सांसदों को बेइमान बनाने वाली निधि खतम हो

E-mail Print PDF

दिनेशदेश में मौजूदा दौर के सभी दलों के सांसद जहां एक ओर सांसद निधि को 2 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ कर दिये जाने को लेकर बेहद खुश नजर आ रहे होंगे, वहीं समाजवादी पार्टी के एक सांसद डा. रामगोपाल यादव सांसद निधि को बढ़ाने से तो खफा हैं ही, साथ ही वे पूरी की पूरी सांसद निधि को खत्म कराने पर अडे़ हुये है। उनका गुस्सा एक दिन से नहीं है बल्कि वे एक अर्से से सांसद निधि को खत्म करने की वकालत करने में लगे हुये हैं लेकिन रामगोपाल यादव सभी सांसदों को एकमत करने मे कामयाब नही हो पाये है।

हां, इतनी कामयाबी रामगोपाल को जरूर मिल पाई है कि तमाम दलों के सांसद रामगोपाल के साथ आकर खडे़ हो गये लेकिन यह तादात इतनी नहीं बन सकी कि मांग करने वालों का मुकाबला कर सकें। सांसद निधि को 2 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ करने को लेकर सपा सांसद ने पूरी की पूरी निधि को खत्म करने की मांग करके अपने आप को सुर्खियों में ला दिया है, लाजिमी है इस मांग को लेकर एक नई किस्म की बहस सांसदों के बीच चल निकले। सपा सांसद का इरादा सरकारी राशि को सही ढंग से इस्तेमाल करने पर है।

वैसे सपा के राष्ट्रीय महासचिव डा. रामगोपाल यादव ने इटावा में समाजवादी पार्टी कार्यालय में 17 मार्च को उत्तर प्रदेश में होने वाले गांव देहात की तैयारियों की जानकारी देने के लिये प्रेसवार्ता बुलाया था, पर उस पत्रकारवार्ता में बातें तो बहुतेरी की गई, लेकिन सपा सांसद की ओर जो बातें सांसद निधि को लेकर कहा गया, उससे एक बात साफ हो गई कि सपा सांसद ने बात मुददे की उठाई है। सपा सांसद की माने तो सांसद निधि को बढ़ाये जाने से सांसदों के सामने एक नई मुसीबत आगे आने वाले दिनों में खड़ी हो जायेगी। सपा सांसद ने ऐसी भी शंका जताई है कि जब सांसद अपने इलाके के भ्रमण पर जाएं, तब हो ना हो इलाकाई लोग गुस्से में आकर सांसदों का घेराव करके उनके कपडे़ तक फाड़ने के लिये तैयार हो जायें।

सपा सांसद का मानना है कि पहले ही सभी दलों के सांसदों पर पहले ही बेईमानी के आरोप लगते रहे हैं। जब सांसद निधि मात्र 2 करोड़ थी तब तो सांसदों को बेईमान कह कर के पुकारा जाता रहा है, लेकिन अब तो 5 करोड़ रुपये की रकम सांसदों के उपर और भी गंभीर आरोप लगाने के लिये पर्याप्त समझा जा सकता है। डा. रामगोपाल यादव सांसद निधि को समूल खत्म करने पर की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर देश मे फैले गंभीर भ्रष्टाचार को रोकना है तो सांसद निधि को पूरी तरह से समाप्त कर देना चाहिए। सपा नेता ने कहा कि अगर किसी भी आदमी को अगर सौ साल तक भी सांसद बने रहने दिया जाये, तो भी हर हाल में संसदीय इलाके का विकास नहीं कराया जा सकता है।

सपा सांसद ने कहा कि वे सासंद निधि को खत्म करने की मांग करते हुए जल्द ही लिखी चिट्ठी लिखने जा रहे है. सपा नेता इससे पहले भी 3 बार लोकसभा अध्यक्ष से लेकर वित्तमंत्री को सांसद निधि खत्म करने के लिये पत्र लिख चुके है। अब आखिरकार डा. रामगोपाल यादव सांसद निधि के खात्मे के लिये किस तरह का खत लिखेंगे या बात करेंगे फिलहाल समझ से परे है, लेकिन जब रामगोपाल ने मन बना लिया है तो वो खत तो लिखेंगे ही।

