होली के दिन दिल खिल जाते हैं... दुश्मन भी गले मिल जाते हैं

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भुवन जीमनमोहन सिंह और लालकृष्ण आडवाणी, शाहरुख खान और सलमान खान, मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी तथा बराक ओबामा और ओसामा बिन लादेन के बीच मतभेद और यहां तक कि दुश्मनी भी जगजाहिर है। लेकिन इस होली पर इनके बीच कुछ ऐसा हुआ कि इनके  तमाम गिले शिकवे दूर हो गए।

सीन-1

दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास। मनमोहन सिंह सफेद कुर्ता-पायजामा और पगड़ी पहने लॉन में बैठे हैं। गुलाबी गुलाल उनके कपड़ों पर और गुलाबी मुस्कान चेहरे पर खूब फब रही है। कई कांग्रेसी नेता उन्हें गुलाल लगाकर गुंझियों पर हाथ साफ कर रहे हैं। तभी उनका सहायक उनके कान में आकर कुछ कहता है... वे गंभीर हो जाते हैं। खड़े होकर आगे बढ़ते हैं और लालकृष्ण आडवाणी को सामने पाते हैं।

मनमोहन : आइए-आइए आडवाणी जी। आप तो संसद में हमें पूरे साल आरोपों से रंगते रहे हैं। मुझे लगा कि होली के लिए रंग आपके पास बचे ही नहीं होंगे।

आडवाणी : (कुर्ते की जेब से गुलाल निकालकर मनमोहन के गालों पर मलते हुए) होली मुबारक प्रधानमंत्री जी। वे तो राजनीति के रंग हैं, ये होली का रंग है।

मनमोहन : लेकिन आपके रंगों से मुझे डर लगने लगा है।

आडवाणी : आप उन रंगों को भूल जाइए। वे तो 'खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है' वाले रंग हैं। असली रंग तो यही है।

मनमोहन : पर इस साल आपने बहुत बेरंग किया हमें। संसद में भी, संसद के बाहर भी।

आडवाणी : (मुस्कराकर) वे तो मजबूरी के रंग हैं- राजनीति के रंग हैं। जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए है। आज उन्हें भूल जाइए।

मनमोहन : तो आइए, होली के रंगों के सराबोर हो जाएं।

(मनमोहन और आडवाणी गले मिलकर जोर से बोलते हैं, 'होली है'। बैकग्राउंड में गीत बजता है- होली के दिन दिल खिल जाते हैं रंगों में रंग मिल जाते हैं, गिले शिकवे भूल के दोस्तो दुश्मन भी गले मिल जाते हैं)

सीन-2

मुंबई का इंटरनैशनल एयरपोर्ट। सलमान खान अमेरिका जाने के लिए अपनी फ्लाइट का इंतजार कर रहे हैं। तभी लंदन से आए शाहरुख खान लॉबी में आते हैं। अचानक दोनों आमने-सामने पड़ जाते हैं।

शाहरुख : हाय सलमान।

सलमान : मेरे सामने पड़कर तो बड़ों-बड़ों की 'हाय' निकल जाती है। आखिर मैं सबसे बड़ा 'दबंग' हूं।

शाहरुख : सल्लू, ये मत भूलो कि तुम 'डॉन' से बात कर रहे हो। मुझे देखकर बड़े-बड़े 'डर' जाते हैं।

सलमान : 'वीर' के सामने इतने बड़े बोल? मत भूलो कि तुम 'बाजीगर' से ज्यादा कुछ नहीं हो।

शाहरुख : मैं 'बादशाह' हूं। समझे?

सलमान : मन्नत के 'बादशाह'! हा-हा-हा...

शाहरुख : तुम्हें इतना गरूर किस बात पर है? क्यों बार-बार पंगा लेते हो मुझसे?

सलमान : जब तक कोई मेरा रास्ता नहीं काटता, मैं किसी से पंगा नहीं लेता।

शाहरुख : रास्ता काटने की खूब कही। तुम भी मेरे रास्ते में क्यों आते हो? हमारी राहें अलग-अलग हैं, फिर भी।

सलमान : ये तो सही कहा यार तूने।

शाहरुख : तो गले लग जा यार। आखिर होली का दिन है।

(शाहरुख और सलमान गले मिलते हैं बैकग्राउंड में गीत बजता है-होली के दिन दिल खिल जाते हैं रंगों में रंग मिल जाते हैं, गिले शिकवे भूल के दोस्तो दुश्मन भी गले मिल जाते हैं)

