इसी पेड़ पर टेक लगाकर हमलोगों की समस्‍याएं सुलझाते थे

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आलोक जी अक्सर सीएनईबी के बाहर इस पेड़ पर टेक लगाकर इसी अंदाज़ मे खड़े होते थे. ऑफिस के लोगों के साथ यहीं बतियाते थे तथा यहीं खड़े होकर ऑफिस के लोगों की व्यक्तिगत समस्याएं सुलझाते थे. पहली बार मेरी उनसे भेंट भी इसी पेड़ के नीचे हुई थी. काफी देर बात हुई थी. अब मैं जब भी ऑफिस जाऊंगा इस पेड़ पर टेक लगाये आलोक जी मुझे हर बार नज़र आएंगे. उनकी यही सरल अदा लोगों को अपना दीवाना बना लेती थी.

आलोकजी

आलोकजी


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