यार प्रेस की जगह पुलिस लिखवा लेते हैं!

E-mail Print PDF

शहर में अपनी मोटरसाइकिल से घूमते-घूमते अचानक चाय पीने का मूड हुआ. एक छोटा सा होटल देख कर वहां बैठ गया और एक कम चीनी की चाय बनाने को कहा. वहीं पास में पड़े एक अखबार को अपने हाथों में लिया और चाय की प्रतीक्षा करने लगा, तभी दो युवक उसी होटल में दाखिल होते हैं और दो चाय का आर्डर देते हैं. मुझसे थोड़ा खिसकने का आग्रह करते हुए एक मेरे बगल में और दूसरा सामने की ओर पुलिस को गाली देते हुए यह कहते हुए बैठता है कि इनकी माँ की...! बिना वजह चालान काट दिया, जबकि सारे कागज़ात थे.

मैं भी उनकी बातों में दिलचस्पी लेते हुए उनकी बातों को सुनता गया. एक ने कहा हाँ यार (थोड़ा गुस्से में)  आजकल मोटरसाइकिल चलाना बहुत भारी पड़ रहा है, जब देखो पुलिस वाले डंडा दिखा कर रोक लेते हैं और बिना बात के चालान काट रहे हैं, बड़ा परेशान हो गया हूँ. दूसरा बोलता है यार अब तो हद हो गई है, हेलमेट पहन कर चलाओ तो भी गाड़ी रोक कर कोई ना कोई कमी निकाल कर पैसे की उगाही करते हैं, पहले 50 रुपये दे दो तो छोड़ देते थे, अब 100 रुपये से कम लेते भी नहीं. ना दो तो चालान काट रहे हैं. तभी एक दोस्त ने हँसते हुए कहा कि यार क्यों ना प्रेस लिखवा लिया जाये, फिर तो रोज़- रोज़ की परेशानी ही ख़तम हो जाएगी. इतने में मैं कुछ सोच ही रहा था कि दूसरे दोस्त ने कहा पागल हो रहे हो प्रेस लिखवाने का मतलब जानते हो, बहुत खतरा है.  हमारे पास कोई प्रेस कार्ड भी नहीं है और वैसे भी अगर प्रेस लिखवा भी लिया तो अपना परिचय क्या देंगे कि किस अखबार से हैं? रहने दे भाई वैसे भी आजकल प्रेस की गाड़ी को भी रोक कर चेक किया जा रहा है और परिचय जानने के बाद ही छोड़ा जा रहा.

इतने में दूसरे दोस्त ने कहा अरे यार चिंता किस बात की है, आजकल अखबारों में विज्ञापन रोज़ निकल रहे हैं कि "पत्रकारों की आवश्यकता है जुड़ने के लिये संपर्क करें." मेरा एक जानने वाला ऐसा ही एक प्रेस कार्ड बनवा कर मज़े ले रहा है और खर्चा भी सिर्फ 200 से 500  रुपये का है. आईडिया बुरा नहीं है चलो कोशिश करते हैं, वैसे भी किसी ना किसी तरह से पुलिस वाले हमसे कभी 50 तो कभी 100 रुपये ले ही लेते हैं और चालान कट गया तो 100 रूपये के चालान पर 300 रुपये तो चले ही जाते हैं. थोड़ा कंजूस किस्म के इन दोस्त में से एक ने कहा यार हम इतना पैसा क्यों खर्च करें, जब फ्री में काम हो जायेगा. एक काम करते हैं पुलिस लिखवा लेते हैं ना तो कार्ड की ज़रुरत और ना ही कोई खतरा और ना ही कोई चेकिंग, अगर चेकिंग होती भी है तो बस चेकिंग के दौरान यह बोलना है कि स्टाफ की गाड़ी है.

इनकी बातों को सुन कर ये साफ़ तौर पर कहा जा सकता है कि इनके दिमाग में जो बात आई, उसके लिये पुलिस भी दोषी है, जिसके व्यवहार और बिना वजह चालान काटे जाने से परेशान युवको में गलत काम काम करने की इच्छा ने जन्‍म लिया. भले ही इन दोस्तों के द्वारा ऐसी बात हंसी-मज़ाक में कही गई हो, लेकिन किसी को प्रताड़ित करने के बाद यदि उसके दिमाग में ऐसी बात आती है तो इसके लिये ज़िम्मेदार वो खुद हैं, जिसकी वजह से किसी दूसरे के दिमाग में ऐसी आपराधिक बातों का जन्‍म हुआ हो. इनकी बातों  में सच्चाई थी कि कभी भी पुलिस का मार्का और पुलिस लिखी हुई गाड़ी को नहीं रोका जाता है, जबकि प्रेस की गाड़ी को रोक कर अक्सर चेक किया जाता रहा है.