सीन-3

मुकेश अंबानी अपनी भव्य बिल्डिंग एंटिलिया में अपने परिवार और रिलायंस समूह के अधिकारियों के साथ होली मना रहे हैं। उनकी मां कोकिलाबेन भी वहां मौजूद हैं। अचानक वहां अनिल अंबानी आते हैं। उन्हें देखकर सब गंभीर हो जाते हैं।

अनिल : (अपनी मां के पैर छूकर भाई की ओर मुड़ते हुए) हलो बिग ब्रदर। हैप्पी होली।

मुकेश : काहे की हैप्पी होली? परिवार के बिजनेस डिसपुट को घर की देहरी के बाहर तो तुम ही लेकर गए।

अनिल : बिजनेस की बात करने के लिए तो 364 दिन हैं साल में। आज तो मैं सारी रार खत्म करने आया हूं।

मुकेश : अदालत में भी हम आमने-सामने हुए। दोनों की साख गिरी अलग। और तुम्हें अब होली सूझ रही है?

अनिल : बिग ब्रदर, बीता हुआ तो बदला नहीं जा सकता। पर उस सबका नुकसान तो हम दोनों को ही हुआ है।

मुकेश : हां, यह बात तो सही है।

अनिल : एक तो हमारा बिजनेस डिसपुट, ऊपर से मंदी की मार। हमारे एसेट्स घट रहे हैं, फोर्ब्‍स लिस्ट में रेटिंग कम हो रही है।

मुकेश : और यह सब हमारे आपसी झगड़े के कारण...

अनिल : बिग ब्रदर, इसीलिए मैं आज सारे पुराने मतभेद खत्म करने आया हूं। होली के दिन हम फिर साथ-साथ होने की शुरुआत करें।

(मुकेश अंबानी आगे बढ़कर अनिल अंबानी को गले लगाते हैं। बैकग्राउंड में गीत बजता है-होली के दिन दिल खिल जाते हैं रंगों में रंग मिल जाते हैं, गिले शिकवे भूल के दोस्तो दुश्मन भी गले मिल जाते हैं)

सीन-4

अमेरिका के राष्ट्रपति व्हाइट हाउस में अपने ऑफिस में बैठे हैं। तभी उनके बेहद पर्सनल फोन की घंटी बजती है। वे यह सोचकर फुर्ती से फोन उठाते हैं कि शायद जापान से कोई अपडेट होगा रेडिएशन के बारे में। लेकिन उधर से आई ओसामा बिन लादेन की आवाज सुनकर वे भौंचक्के रह जाते हैं।

ओबामा : क्या? क्या कहा? फिर बोलो जरा।

ओसामा : अस्सलाम वालेकुम ओबामा साहब। आपने ठीक सुना। मैं ओसामा बिन लादेन ही बोल रहा हूं।

ओबामा : कहां से?

ओसामा : वो सब मत पूछो। और मॉनीटर भी मत कराइएगा। एक दर्जन से ज्यादा वीओआईपी के थ्रू आपका नंबर मिलाया है। मेरे सोर्स नंबर तक आपके सीआईए और एफबीआई के एजेंट कभी नहीं पहुंच पाएंगे।

ओबामा : कहो, फिर कोई धमकी देने वाले हो क्या?

ओसामा : धमकी क्या ओबामा साहब, हम तो एक ही राह के राही हैं। आप भी दुनिया पर अपना रॉब गाफिल करना चाहते हैं, हम भी।

ओबामा : हमारे राहें अलग हैं। हम तुम्हारी तरह कत्लेआम नहीं करते।

ओसामा : (ठहाका लगाकर) अच्छा! इराक में आपने क्या किया? और अफगानिस्तान में? और भी किस-किस मुल्क पर आपकी नजर है, गिनवाऊं क्या?

ओबामा : हम डेमोक्रेटिक तरीके से यह सब करते हैं। यूएन की नजर में लाकर।

ओसामा : तो क्या आपने मुझे भी यूएन की मंजूरी लेकर अफगानिस्तान से इरानियों को खदेडऩे के लिए भेजा था?

ओबामा : अरे यार, पुरानी बातें छोड़ो।

ओसामा : ठीक है, हम दोस्ती का हाथ बढ़ाते हैं।

ओबामा : मंजूर है।

(फोन बंद करके ओबामा गहरी सांस लेते हैं। बैकग्राउंड में गीत बजता है-होली के दिन दिल खिल जाते हैं रंगों में रंग मिल जाते हैं, गिले शिकवे भूल के दोस्तो दुश्मन भी गले मिल जाते हैं)

लेखक भुवेन्द्र त्यागी को नौनिहाल का शिष्य होने का गर्व है. वे नवभारत टाइम्स, मुम्बई में चीफ सब एडिटर पद पर कार्यरत हैं. उनसे संपर्क  This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it के जरिए किया जा सकता है.


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