात तो सभी को पता होनी चाहिए. खासकर मीडिया को तो जरूर जानकारी होनी चाहिए कि देश को आज़ाद हुए कितने वर्ष हो गए, और किसी की बात को जनता माने ना माने लेकिन आज भी अखबार की बात को जरूर लोग सच मानते हैं.

आज सुबह-सुबह जब अखबार पढ़ा तो मुझे लगा कि समाचार पत्रों में पैसे कमाने की होड़ ने समाचार पत्रों के संचालन करने वाले कर्मियों को जरूर अँधा और अज्ञानता में लिप्त कर दिया है. अखबार चाहे हिन्दुस्तान हो या दैनिक जागरण, अमर उजाला, राष्ट्रीय सहारा कोई भी,  सभी ने आज देश की आज़ादी को अपने अलग-अलग पन्नों पर कहीं 65वां तो कहीं 64वां स्वतंत्रता दिवस लिखा है. रुपये जुटाने की होड़ में लगे समाचार पत्रों को भले कोई कुछ ना कहे लेकिन पाठकों के साथ जरूर अन्याय हुआ है.  गलती अख़बार ने तो की ही है एक बड़ी कंपनी (एलजी)का विज्ञापन भी सभी अखबारों में प्रकाशित हुआ है,  पूरे पन्ने भर के एलजी के विज्ञापन में 64वां स्वतन्त्रता दिवस लिखा है, जबकि उसी समाचार पत्र में भारत सरकार का विज्ञापन प्रकाशित है,  जिस पर 65वां स्वतंत्रता दिवस लिखा है. अब ये गलती किसके स्तर पर हुई है ये बताना कठिन है. व्यवसायिकता की दौर में भी कम से कम इन बातों पर ध्यान दिया जाना ज्यादा जरूरी है.

लेखक धर्मेन्‍द्र श्रीवास्‍तव आजमगढ़ में यूएनआई/वार्ता के संवाददाता हैं.


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