दयाशंकर शुक्‍ल सागर को फिर मिला केसी इंटरनेशनल कुलिश अवार्ड

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अपनी विवादित पुस्तक 'महात्मा गाँधी : ब्रह्मचर्य के प्रयोग' के लिए चर्चा में आये वरिष्ठ पत्रकार दयाशंकर शुक्ल सागर व उनकी टीम को इस साल बेहतरीन खबर के लिए एक बार फिर पत्रकारिता जगत में प्रतिष्ठित के सी इंटर नेशनल कुलिश अवार्ड से सम्मानित किया गया है.

सोमवार को यह अवार्ड उन्हें उनकी स्टोरी "फर्जी खाते खोल कर लाखों की लूट" के लिए दिया गया है. वर्ष २००८ में यह अवार्ड उन्हें 'इस आतंकवादी की खता क्या है' खबर पर मिला था. श्री शुक्ल की टीम में कार्यकारी संपादक नवीन जोशी व पत्रकार मनीष शर्मा भी शामिल हैं. इस साल हिंदी अखबारों में अकेले श्री सागर की स्टोरी चुनी गई.

सोमवार को नई दिल्ली मे ताज होटल मे आयोजित के सी कुलिश पुरुस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप मे प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह उपस्तिथ थे, इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बीएल जोशी भी मौजूद थे. प्रधान मंत्री ने कहा कि सनसनीखेज़ पत्रकारिता लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं. उन्होंने कहा कई बार अखबार सरकार का मार्ग दर्शन भी करते है. उन्होंने प्रिंट मीडिया को ज्‍यादा विश्वसनीय बताया. उन्होंने कहा थोड़े फायदे के लिए कई संपादक व पत्रकार पूरी पत्रकारिता पर सवाल खड़े कर रहे है. यह चिंता की बात है.

इस साल हिंदुस्तान के आलावा इंडियन एक्सप्रेस, डेली जंग, ला ओपिनियन, मलयालम पत्रिका की खबरों को इस  अवार्ड के लिए चुना गया है. इनके रिपोर्टरों का यहाँ मेडल व सम्मान पत्र दे कर साम्मानित किया गया. हिन्दी मे इस साल अकेले श्री सागर की रिपोर्ट को कुलिश अवार्ड मिला. श्री सागर ने अपनी इस रिपोर्ट मे नरेगा के नाम पर चल रही लूट का पर्दाफाश किया था.

रिपोर्ट में बताया गया था कि ग्राम प्रधान सहकारी बैंक मैनेजरों से मिल कर मजदूरों का पैसा हड़प रहे थे. ज़मीन पर कहीं कोई काम नहीं हो रहा था. घपले की श्रृंखला छपने के बाद सरकार को पूरे प्रदेश में नरेगा खाते सहकारी बैंकों से हटा कर नेशनल बैंकों में ट्रांसफर करने के आदेश जारी करने पड़े थे.  श्री सागर इलाहाबाद हिन्दुस्तान के सम्पदकीय प्रभारी है. इससे पहले बेहतरीन रिपोर्टो पर उन्‍हें कई फेलोशिप और पुरस्‍कार मिल चुके हैं.


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