आलोक तोमर से कुछ दिनों पहले तीन घंटे वाली मेरी पहली मुलाकात

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यश जी प्रणाम, भड़ास4मीडिया पर आलोक जी के स्वास्थ्य से सम्बन्धित खबर पढ़ी. कुछ कहते नहीं बन रहा है. अभी चंद रोज़ पहले ही जब मैं बरेली से दिल्ली पहुंचा तो आपके साथ उनके घर गया था, उनसे मिलने की लंबे समय से दबी पड़ी इच्छा को पूरी करने. वे तब भी बीमार ही थे, पर स्वस्थ होने को आतुर लग रहे थे.

उन तीन घंटो के दौरान मैं तो अधिकतर समय मूकदर्शक ही बना रहा और देखता रहा कैसे बातों के दौरान उनके हाव-भाव बदले, अपनी माँ से नज़र बचाते हुए कैसे उन्होंने आधी प्याली जूस नीचे फेंक दिया, और जब आपने कहा कि डेटलाइन इंडिया पर एक-दो खबरें तो जाती रहनी चाहिये, भले आप न लिखे, कोई और करे, तो कैसे उन्होंने झट से मैम (अपनी पत्नी सुप्रियाजी) से कहा कि बिटिया का आईपैड ले के आओ और इन्टरनेट चालू करो. मैं चकित था.

जब हम वहाँ से चले तो एक विश्वास था, मुझे, आपको, मैम को, के सब ठीक होगा. कुछ और भी है जो हमारे प्रयासों से बढ़के है. एक बात और कहूँगा आलोक जी के विषय में जो जीवटता प्रखरता की बात की जाती है उसका स्रोत मैंने देखा. आलोक जी की माता जी. माता जी ने आलोक जी के ना जाने कितने किस्से सुनाये, मुझे तो याद भी नहीं, मैं तो बस आलोक जी के चेहरे पे तैरती बालसुलभ गर्व से भरी हुई मुस्कान को ही देखता रहा.

वो किसी ने कहा है ना "लायी हयात आये, कज़ा ले चली, चले; ना अपनी ख़ुशी से आये ना अपनी ख़ुशी चले. बेहतर तो है यही के ना दुनिया से दिल लगे; पर क्या करें जो काम ना बे-दिल्लगी चले"

अब जब दुनिया से दिल लगाया ही है तो परम पिता से प्रार्थना है के.......आलोक जी को उनका स्वास्थ्य बख्शें वे शीघ्र घर लौटें. वो बालसुलभ मुस्कान फिर से देखनी है, माताजी से उनके और किस्से सुनने है. जो फोटो लिए थे भेज रहा हूँ.

आपका

कुशल प्रताप सिंह

बरेली

आलोकजी

आलोकजी

आलोकजी

आलोकजी

आलोकजी

आलोकजी


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