'अब अइला भइया, जब गए तीन दिन बीत..!'

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: शीतला घाट पर मंगलवार को हुए ब्लास्ट के तीन दिन बाद बनारस पहुंचे सांसदजी : हमारे शहर के सांसद मुरली मनोहर जोशी जी प्रखर राष्ट्रवादी है। राष्ट्र की बात सोचते-सोचते अक्सर भूल जाते है कि चलता फिरता आदमी भी इसी राष्ट्र का हिस्सा है और उसके दुःख-सुख भी। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रति अटूट निष्ठा रखने वाले सांसद जी पिछला चुनाव अपने गृह नगर गंगा-जमुना किनारे बसे शहर इलाहाबाद से लड़े थे, लेकिन उनके राष्ट्रवाद का जादू वहां चला नही और चुनाव हार गए थे।

सो गंगा किनारे बसे धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी वाराणसी से इन्होंने अपनी किस्मत आजमायी। लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत भी गए। शहर की जनता को तकलीफ है कि सांसद जी मिलते नहीं, अब इस बेवकूफ जनता को कौन समझाए की उनकी जरूरत तो सिर्फ वोट देने तक होती है, उसके बाद तो - 'न तुम हमें जानों न हम तुम्हें जानें' वाली होती है। सांसद जी भी इस बात पर सौ फीसदी विश्वास करते हैं। जरूरत पर लोग उन्हें ढूंढते हैं और वो मिलते नहीं। कहा गया है- का होईये बारिश जब फसल सुखानि। यानी हर काम का एक समय होता है। काश इस बात को मुरलीहमारे सांसद जी समझ पाते। हमारे सांसद जी केवल राष्‍ट्रीय मुद्दे पर ही बोलने और सोचने की जहमत उठाते हैं। इसलिए तो गत मंगलवार 7 दिसम्बर को जब ब्लास्ट के जख्मों से परेशान हाल शहर अपने सांसद जी को खोजता रहा तो हमारे माननीय सांसदजी शायद दिल्ली में बैठकर आतंकवाद पर चितंन और मनन कर रहे थे।

बड़ी आस लिए जनता उनके आने का राह देखती रही लेकिन सांसद जी आए नहीं। लोग इंतजार करते रहे कि चुनाव के दौरान शहर के लोगों से हर सुख-दुख में कदम से कदम मिलाकर चलने का वादा करने वाले सांसद जी बस आते ही होंगे। घंटे बीतें, दिन बीते, लेकिन सांसद जी नहीं आए। सांसद जी शायद भूल गए थे कि उनके सांसदीय क्षेत्र बनारस में आतंकियों ने बम ब्लास्ट किया है, कोई पटाखा नहीं फूटा है। और मामला आतंकवाद जैसे ग्लोबल समस्या से जुड़ा है। खैर तीन दिन बाद उनकी तंद्रा भंग हुई और दिल्ली से पुष्पक विमान पर सवार होकर शनिवार को काशी की धरती पर अवतरित हुए और वहां से घायलों से मिलने पहुंचे कबीरचौरा मण्डलीय अस्पताल। वहां पहुंच कर घायलों से मिलते सांसद जी को सामने देख ब्लास्ट में घायल बूढ़े बाबा ने हाथ जोड़ दिया। लेकिन  बाबा का चेहरे का दर्द शायद यही कह गया ‘अब अइला भइया, जब गए तीन दिन बीत..।'  इसका कोई जवाब है सांसद जी। शायद नहीं।

लेखक भाष्कर गुहा नियोगी वाराणसी में पत्रकार हैं और इन दिनों यूनाइटेड भारत अखबार में कार्यरत हैं.


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