राजदीप सरदेसाई ने लिखा अन्‍ना के नाम पत्र

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सचमुच ये दौर ही ऐसा है कि आम आदमी इन दोहरे चरित्र वाले तथाकथित बुद्धिजीवी और बड़े लोगों की बात सुने तो बौखला जाए. अजब हिप्‍पोक्रेसी का दौर तो हैं ही जरूरी नैतिकता का भी पता नहीं कहां लोप हो गया है. हम सरे आम चोरी करते हैं और सबके सामने कहते हैं कि चोरी करना पाप है यानी थोड़ी सी लज्‍जा, शर्मा और हया इस पूंजीपति व्‍यवस्‍था में नहीं बची रह गई है.

अमेरिका के परमाणु समझौते पर नोट कांड का स्टिंग करने वाले चैनल के प्रमुख राजदीप सरदेसाई ने भी लम्‍बा चौड़ा भाषण दिया है. अपने भले ही नैतिकता को ताक पर रखकर पैसे देने वाले लोगों का स्टिंग आम जनता को न दिखाया हो, परन्‍तु अन्‍ना के नाम लिखे अपने पत्र में उन्‍होंने परोक्ष-अपरोक्ष रूप से काफी नसीहतें दे डाली हैं. सचमुच आज वो ही सफल है जो दोहरा मापदंड अपने सुविधा के अनुसार अपना लेता हो. तभी तो अपनी नैतिकता ताक पर रखने वाले राजदीप सरदेसाई अन्‍ना के आंदोलन, आमरण अनशन, टीम अन्‍ना के बयान को इफ बट करते हुए गलत ठहराने की कोशिश की है तो नेताओं के प्रति सहानुभूति जताते हुए सभी को एक ही तरह का यानी 'चोर' न समझने की बात भी कह डाली है.

सच है सब नेता चोर नहीं होंगे. कुछ सही भी होंगे, पर जब एक वर्ग का बड़ा तबका चोर हो जाता है तो लोग पूरे वर्ग को ही चोर मानने लगते हैं. यही नेताओं के साथ हो रहा है. हो सकता है सब चोर ना हों पर सब स्‍वार्थी हैं इससे कोई इनकार नहीं कर सकता. उनके लिए अन्‍ना का आंदोलन तब‍ तक ठीक नहीं है जब तक की उनकी तथा उनके पार्टी की भलाई इससे ना जुड़ी हो. सभी अपना तथा अपनी पार्टी का हित देखने के बाद अन्‍ना के आंदोलन के पक्ष या विपक्ष में खड़े हो रहे हैं, जबकि देश के आम जनता की एक बड़ी आबादी इस आंदोलन को अपना समर्थन दे रही है. राजदीप ने कुछ चैनलों को भी इन खबरों को अतिरंजनापूर्ण दिखाने का आरोप लगाया है. यानी राजदीप और कांग्रेसी जो करें वो सही बाकी सब गलत. आप भी पढि़ए अन्‍ना के नाम दैनिक भास्‍कर में राजदीप का लिखा गया पत्र. 


अन्‍ना के लिए एक चिट्ठी

प्रिय अन्ना! मैं यह पत्र किसी खुशामदी चीयरलीडर या निराशावादी पत्रकार के रूप में नहीं, बल्कि आप ही की तरह गौरव की भावना से भरे एक भारतीय के रूप में लिख रहा हूं। सबसे पहले तो मैं इस बात के लिए आपकी सराहना करना चाहूंगा कि आप भ्रष्टाचार की समस्या को राष्ट्रीय मंच पर ले आए हैं।

आप महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए दो दशक से भी अधिक समय से अथक परिश्रम कर रहे हैं, लेकिन चूंकि दिल्ली रालेगण सिद्धि से बहुत दूर है, शायद इसीलिए टीवी चैनलों ने आपके योगदान को पर्याप्त महत्व नहीं दिया था। हमने एक माह पहले एक ओपिनियन पोल कराया था, जिसमें पता चला था कि पश्चिमी महाराष्ट्र के एक गांव के फकीरनुमा योद्धा यानी आपकी तुलना में लोग योगगुरु बाबा रामदेव के बारे में ज्यादा जानते थे।

बहरहाल, अब यह स्थिति बदल चुकी है। अब देश का बच्चा-बच्चा आपको जानता है। आपने सरकार को झुकने को विवश किया है और लाखों भारतीयों को प्रेरित किया है कि वे सड़कों पर उतरें और आवाज उठाएं। आपने पूरी दुनिया के सामने राजनीतिक वर्ग को बेनकाब कर दिया, जो कि एक गंभीर नैतिक संकट के दौर से गुजर रहा है। आपने उन लोगों को सशक्त किया, जो खुद को न्यू इंडिया की चकाचौंध में कहीं गुमा हुआ महसूस कर रहे थे।

आप एक ऐसे वक्त परिवर्तन और आशा के प्रतीक बने, जब घोटाला संस्कृति देश की चेतना को आहत कर रही थी। आपने यह भी दिखाया कि मराठा, जो वर्ष 1761 में पानीपत की तीसरी लड़ाई के बाद से ही दिल्ली से दूर रहे हैं, आज भी राष्ट्रीय राजधानी में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा सकते हैं। लेकिन हर लड़ाई में एक क्षण ऐसा आता है, जब हमें ठहरना पड़ता है। शायद, वह समय अब आ रहा है।

