शीला की जवानी का जवाब

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मैं पैंतालिस पार का अंगरेजी का शिक्षक हूँ. कभी जो चीजें वेश्याओं के लिए भी फूहड़ समझी जातीं थीं, वे आज सभ्य समाज की पार्टियों की रौनक बन जाती हैं. यह निस्संदेह बड़ा ही दुखप्रद है. ऐसे में अगर मेरे गीत पिछड़ जाते हैं तो मेरे कुछ निर्मम मित्र यह भी कहने से नहीं चूकते की मैं 'शीला की जवानी' जैसा कुछ लिख ही नहीं सकता. एक शहर की वेश्याएं कहा करती हैं कि अगर अंग विशेष में दम हो तो आओ. अब उनकी चुनौती का क्या किया जाये. मित्रों की यह चुनौती वैसी ही है.

अंग विशेष को तो मैं संयम में रखा पर कवि को नहीं रोक पाया. भड़ास ब्लॉग पर के साथी मुझे माफ़ करेंगे. लीजिए पेश है 'शीला की जवानी' टाइप गाने लिखने की चुनौती का जवाब...

यू आर कैटरीना

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यू आर कैटरीना, ब्यूटीफुल हसीना;
प्रीटी स्वीटी ब्रांडी, आई वांट टू पीना । यू आर कैटरीना ...... ॥

झूठ मूठ कहती हो कि तू कभी हाथ न आनी ,
सपनों में तो रोज रात को आ खुद ही लिप टानी ;

तेरी इन्हीं अदाओं ने तो मुश्किल कर दिया जीना ,
तेरी इन्हीं अदाओं ने तो मुश्किल कर दिया जी .....ना ..... । यू आर कैटरीना ....... ॥

अपने से तो प्यार जताना मुझको भी है आता,
पर जो तू मिल जाती जानम जन्नत का सुख पाता।
ये तेरी जवानी, तपता महीना,
ये जाड़े की रात में भी लाये पसीना । यू आर कैटरीना .......... ॥

लेखक डा. ओम प्रकाश पांडेय पटना में ज्ञान निकेतन विद्यालय में अंग्रेजी के शिक्षक हैं. इनकी चार-पांच किताबें (उपन्यास व कविता संग्रह) प्रकाशित हो चुकी हैं. वे दुनिया के सबसे बड़े कम्युनिटी हिंदी ब्लाग भड़ास के सदस्य हैं और इसके नियमित लेखकों में से एक हैं.  उनकी यह रचना सबसे पहले भड़ास ब्लाग पर अवतरित हुई. वहीं से उठाकर इसे यहां प्रकाशित किया गया है.


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