ओंकार विद्या सम्मान से स्वयं प्रकाश सम्मानित

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स्वयं प्रकाश (बाएं) का सम्मानश्री श्री रविशंकर की जीवनी लिखने वाले पत्रकार स्वयं प्रकाश को कोलकाता में पिछले दिनों प्रथम ओंकार विद्या सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान ओंकार चैरिटेबल ट्रस्ट की तरफ से प्रदान किया गया। सम्मान समारोह रोटरी सदन के श्रीपति सिंघानिया हॉल में आयोजित किया गया। समारोह को संबोधित करते हुए मूर्धन्य साहित्यकार डा. कृष्ण बिहारी मिश्र ने कहा कि उपभोक्तावाद और भौतिकतावाद के इस दौर में भी सर्जनशील युवा आधार बंजर नहीं हुआ है।

इसके बूते भारतीय संस्कृति व संस्कार की धवलता की रक्षा की जा सकती है। डा. मिश्र ने समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा, स्वयं प्रकाश ने रूटीन पत्रकारिता से इतर कुछ नया करने के संकल्प के तहत श्री श्री रविशंकर की जीवनी लिखी। इस दौरान उसे विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। मगर बिना घबराये उसने अपने रचनात्मक कर्म को पूरा किया। यह सम्मान स्वयं प्रकाश की साधना का सम्मान है और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरक भी। स्वयं प्रकाश सम्मान समारोहसमारोह के मुख्य अतिथि व प्रभात खबर के प्रधान संपादक हरिवंश ने कहा कि समाज जिन सदगुणों की अपेक्षा रखता है, उन्हें आगे ले जाने वालों को सम्मानित करना वस्तुतः उन सदगुणों का ही सम्मान है। सामाजिक मूल्यों व सदगुणों से भरे लोग आकाशदीप की तरह होते हैं।

इस मौके पर भारतीय भाषा परिषद के निदेशक विजय बहादुर सिंह, पत्रकार डॉ कृपाशंकर चौबे, विनय बिहारी सिंह, डॉ मान्धाता सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे। बताते चलें कि स्वयं प्रकाश प्रभात खबर, कोलकाता के समाचार संपादक के रूप में लंबे समय तक कार्य करते रहे। इस समय वह दैनिक भास्कर से जुड़े हैं। पुरस्कार स्वरूप स्वयं प्रकाश को 51 हजार रुपये की राशि प्रदान की गयी। मौके पर स्वयं प्रकाश ने कहा, मैं जो कुछ हूं वह परिवार, पिता और मां के संस्कारों के चलते हूं। मैं प्रयास करता हूं कि ईमानदार रहूं।


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