आप कहते हैं कि गांधी आपकी प्रेरणा के स्रोत हैं, लेकिन उन्होंने कभी दवाइयां लेने से इनकार करते हुए आमरण अनशन नहीं किया था। गांधी के लिए उपवास आत्मशुद्धीकरण का एक साधन था। वे कहते थे कि उपवास गुस्से की भावना के तहत नहीं किया जाना चाहिए।

हां, यह सच है कि आज सड़कों पर आक्रोश है। ऐसा लगता है जैसे दशकों से सुलग रहा कोई ज्वालामुखी फट पड़ा है और सड़कों पर लावा फैल गया है। आपकी विलक्षणता इस बात में निहित है कि आपने भ्रष्टाचार के विरुद्ध जन-मन में पैठे गुस्से को शांतिपूर्वक एक सशक्त भ्रष्टाचाररोधी कानून के लिए दृढ़ निश्चय में बदल दिया।

लेकिन अब वास्तविक खतरा यह है कि कहीं एक शांतिपूर्ण व अहिंसक आंदोलन, अगर संविधान निर्माता डॉ आंबेडकर के शब्दों का उपयोग करें, जो उन्होंने आमरण अनशन के लिए कहे थे, 'अराजकता के व्याकरण'  से आंदोलित न हो जाए। पिछले 48 घंटों में इस बात के कुछ संकेत मिले हैं।

सांसदों के बंगलों का घेराव एक आकर्षक प्रदर्शन जरूर हो सकता है, लेकिन इससे 'सब नेता चोर हैं'  किस्म की राजनीति विरोधी लफ्फाजी को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे संसदीय लोकतंत्र में हमारे विश्वास को और ठेस पहुंच सकती है। टीम अन्ना के कुछ सदस्यों ने कुछ अवसरों पर जिस भाषा का उपयोग किया, उसकी विवेकपूर्ण संवाद की स्थिति में उपेक्षा ही की जानी चाहिए।

अतिरंजनापूर्ण न्यूज चैनलों और लोकप्रियतावादी सहयोगियों ने मीडिया में जिस किस्म के उन्माद की स्थिति निर्मित की, वह बड़ी आसानी से एक वास्तविक जनआंदोलन को जनाक्रोश के अशालीन प्रदर्शन में बदलकर रख सकता है। इससे आपके संघर्ष की श्रमसाध्य विश्वसनीयता को क्षति भी पहुंच सकती है।

रामलीला मैदान मुंबई का आजाद मैदान नहीं है और न ही वह रालेगण सिद्धि की चौपाल है। यह स्थानीय स्तर पर शराबबंदी का आंदोलन भी नहीं है। यहां कई एजेंडा सामने हैं, जिन पर नारेबाजी की नहीं, बल्कि दक्षतापूर्ण बातचीत करने की जरूरत है। मुंबई की सड़कों पर गैंगस्टर अबू सलेम की पूर्व गर्लफ्रेंड मोनिका बेदी को अन्ना टोपी पहने कवायद करते देखने के बाद आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष के एक प्राइम टीवी तमाशे में बदलकर रह जाने के क्या खतरे हैं।

यह सच है कि कोई भी आंदोलन तब तक समाप्त नहीं हो सकता, जब तक कि उसके प्राथमिक लक्ष्य न अर्जित कर लिए जाएं। यदि टीम अन्ना का यह लक्ष्य है कि उनकी इच्छाओं के अनुरूप जनलोकपाल बिल पास हो जाए तो यह एक अधिकतम स्थिति होगी, जिस पर रातोंरात सहमति का निर्माण करना आसान नहीं होगा।

स्वयं महात्मा गांधी अक्सर 'समझौते के सौंदर्य'  की बात कहते थे। निश्चित ही यह अपने आपमें एक बड़ी उपलब्धि है कि आपने एक अड़ियल सरकार को लोकपाल बिल पर फुर्ती से कदमताल करने को विवश किया और उसने आपके कई प्रस्ताव माने, लेकिन दशकों से अटके हुए किसी बिल को चंद ही दिनों में बिना किसी अनवरत व समावेशी संवाद प्रक्रिया के पारित करने का प्रयास नुकसानदेह साबित हो सकता है।

हां, मैं यह समझ सकता हूं कि विश्वसनीयता गंवा चुकी उस सरकार में आपका ज्यादा भरोसा नहीं है, जिसने महज दस दिन पूर्व दंभ व मूर्खता का परिचय देते हुए पहले आपके मानमर्दन की कोशिश की, फिर आपको गिरफ्तार कर लिया और अब आपके आदर्शवाद को सलाम कर रही है। निश्चित ही आप सरकार के रवैये से आहत हुए हैं।