पुलिस प्रशासन भी जानता है कि वो शायद गलत कर रहा है. वाहन के पूरे कागज़ होने के बाद भी उसका चालान ये कह कर काट दिया जाता है कि वो गाड़ी तेज़ गति से चला रहा था. बिना वजह चालान काटे जाने के सिलसिले में थोड़ी जानकारी करने पर सूत्र बताते है कि प्रत्येक थानों पर अधिकारियों का दबाव होता है और एक निर्धारित चालान काटने का आदेश दिया जाता है, ऐसे में चौराहों पर तैनात पुलिस का ऐसा करना उसकी मजबूरी होती है, लेकिन सोचना ये है कि आखिर पुलिस विभाग द्वारा ऐसा क्यों किया जाता है, उनकी कौन सी मजबूरी है जो एक निर्धारित चालान काटे जाने का आदेश देती है?

लेखक इमरान जहीर मुरादाबाद में रिसर्च ब्‍यूरो समाचार पत्र और जर्नलिस्‍ट टुडे नेटवर्क से जुड़े हुए हैं.


AddThis
Comments (5)Add Comment
...
written by amit kumar, March 16, 2011
traffic police KO to chalan Katine ka bahana ch aye ab he 5din pale mane apnea bike gazipur highway par rok kar kisi se bat kar raha ta tabi dtraffic police wali bike samne se guzzar rhea te unhone muji dakh kar apnea bike roki aur Kaine lage ya number chute Q like ha 100 rs ka chalan kateega mane khan number to sahi ha lakin wo nahe mane aur mera so rupee ka chalan Kat diya.Peta nahe ya kab teak chalega.hamara deish mahan ha .india is great.
...
written by Lovekesh Kumar Singh Raghav, March 15, 2011
main apne pariwar ke saath ek din faridabad se gurgaon ja raha tha.......mahruli ki red light green thi............magar.....mere mudne ke baad ..........thodi dor par...........police walen khade the............tab........green.........light........bina yellow light huye.........red ....ho gai.......................police walon ne mujhe.............roka.............ki aap ne light jump ki hai.............maine bahut bola ki jab maine light cross ki jab green thi magar............wo log nahi.........mane.............or mujhe ..............100 Rs.de kar pichha chhuthana pada................mere..........bachche............puchhte rahe papa humne light jump nahi ki to 100 Rs kis liye diye.............maine kahan ya to yahan par enke saath 2 ghante patha pachi karon or samjho ki light main problem hai..........magar unko to apna chalan katne ka kota pura karna hai............upar se aadesh hai..................phir wo kisi ki nahi sunte................sardar ji the chalan katne walen..........ye ghatna saal bhar pahle ki hai.......................police se to raam bachchye................
...
written by Prashant PD, March 14, 2011
एक बार बैंगलोर में मेरे मित्र को ऐसे ही अधिक गति से वाहन चलाने का नाम लेकर अनुचित पैसे वसूले गए थे.. मैं उस खास घटना का वर्णन इसलिए कर रहा हूँ क्योंकि मैं भी वहाँ उसके साथ था और अच्छे से जानता था की उसके वाहन की गति तीस से भी अधिक नहीं थी..
...
written by Ezaz Ahmad, March 14, 2011
Imran Bhai madhupur mein to sab kuch chalta hai. press ek ho to dur ki baat hai, printing press wale bhi apni aur apne risthedaar ki gadi mein press likhwakar chalten hai.
...
written by ARUN KUMAR SINGH , March 14, 2011
yaswant jee
mai patna se sate maner ka rahnewala hue, hamareyaha to byke par press likwana san ki bat ho gai hai, DEES LIVE walo ne to had kar diya hai jise dekhao apni byke par desh live press likha diya hai, agar yahi hal raha to kuch dino me pura maner pressmai ho jayaga

Write comment

busy