ये राडिया हैं, वो मां थीं

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: जांच एजेंसियों का दोहरा चरित्र : कभी-कभी अपनी कमज़ोरी और कानून को लागू करने वाली मशीनरी के करतूत को देख कर आम आदमी यक़ीनन शर्मिदां होता होगा। देश के सबसे बड़े घोटाले की बड़ी सूत्रधार नीरा राडिया से पूछताछ के लिए सीबीआई उनके घर गई। इसी घोटाले से जुड़े कई पत्रकारों से अटे पड़े चैनल पर ख़बर थी कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन है कि महिला आरोपी से पूछताछ के लिए थाने नहीं बुलाया जा सकता इसीलिए सीबीआई राडिया के घर पूछताछ के लिए उनके घर गई...। उफ्फ कितना फर्क है कानून के पालन करने वालों और ख़बरे परोसने वालों के चरित्र में।

चंद दिनों पहले उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर में एक आरोपी पर दबाव बनाने के लिए उनके दूर परिवार की शरीफ महिलओं को कई घंटे तक बंधक बना कर रखा गया और किसी भी ख़बरों के ठेकेदार ने इस ज़ुल्म के खिलाफ एक लफ्ज़ भी ना तो बोला और ना ही लिखा। ना ही किसी को ये ध्यान आया कि सुप्रीम कोर्ट की क्या गाइड लाइन है। एक मामूली साइकिल चोरी का आरोपी फौरन जेल में, लेकिन करोड़ों के घोटालेबाज़ो से पूछताछ के लिए भी जांच एजेंसियां चिट्ठी लिखती नज़र आ रही है। देश की सत्ता की दलाली, और पत्रकारिता को कलंकित करने वाले पत्रकारों से पूछताछ करने से क्यों डर लग रहा है।

सेमिनारों में नैतिकता पर बड़े-बड़े भाषण देने वाले पत्रकारों के पास अरबों की प्रापर्टी कहां से आ गई ये कौन पूछेगा। अरबों रुपये के घोटाले में चर्चित नीरा राडिया से पूछताछ के लिए अगर सीबीआई मजबूरन घर जा सकती है तो उत्तर प्रदेश पुलिस की वो मजबूरी भी देश के सामने आनी चाहिए, जिसके तहत उसने गाजीपुर की एक शरीफ मां को कई घंटे तक बंधक बनाए रखा था। या फिर कहीं ऐसा तो नहीं उस बे क़सूर महिला का अपराध ये था कि वो एक निडर और ईमानदार पत्रकार की माता थीं..। एक ऐसा पत्रकार जिसने जीवन भर दलाली करने के बजाए दूसरों की लड़ाई लड़ी और ना तो लाबिस्ट ही बन सका और ख़ुद ख़ाली जेब ही रह गया। वर्तमान हालात को देख कर हर आदमी के दिल मे एक ही सवाल है कि क्या देश को इस वक़्त किसी बड़े बदलाव की ज़रूरत है।

लेखक आज़ाद ख़ालिद चैनल 1 में बतौर न्यूज़ हेड जुड़े रहे और इस चैनल को लांच कराया. डीडी, आंखों देखी से होते हुए तकरीबन 6 साल तक सहारा टीवी में रहे. एक साप्ताहिक क्राइम शो तफ्तीश को बतौर एंकर और प्रोड्यूसर प्रस्तुत किया. इंडिया टीवी, एस1, आज़ाद न्यूज़ के बाद वीओआई बतौर एसआईटी हेड काम किया. इन दिनों खुद का एक साप्ताहिक हिंदी अख़बार 'दि मैन इ अपोज़िशन' और न्यूज वेबसाइट oppositionnews.com चला रहे हैं.


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