सपा नेता कहते है कि देश भर में सांसद निधि के दुरुपयोग के चलते जनता सांसदों को बेईमान समझती है। इतना ही नहीं कई जगहों से तो इस तरह की शिकायतें सामने आती रही हैं कि सांसदों ने अपने इलाके में कामकाज के बदले में करीब 40 फीसदी तक कमीशन लेकर सांसद निधि के धन का वितरण करने की सिफारिश की है। यह बात कोई हवा में नहीं है बल्कि इसके वाकायदा सबूत भी हैं, लेकिन मजाल है किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई करके दिखा दे।

डा. यादव का कहना है कि जब से केंद्र की यूपीए सरकार के सामने टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले का मामला सामने आया, तब से यूपीए सरकार की किरकिरी हो रहा था। ऐसे में यूपीए सरकार के सामने एक बड़ी मुसीबत सभी दलों के सांसदों को अपने साथ मिला करके रखना किसी चुनौती से कम नहीं था, बस इसी खतरे के मददेनजर यूपीए सरकार से सांसदों को 5 करोड़ वाला नया पैकेज देकर एक तीर से कई शिकार कर डाले हैं। एक तो यूपीए के रणनीतकारों का यह मानना सही हो सकता है कि हर सांसद को 5 करोड़ रूपये निधि के तौर पर खर्च करने को देकर उनका मुंह बंद करने का इससे बेहतर मौका कोई दूसरा नहीं हो सकता है। दूसरा जब कोई बड़ा लालच सांसदों को मिल जायेगा, तो वे उस हद तक जा कर के विरोध नहीं  कर पायेंगे जिस हद तक जाकर के विरोध करने की जरूरत होती है।

अगर इसी बात को दूसरे शब्दो मे कहे तो यह कहा जा सकता है कि जब बचपन में छोटे बच्चों को मनाना होता है तो बच्चों को लालीपाप दी जाती है। ऐसा ही यूपीए सरकार ने कर दिया है। यह कदम सरकार ने बडे धोटालो से ध्यान हटाने के लिये किया गया है। सपा नेता कहते है कि सांसद निधि की वजह से 50 फीसदी मौजूदा सांसदों ने अपनी सीट गंवाई है। सांसद निधि के चलते हो रही है माननीय सांसदों की बदनामी। इससे पहले ऐसा खत लिखने वाले रामगोपाल यादव ही दुबारा फिर से ऐसा ही खत लिखने जा रहे हैं।

श्री यादव कहते हैं कि सांसद निधि की असल हकीकत यह समझी जाती है कि अधिकतर सांसद अपने करीबी ठेकेदारों को काम दिलवा कर उनसे कमीशन के तौर पर खासी रकम हासिल करते हैं। ऐसी शिकायतें अमूमन आती रहती हैं। इतना ही नहीं कई सांसदों ने निधि का इस्तेमाल अपने स्कूलों और कालेजों के निर्माण के लिये कर लिया और गांव देहात में बनने वाली सड़कों का हाल खुद-ब-खुद समझा जा सकता है। एक सांसद के समय पूरा होते ही उस सड़क का भी समाप्तिकरण हो जाता है। इससे इस बात को बखूबी समझा जा सकता है कि सांसद निधि से निर्माण किस तरह को होता है। अगर हकीकत में सांसद निधि का सही ढंग से सांसद इस्‍तेमाल करवायें तो उनका अगले चुनाव में रास्ता तय हो सकता है, लेकिन जैसा निर्माण सांसद करवाते हैं वैसे ही सांसद की चुनाव में दुर्गित हो जाती है।

यहां पर इस बात का ज्रिक करना बेहद जरूरी बन पड़ता है कि सपा सांसद जब सांसद निधि को खत्म करने की बात कहते है तो फिर अपने दल के सांसदों से सांसदनिधि से दूरी बनाने की बात कहने से क्यों कतराते हैं। डा. रामगोपाल यादव ने सांसद निधि खत्म करने की मांग करके जो एक नई बहस शुरू की है, निश्चित है कि इस पर सांसद एकमत भले ही ना हों, लेकिन अगर इस मांग पर अमल होता है तो कहीं ना कहीं सांसदों का दामन साफ और पवित्र रहने की उम्मीद जरूर ही बलबती होगी।

लेखक दिनेश शाक्‍य इटावा में टीवी पत्रकार हैं.


AddThis