'दिल्ली से कई गुना बेहतर है नागपुर की पत्रकारिता'

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SN Vinodनागपुर में हिंदी परिवार की ओर से हिंद सेवा व पत्रकारिता पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। इसमें उन कर्मवीरों को पुरस्कार दिया गया जो  विपरीत परिस्थितियों के बावजूद समाज हित के लिए कर्तव्यनिष्ठा पर अडिग रहे। आयोजक किशोर भुसारी ने समारोह के आयोजन की भूमिका प्रस्तुत करने के तत्काल बाद समारोह के प्रमुख अतिथि 'राष्ट्रप्रकाश' के प्रधान संपादक और 'देशोन्नती' के समूह संपादक एस.एन. विनोद को शुभेच्छापरक संबोधन के लिए आमंत्रित किया.

श्री विनोद ने कहा कि पुरस्कार केवल प्रोत्साहन के लिए नहीं बल्कि समाज को प्रेरणा मिले, इस उद्देश्य से भी दिया जाता है. उन्होंने मीडिया के वर्तमान दौर में नजर आये चारित्रिक पतन और कटु अनुभवों की लम्बी फेहरिस्त सामने रखी। आरुषि बलात्कार और हत्याकांड पर टीआरपी बढ़ाने के लिए न्यूज चैनलों का चरित्र दर्शन और एक न्यूज चैनल का नागपुर में प्रदर्शित कोरा झूठ आदि पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्होंने मीडिया से आह्वान किया कि पत्रकारिता को मिशन के बजाय पेशा ही बनाना हो तो बनाएं लेकिन उसके सामने पवित्र शब्द जरूर जोड़ दिया जाये. दिल्ली की पत्रकारिता से तो कई गुना बेहतर नागपुर की पत्रकारिता है. समाज जिस मीडिया पर आंख मूंदकर विश्वास करता है, उसके प्रहरियों को गुमराह करने वाली खबरों से बचना चाहिये. यदि हम समाज से ऐसा धोखा कर रहे हैं तो अपने परिवार से धोखा कर रहे हैं. जिसके पुरस्कृत किए गए कर्मवीर मुख्य अतिथि और आयोजकों के साथलिए आपको सम्मानित किया जा रहा है, उसमें और वृद्धि करें ताकि इससे भी वृहद सभागृह में उनका सम्मान हो सके.

समारोह में प्राचार्य राम शेवालकर ने कहा कि पत्रकारिता के 'प्रकाशस्तंभों' के कारण ही आज अखबारों की विश्वसनीयता कायम है. उन्होंने कहा कि चारित्रिक पतन के लिए केवल पत्रकार ही जिम्मेदार नहीं बल्कि शिक्षा, न्याय, प्रशासन और रक्षा आदि क्षेत्रों के प्रमुख व्यक्ति भी जिम्मेदार हैं. राजनीतिक व्यक्ति पर आज कोई विश्वास नहीं करता लेकिन पत्रकारिता के प्रकाशस्तंभों के कारण अखबारों की विश्वसनीयता कायम है. इस सम्मान समारोह का साक्षी बनकर मैं गौरवान्वित हुआ. प्रा. शेवालकर ने अपने वक्तव्य में भ्रष्टाचार पर कई चुटकियां भी लीं. व

रिष्ठ समाजसेवी डा. प्रकाश आमटे ने पत्रकारों को कैसा होना चाहिये, इस पर सोमालिया और आत्मदाह करनेवाले छात्र का समाचार कवरेज करने आए टीवी चैनल के पत्रकार का उदाहरण बखूबी प्रस्तुत किया. उन्होंने कहा कि मरते हुए व्यक्ति का चित्र खींचने के बजाए उसे बचाने की कोशिश पत्रकारों की प्राथमिकताओं में होनी चाहिये. कार्यक्रम के अध्यक्ष बालासाहब देवपुजारी ने चेताया कि जिस समाज को सुधारने की बात की जा रही है, उसमें सुधार केवल भाषणों से नहीं होगा, उस दिशा में सटीक प्रयास होने चाहिये. शुरुआत में परम्परानुसार दीप प्रज्ज्वलन पश्चात अक्षय स्वरधारा की ओर से सत्यं शिवं सुंदरम् गीत की प्रस्तुति की गई. तत्पश्चात अतिथियों का शाल-श्रीफल व पुष्पगुच्छ देकर सत्कार किया गया. समारोह का संचालन रीना निकम ने किया.


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