नाराज रतन टाटा ने मीडिया पर लगाया प्रतिबंध!

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इन दिनों रतन टाटा मीडिया से नाराज चल रहे है. वैसे रतन टाटा तो केंद्र की यूपीए गठबंधन सरकार से भी नाराज चल रहे हैं. लगता है रतन टाटा का नाम इन दिनों विवादों के साथ-साथ चल रहा है. तभी तो वे प्रधानमंत्री से पुरस्कार लेने नहीं जाते. हालाँकि प्रधानमंत्री उन्हें ऑटोमोबाइल क्षेत्र में क्रांति लाने वाले 'नैनो' के कारण सम्मान देना चाहते थे. अब इसी विवाद की अगली कड़ी है रतन टाटा की कंपनी टाटा संस का मीडिया पर प्रतिबन्ध.

टाटा संस ने ओपन, पायनियर, आउटलुक, इंडिया टुडे ग्रुप समेत बेनेट एंड कोलेमन के स्वामित्व वाले अखबार टाइम्स ऑफ़ इंडिया एवं इकोनोमिक्स टाइम्स पर प्रतिबन्ध लगाया है. टाटा संस द्वारा आयोजित होने वाले किसी भी कार्यक्रम में इन मीडिया समूहों से जुड़े पत्रकारों को नहीं बुलाया जायेगा और तो और इन मीडिया समूहों को टाटा संस के किसी भी कंपनी का विज्ञापन भी नहीं देने का निर्णय किया गया है.

जाहिर है रतन टाटा और उनके मीडिया सलाहकारों को इस बात की जानकारी है कि आज के इस व्यवसायिक युग में अखबार, पत्रिका या फिर चैनल का अधिकांश राजस्व निजी कम्पनियों के विज्ञापन पर ही निर्भर है. ऐसे में रतन टाटा और उनका ग्रुप इन मीडिया संस्थानों की आर्थिक स्थिति को कमजोर करना चाहते है. 2G स्पेक्ट्रम घोटाले और उसके बाद नीरा राडिया से हुई बातचीत का टेप तो अब जगजाहिर हो ही चुका है, तो इस प्रतिबन्ध को क्या माना जाएगा? क्या रतन टाटा मीडिया से खुलकर आरपार लड़ाई के मूड में हैं या फिर वो चाहते हैं कि अब रतन टाटा या उनकी कंपनी से सम्बन्धित और कोई भी खुलासा न हो जाए.

वैसे अभी भी रतन टाटा और टाटा संस का पीआर नीरा राडिया की कंपनी वैष्णवी कम्युनिकेशन ही देख रही है. इस बात की भी पूरी सम्भावना है कि रतन टाटा नीरा राडिया को बचाने में इस कदर सुधबुध भूल चुके है कि अब उनको यह भी याद नहीं की मीडिया के एक तबके पर इन प्रतिबंधों का असर नहीं होता. हालाँकि मीडिया संस से जुड़े हुए अधिकारी दबी जुबान में इन प्रतिबन्धों की बात को स्वीकार तो करते हैं, मगर साथ में ये भी बताते हैं कि इस तरह का कोई लिखित आदेश नहीं जारी हुआ है. हाँ, मगर मौखिक आदेश जरुर दिया गया है कि इस मीडिया संस्थानों से परहेज किया जाय.

बहरहाल अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में रतन टाटा और उनकी कंपनी मीडिया को किस तरीके से अपने पक्ष में लेने कि कोशिश करते हैं. हमे इन्तेजार रहेगा मिस्टर रतन टाटा.

लेखक अनंत झा पिछले एक दशक से झारखंड की पत्रकारिता में सक्रिय हैं. प्रिंट और इलेक्ट्रानिक, दोनों मीडिया में काम करने का अनुभव है. इन दिनों यायावरी कर रहे हैं.


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