अक्‍सर होती है ऐसी गलती

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एएन शिबलीयह एक हक़ीक़त है कि उर्दू बहुत ही प्यारी और मीठी ज़बान है। यही कारण है कि उर्दू नहीं जानने वाले भी उर्दू के शब्दों का इस्तेमाल करना चाहते हैं और करते रहते हैं। मीडिया में भी उर्दू के शब्द खूब इस्तेमाल होते हैं, मगर अफसोस की बात यह है कि उर्दू के कुछ शब्द ऐसे हैं जो हिन्दी मीडिया में हमेशा ग़लत ही इस्तेमाल होते है। चाहे वो टेलीवीजन का एंकर हो या फिर हिन्दी अखबार। यहाँ उर्दू के शब्द इस्तेमाल तो खूब होते हैं मगर अफसोस की बात यह है कि वो अक्‍सर ग़लत होते हैं।

मिसाल के तौर पर दैनिक हिंदुस्तान में शनिवार को प्रकाशित इस खबर को देखें। इस की सुर्खी है हज़ार लोगों ने नमाज़ अता की। नमाज़ अता नहीं की जाती बल्कि नमाज़ अदा की जाती है। यह गलती हिन्दी अखबारों में हमेशा रहती है। कई साल पहले मैंने हिंदुस्तान को पत्र लिखा था कि नमाज़ अता नहीं होती बल्कि अदा होती है। मेरा वो पत्र प्रकाशित भी हुआ था, मगर यह गलती इस अखबार में अब भी छप रही है। अता का मतलब होता है देना। अता का इस्तेमाल करते हुये यह कहा जा सकता है कि अल्लाह ने उसे बहुत दौलत आता की है। और अदा का मतलब होता है पूरा करना, देना इत्‍यादि। अदा के और भी कई अर्थ होते है जैसे तरीका, ढंग आदत इत्‍यादि। नमाज़ अदा करने का मतलब होता है नमाज़ पूरी करना।

हिन्‍दुस्‍तान

इसी तरह हिन्दी अखबारों में एक शब्द अक्सर इस्तेमाल होता है खिलाफत। अखबार वाले इसे विरोध की जगह इस्तेमाल करते हैं जबकि इसका मतलब कुछ और ही होता है। विरोध की उर्दू अगर इस्तेमाल करना है तो मुखालफत इस्तेमाल किया जाएगा। जबकि खिलाफत का मतलब होता है इस्लामी उसूल के अनुसार शासन करना। उर्दू का एक शब्द चैनल वाले अक्सर इस्तेमाल करते हैं, वो है खुलासा। न्यूज़ चैनल पर आप अक्सर सुनेंगे एक बड़ा खुलासा। उर्दू में खुलासा का मतलब होता है निचोड़ या मुख़तसर। उर्दू की क्लास में यह सवाल हमेशा आता है कि फलां कहानी का खुलासा लिखिए मतलब इसका निचोड़ लिखिए। चैनल वाले यदि उर्दू शब्द ही इस्तेमाल करना चाहते हैं तो वो खुलासा की जगह इंकिशाफ कह सकते हैं। इस के अलावा और भी बहुत शब्द उर्दू के ऐसे हैं जो इस्तेमाल तो खूब होते हैं, पढ़ने में अच्छे भी लगते हैं मगर अफसोस की बात यह है कि वो ग़लत होते हैं। उर्दू जानने वाले सभी अखबार और चैनल में हैं इसलिए मेरी राय में यदि उर्दू शब्द का इस्तेमाल करने से पहले उन्हें किसी उर्दू जानने वाले को दिखा दिया जाये तो बेहतर रहेगा।

लेखक ए एन शिबली हिन्‍दुस्‍तान एक्‍सप्रेस के ब्‍यूरो चीफ हैं.


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Comments (3)Add Comment
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written by Mukesh, January 19, 2011
Ye to galti honi hi hai, kyunki ab log bhasha k parti gambhir kaha hai. Mahroom aur marhoom jaise sabd k bhanwar jaal mein bhi aksar patrakaar fans jate hain.
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written by संजय कुमार सिंह , January 18, 2011
टीआरपी की दौड़ में हिन्दी अखबारों और चैनलों में भाषा की परवाह न के बराबर है। कल (17.01.11) के अमर उजाला में पहले पेज के फोटो कैप्शन में जेवर के लिए अंग्रेजी के शब्द ज्वेलरी का इस्तेमाल किया गया है। अव्वल तो ज्वेलरी लिखने की जरूरत ही नहीं है, हिन्दी में अच्छा खासा शब्द है जेवर पर लिखा गया अंग्रेजी का ज्वेलरी और वह भी गलत। अंग्रेजी में लिखा भले ज्वेलरी जाता है पर पढ़ा उसे जुलरी जाता है। इसी तरह फोन टैपिंग के मामले में हिन्दी के अखबार अक्सर टेपिंग लिखते हैं जबकि टैपिंग होना चाहिए। इस भ्रम का कारण यह है कि फोन के टेप बंट रहे हैं या सुनने के लिए उपलब्ध हैं और इसीलिए टेपिंग लिखा जा रहा है। पर जिस क्रिया के तहत यह टेप उपलब्ध हुआ है वह है - टैपिंग यानी बीच में सुनना। सरकार फोन टैप कराती है न कि टेप कराती है। भले ही वह टेप करके सुना जाता हो पर टेप करने की इस प्रक्रिया को टैपिंग कहा जाता है न कि टेपिंग या टेप करना।
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written by mahandra singh rathore, January 18, 2011
shibli ji, atta or adda ka fard samjah mai aaya hai. bayan kalamband ya kalambadh isse terah bahut se shabd hain jinke bare mai bhram rehta hai.kya aap esse kuch shabdo ke bare mai bata sekte hain.

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