धमकाया था एनके सिंह ने- खबर गलत निकली तो जाएगी नौकरी

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इंदौर। एनके सिंह (पीपुल्स समाचार के एडिटर) ने दिनांक 31 अगस्त 2011 को मुझे एक मेल भेजा. मेल में एनके सिंह ने इंदौर के कुछ बड़े गारमेंट उत्पादकों के यहां पड़े छापों की खबर पर गहरा एतराज उठाया. 30 अगस्त को पीपुल्स समाचार, इंदौर संस्करण ने पहले पेज पर तीन गारमेंट उत्पादकों के यहां पड़े सेंट्रल एक्साइज के छापों की खबर को प्रमुखता से छापा था.

सेंट्रल एक्ससाइज की यह खबर पीपुल्स समाचार में एक्सक्लूसिव थी. अगले दिन पीपुल्स समाचार, इंदौर ने इस खबर का फॉलोअप भी सेंट्रल डेस्क भोपाल को भेजा. प्रकाशित और अप्रकाशित दोनों खबरें देखकर पता नहीं क्यों एनके सिंह भिन्ना उठे. उन्होंने इंदौर का स्‍थानीय संपादक होने के नाते मुझे एक कड़ा मेल भेजा. इस मेल में उन्होंने मनगढ़ंत तथ्य प्रस्तुत करते हुए लिखा कि गारमेंट उत्पादक और एक्साइज डिपार्टमेंट इस रेड के बारे में ऑफिशियली डिनाय कर रहे हैं. उन्होंने लिखा कि यदि छापे की खबर उन्हें या सेंट्रल डेस्क भोपाल को दिखाई जाती तो वे उसकी हत्या कर देते. एनके सिंह ने मेल में पत्रकारिता के उच्‍च मापदंडों को लेकर कई प्रवचन दे डाले.

मेरे द्वारा बार-बार यह बताने पर कि एक्साइज डिपार्टमेंट ने किसी तरह का खंडन जारी नहीं किया है, एनके सिंह नहीं माने. पीपुल्स समाचार, इंदौर ने मन मसोसकर छापे के फॉलोअप की खबर रोकी. अगले दिन शहर के दो प्रमुख दैनिक समाचार पत्र 'दैनिक भास्कर' और 'पत्रिका' ने छापे की खबर को प्रमुखता से छापा और अगले चार-पांच दिनों तक इस खबर का फॉलोअप भी छापते रहे. दैनिक भास्कर, इंदौर संस्करण ने 31 अगस्त को 'कार्रवाई का नाम कमाई पर ध्यान', 1 सितम्बर को 'लीपापोती की कोशिश', 2 सितम्बर को 'कारनामे की गूंज दूर तक पहुंची', 3 सितम्बर को 'डकार रहे करोड़ों का कर, लाखों कर रहे न्यौछावर' तथा पत्रिका, इंदौर संस्करण ने 1 सितम्बर को 'छापे पर पर्दे के लिए बैठक', 2 सितम्बर को 'लौटाई रिश्वत, व्यापारी खामोश', 3 सितम्बर को 'एक तिहाई कारोबार ही बिलिंग से' शीर्षक से खबरें प्रकाशित कीं. शहर में यह चर्चा का विषय रह जिस समाचार पत्र ने इस छापे की कार्रवाई की खबर को प्रमुखता से छापा वह अगले दिन मौन क्यों हो गया?

सच्‍ची खबर को रोककर अपना बखान बघारा था एनके सिंह ने : एनके सिंह ने 31 अगस्त को वन विभाग के एक अधिकारी की खबर को भी रोकते हुए पत्रकारिता का पाठ पढ़ाया था. इस खबर में संवाददाता ने बताया था कि वन विभाग के एक अधिकारी अपने मातहत अधिकारी-कर्मचारियों को अलग-अलग कलर के नोटिस देते हैं. नोटिस की इस रंगबिरंगी कार्रवाई पर संवाददाता ने यूनियन के पदाधिकारी के वर्जन सहित खबर भेजी थी, लेकिन दंभी एनके सिंह ने इस खबर की भी हत्या कर दी और उल्‍टा स्वस्थ पत्रकारिता करने का पाठ पढ़ा दिया.

धमकाया था एनके सिंह ने : अच्छी और प्रमाणित खबरें रोकना एनके सिंह की पुरानी आदत है. इंदौर संस्करण ने 30 सितम्बर को रसोई गैस पर आधारित एक अच्छी खबर सेंट्रल डेस्क भोपाल को भेजी. खबर का लब्बोलुआब यह था कि केंद्र सरकार रसोई गैस टंकियों पर दी जाने वाली सबसिडी अब उपभोक्ताओं से वसूलेगी और बाद में उन्हें लौटाएगी. इंदौर संस्करण ने शाम को एनके सिंह से बातचीत के बाद यह खबर सेंट्रल डेस्क भोपाल को भेजी. सेंट्रल डेस्क ने इस खबर को फर्स्‍ट एडिशन (अपकंट्री एडीशन) में पहले पेज पर छापा. रात 09.30 बजे एनके सिंह ने मुझे फोन करके कहा कि उनके सोर्स इस खबर को कनफर्म नहीं कर रहे हैं, यदि यह खबर गलत हुई तो आपकी नौकरी जाएगी. मैंने ने उन्हें बताया कि खबर के पक्ष में दो वर्जन अटैच है, लेकिन वे अड़े रहे कि कोई कनफर्म नहीं कर रहा है. अंतत: यह खबर सिटी एडिशन में भी छपी. अगले दिन मैं ने प्रमुख गैस कंपनी के उच्‍च अधिकारी से बातचीत करके खबर की पुष्टि की. तब एनके सिंह ने कहा- नाइस स्टोरी.

लेखक प्रवीण खारीवाल पीपुल्स समाचार, इंदौर के स्थानीय संपादक रहे हैं. वे कई अखबारों में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं. इन दिनों वे इंदौर प्रेस क्लब के अध्यक्ष हैं. इनसे संपर्क This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it के जरिए किया जा सकता है.


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