यह क्षण यह दिखाने का है कि आपका दिल सरकारी बंगलों में रहने वाले लोगों के संकीर्ण दिमागों से कहीं बड़ा है। यह प्रतिष्ठा से अधिक व्यावहारिकता का क्षण है। मिसाल के तौर पर सरकार को इसके लिए राजी क्यों नहीं किया जा सकता कि वह छह या आठ सप्ताह में संशोधित लोकपाल बिल के लिए संसद का एक विशेष सत्र आहूत करे, ताकि एक नया और सुविचारित कानून पूरे देश के लिए दिवाली की भेंट साबित हो?  साभार : दैनिक भास्‍कर


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Comments (8)Add Comment
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written by raj kumar, August 30, 2011
rajdip desai media ka agnivesh tatha congress ka agent h iski nistha hamesh se sandigdh rahi h ese saturmurg ko ana ko updesh dene ka koi haq nahi banta, des me loot machi hui h rajdip ko moni baba ki tarah kuch bhi nahi dikhai deta, kabhi mannia pradhanmantri (moni baba) ko koi khula khat likha ha,
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written by Dr. Vishnu Rajgadia, August 26, 2011
We can suggest to Rajdeep to write one more letter addressed to the PM that how did his failure to control corruption by his own team, shameful apathy towards black money in swiss banks as well as 42 long years of wait for a Lokpal has angered the common citizen of india. He shall also write that the attitude of the central government towards all democratic and peaceful movements including Baba Ramdeo and now Anna movement has disappointed those, who have faith in Gandhiwadi movement. He shall also write that the citizen of india are not happy to see a remote control helpless PM and his silence is creating anger. He may also mention that the government has never taken the Anna Movement in positive way and wanted to diffuse, divide and divert it by various consiperencies including dual character and by misusing a section of media as well as desparete attempts to bring forward some other civil society members with a policy of divide and rule. You may also mention that the people in power have lost their credibility and they shall vacate their office immediate and to go for a fresh mandate. You shall write to the PM that his policies to protect the interest of corporate world is increasing the gap between haves and have not's. You may mention the increasing price rise, unemployment and suicide of farmers as well as land grab and displacement. I think, your letter will support the spirit of your first letter i.e. to Anna and it will be also be a proof that you have written your letter to Anna with good intention. My best wishes.
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written by abcd, August 26, 2011
काग्रेंस का भोंपू - राजदीप सरदेसाई
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written by ikram, August 26, 2011
sri rajdeep ki batun me kaafi gahrai hai. unki baaton ki gharai ko agar samjhai jaye to is aandolan ki sachhai samajh aati hai. yeh samay hai ki kewal dusrun ke sur me sur na milaya je balki sahi kiya yeh samajhne ki koshish ki jaye.
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written by dinesh prajapati, August 26, 2011
bat kaphi sade dhank se kahi ja rhi hai, lekin esme sarkar ka pura pakas najar aa rha hai. sting opretion ko na dikhane ke bare mai pahle pad liya hai.
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written by Brajesh kumar shukla, August 26, 2011
Mr, Manish tiwari prawakta congress dwra Anna ko kahe gaye apshabd wapas lete hue turant aisi gandi rajneeti se tyag patra dekar sant Hazare ki sharn me jakar poori jndagi unki sewa kar k prayaschit karna chahiye ..aur Kapil sibbal ko us ashram ka choukidar bankar sadaiv galat cheejon per pahra r akhna chahiye...5
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written by Brajesh kumar shukla, August 26, 2011
MAIN CONGRESS PRAVAKTA MR.MANISH TIWARI K BARE ME UNKI PARTY KA DHYAN DILANA CHAHTA HUN.JO JAN BUJHKAR ANJAN BANI HAI.IS BADBOLE VAKTA KO MUH ME WASHER KI JARURAT HAI.ISKO SHASTANG DANDWAT HOKAR SHRI ANNA JI SE JANTA K SAMNE GIDGIDAKAR MAFI MANGNI CHAHIYE.JANHA YE NISHDAG SANT KO BHRAST....I AUR KALA..I KAH KAR TU WA TERE SE SMBODHIT KAR RAHA THA WANHI MANMOHAN SINGH SAU BAAR UNKE NAAM K AAGE SHRI LAGANTE THAK NAHI RAHE H...SO HE SHOULD PUNISHED FOR HIS DIRTY TOUNGUE.:smilies/tongue.gif
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written by rajeev prasad, August 26, 2011
lagta hai bharpoor maal aap bhi lapetate hain rajdeep. haan apko bhi to radiya ki hi tarah kaam karne ki majboori hogi . apko kya pata gaon me log kaise ek roti ke liye vivash hote hain , apke kutte bhi hamse kai guna achha menu ke hakdar hain. aap anna ko salah dene kabil kahan hain apko sharm aani chahiye is tarah ke patr ko likhkar . thodi si bhi sharm aur insaniyat hai to is tarah ki bhasha ka istemal na karte . doosaron ke paise par chandi ki chammach se khana kahanewale kya jane fati ungliyon se niwala lene me kya dard hai......jara kuchh to raham karen ham gareebon par jiske liye anna jaise shakhsh khud ko mita rahe hain......baki besharmi ki had par kar jane ke liye apko dhanyvad..ishwar kare aap fale foole....

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