अंग्रेजी पत्रकारों की एकजुटता से हारीं गीताश्री

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गीताश्रीमहिला प्रेस क्लब उर्फ इंडियन वीमेन्स प्रेस कोर (India Women Press Corps), दिल्ली के सालाना चुनाव के बाद नई टीम ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है। वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी अध्यक्ष चुनी गई हैं। महासचिव बनी हैं फ्रंटलाइन की टीके राजलक्ष्मी। हिसाब-किताब (कोषाध्यक्ष) का काम टाइम्स आफ इंडिया की नविका कुमार देखेंगी। उपाध्यक्ष के दो पदों के लिए साधना न्यूज की अरुणा सिंह और नवभारत टाइम्स की मंजरी चतुर्वेदी को मौका मिला है।

उपरोक्त सभी पदों के लिए चुनाव नहीं कराने पड़े क्योंकि महिला पत्रकारों में आपसी सहमति कायम हो गई थी। ज्वाइंट सेक्रेटरी पद के लिए सहमति न बनने के कारण और मैनेजिंग कमेटी के मेंबर का चयन करने के लिए 28 मार्च को वोट पड़े। ज्वाइंट सेक्रेटरी पद पर गीताश्री (हिंदी आउटलुक) और सोनल कैलाग (एशियन एज) के बीच लड़ाई थी। मैनेजिंग कमेटी मेंबर के 21 पदों के लिए कुल 29 महिला पत्रकार मैदान में थीं। चुनाव के बाद जो नतीजे आए उससे पता चला कि सोनल कैलाग ने गीताश्री को हरा दिया।

गीताश्री की हार के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। एक तो गीताश्री का दिल्ली में न होना भी कारण है। वे इन दिनों महिला पत्रकारों के एक दल के साथ सीरिया के दौरे पर गई हुई हैं। दूसरे, अंग्रेजी की महिला पत्रकारों ने अंदरखाने एकजुट होकर गीताश्री को हराने के लिए कमर कस लिया था। वोमेन्स प्रेस क्लब पर शुरू से अंग्रेजी का महिला पत्रकारों का कब्जा रहा है। हिंदी की पत्रकारों को आमतौर पर वाइस प्रेसीडेंट पद देकर शांत करा दिया जाता रहा है। प्रमुख पदों पर हमेशा से अंग्रेजी की पत्रकार आसीन होती रही हैं। गीताश्री को पिछले दो बार से किसी महिला उम्मीदवार के पक्ष में आम सहमति बनाने के नाम पर चुनाव न लड़ने के लिए राजी किया जाता रहा है। इस बार जब वे राजी नहीं हुईं तो फैसला वोट से हुआ। पिछले साल एक्जीक्यूटिव मेंबर के चुनाव में गीताश्री को सभी महिला पत्रकारों से ज्यादा वोट मिला था।

इस बार उन्हें हराने के लिए जो अंदरूनी साजिशें की गईं और चाल चली गई। अंग्रेजी के पत्रकारों को एकजुट किया गया ताकि हिंदी की गीताश्री को हराया जा सका। इन सभी कारणों के चलते गीताश्री काफी अंतर से हारीं। सूत्रों के अनुसार सोनल कैलाग को 97 में वोट मिले तो गीतश्री को सिर्फ 45 मतों से संतोष करना पड़ा। इस चुनाव में कुल 146 महिला पत्रकारों ने वोट दिया। चुनाव की प्रक्रिया निर्वाचन अधिकारी एस. चक्रवर्ती की देख-रेख में संपन्न हुआ। शनिवार को चुनाव के बाद इसका नतीजा भी इसी दिन देर शाम घोषित कर दिया गया। चुनाव वाले दिन सभी महिला पत्रकार प्रेस क्लब में सजधज के पहुंचीं और पूरे दिन चाय-नाश्ते व खाने का लुत्फ उठाते हुए चुनाव गतिविधियों में शामिल रहीं।

वोमेन्स प्रेस क्लब का चुनाव पहली बार 1998 में हुआ था। उसके पहले सर्व सहमति से नई टीम का गठन कर लिया जाता था। इस क्लब की स्थापना में मृणाल पांडेय, अनीता सक्याल समेत कई महिला पत्रकारों की भूमिका रही है। क्लब की फाउंडर प्रेसीडेंट भी रही हैं मृणाल पांडेय। क्लब के नियम के मुताबिक कोई सदस्य एक पद पर लगातार दो बार ही निर्वाचित हो सकता है। तीसरे साल उन्हें किसी और पद के लिए लड़ना पड़ता है। निवर्तमान अध्यक्ष ज्योति मल्होत्रा भी लगातार दो बार से अध्यक्ष बन थीं इसलिए इस बार उन्होंने मैनेजिंग कमेटी के मेंबर के लिए चुनाव लड़ा। क्लब के नियम के अनुसार वोमेन्स प्रेस क्लब में पुरुष पत्रकार किसी महिला सदस्य के साथ ही आ सकता है। क्लब में समय-समय पर कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। पिछले साल सीरिया के राष्ट्रपति की पत्नी आई थीं। उनके न्योते पर वोमेन्स प्रेस क्लब का 13 सदस्यीय दल इन दिनों सीरिया के दौर पर है। सीरिया जाने के लिए महिलाओं का नाम लाटरी सिस्टम के जरिए तय किया गया। वोमेन्स प्रेस क्लब के संविधान में 18 वरिष्ठ महिला पत्रकारों के हस्ताक्षर हैं।

इस बार मैनेजिंग कमेटी के लिए जो 21 पत्रकार चुनी गई हैं, उनके नाम इस प्रकार हैं- माधवीश्री (स्वतंत्र पत्रकार), करुणा मदान (वेब जर्नलिस्ट), इरा झा (स्वतंत्र पत्रकार), गार्गी परसाई (द हिंदू), सुषमा रामचंद्रन (स्वतंत्र पत्रकार), नीलम जीना (विशालधारा तेलगु), अनीता कत्याल (द ट्रिब्यून), अनुपूर्णा झा (यूएनआई), ज्योति मल्होत्रा (स्वतंत्र पत्रकार), पारुल शर्मा (जनसत्ता), सरोज नागी (हिंदुस्तान टाइम्स), कल्याणी शंकर (स्वतंत्र पत्रकार), रितु सरीन (इंडियन एक्सप्रेस), शुभा सिंह (स्वतंत्र पत्रकार), मनिका चोपड़ा (स्वतंत्र पत्रकार), कुमकुम चड्ढा (हिंदुस्तान टाइम्स), शांता सरबजीत (स्वतंत्र पत्रकार), रश्मि सहगल (एशियन एज), नारायणी गणेश (टाइम्स आफ इंडिया), विमल इस्सर (स्वतंत्र पत्रकार) और रविंदर बावा (आज तक)।


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