जिस मामले में मंत्री-अधिकारी जेल में हैं, उसमें पत्रकारों को जेल कब होगी - हरिवंश

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: पत्रकारों को सम्‍मान और फेलोशिप :  झारखंड सरकार ने पहली बार मीडियाकर्मियों को पुरस्कार और फेलोशिप देकर नयी शुरुआत की। राजधानी के होटल बीएनआर में 18 अगस्त 2011 को एक समारोह में 26 पत्रकारों को फेलोशिप, दस पत्रकारों एवं तीन फिल्मकर्मियों को सम्मान के साथ ही बलबीर दत्त को लाइफटाइम एचिवमेंट अवार्ड प्रदान किया। श्री दत्त को ढाई लाख की राशि दी गयी जबकि मीडिया फेलोशिप की राशि 50-50 हजार और सम्मान की राशि 75-75 हजार थी।

इस मौके पर एक विचारगोष्ठी भी हुई। विषय था- समाज, शासन एवं मीडिया, अंतर्विरोधी एवं समन्वयकारी तत्व। इसे मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, दैनिक हिंदुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर तथा प्रभात खबर के प्रधान संपादक हरिवंश ने संबोधित किया। हरिवंश ने अपनी चिर-परिचित शैली में मीडिया, शासन और समाज के अंतर्दंद्वों की व्याख्या करते हुए मीडिया की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किये। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि सिस्टम को अच्छी लगने वाली खबरें छापना तो बेहद आसान है, सबसे बड़ी चुनौती ऐसी खबरें देना है जो सिस्टम को सवालों के घेरे में लाती हों। हरिवंश ने मीडिया के बारे में चालू मिथकों को तोड़ते हुए कहा कि टू-जी स्पेक्ट्रम में मीडिया को श्रेय देना बिलकुल गलत है,  क्योंकि इसकी सच्चाई काफी पहले सामने आने के बावजूद खबरें तब बनीं जब अदालत का आदेश आया। कारण कि इसमें खुद मीडिया की भूमिका संदिग्ध रही। हरिवंश ने सीधा सवाल किया कि जिस मामले में मंत्री-अधिकारी जेल में हों, उसी मामले में पत्रकारों को जेल कब होगी? इस क्रम में हरिवंश ने मीडिया की जवाबदेही तय करने की बात दुहरायी। उन्होंने झारखंड में अच्छी पेशेवर संस्थाओं की स्थापना और योग्यता को बढ़ावा देने का भी सुझाव दिया।

शशि शेखर ने खबरों के चयन और प्रस्तुति में शासन और समाज के रिश्तों को लेकर जटिलताओं का वर्णन करते हुए बताया कि ब्रेकिंग न्यूज की आपाधापी में तथ्यपरकता बनाये रखना और भीड़ से अलग रहना कितना मुश्किल है। एक समाचार चैनल में काम के अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए उन्होंने एक दिलचस्प संस्मरण सुनाया कि किस तरह एक साध्वी सह नेत्री के विवाह की अफवाह को खबर न बनाने के कारण आये तात्कालिक दबाव के सामने वह एक संपादक के बतौर तथ्यपरकता के अपने उसूल पर टिके रहने का जोखिम उठाते रहे। इस दौरान सहकर्मियों के दबाव का भी उन्होंने रोचक विवरण दिया। अंततः जीत तथ्यपरकता की हुई क्योंकि विवाह की बात महज अफवाह थी और पहले बढ़-चढ़कर खबर चलाने वाले चैनल को शर्मिंदा होना पड़ा।

मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने अपने संक्षिप्त संबोधन में इस आयोजन की परिकल्पना की चर्चा एवं राज्य व समाज के विकास में मीडिया से अपेक्षाओं का उल्लेख करते हुए युवा पत्रकारों को आज की चुनौतियों को समझने और उसके अनुकूल सकारात्मक एवं विकासात्मक पहलुओं को सामने लाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि झारखंड शुरू से प्रतिवाद की भूमि रही है। यहाँ के सरल-सहज लोगों ने शुरू से ही अपनी सार्वभौमिकता के साथ समझौता नहीं किया और न ही कभी आधिपत्य को स्वीकार किया है। जैसे पर्यावरण के असंतुलन से जीवन का संतुलन बिगड़ जाता है ठीक उसी तरह झारखंड के सहज जीवन के माध्यम से प्रतिबिम्बित लोकतंत्र की सहजता को संरक्षित किए जाने की जरूरत है। उन्हों ने कहा कि लोकतंत्र के सभी अवयवों के समन्वय से एक ऐसी व्यवस्था कायम हो ताकि सूबे के भावी इतिहास की संरचना एक रचनात्मक पृष्ठभूमि पर आधारित हो। इस मौके को राज्य के निर्माण की दिशा में एक प्रयास की संज्ञा देते हुए उन्हों ने कहा कि ऐसे प्रयत्नों से सहज संवाद की प्रक्रिया सुगम होती है। विकास के लिए संवाद को आवश्‍यक बताते हुए उन्हों ने कहा कि इस रचनात्मक उर्जा का इस्तेमाल सूबे के नए इतिहास को गढ़ने के लिए प्रवृत्‍त होना चाहिए।

झारखंड में पत्रकारिता के भीष्म पितामह एवं दैनिक रांची एक्सप्रेस के प्रधान संपादक बलबीर दत्त को मीडिया के क्षेत्र में जीवन पर्यन्त सर्वोत्कृष्ट सेवा सम्मान दिया जाना इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण अवसर था। मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने उन्हें ढाई लाख का यह सम्मान प्रदान किया। दैनिक सन्मार्ग के प्रधान संपादक बैजनाथ मिश्र ने बलबीर दत्त के योगदान का उल्लेख किया। विकास भारती के सचिव अशोक भगत ने खुले सत्र में विचार रखे। वरिष्ठ पत्रकार विकास कुमार झा ने झारखंड के मैकलुस्कीगंज पर लिखी अपनी पुस्तक के संदर्भ में राज्य से जुड़े अनुभव बांटे। इस उपन्यास के लिए श्री झा को गत दिनों लंदन के हॉउस ऑफ कॉमन्स में सम्मानित किया गया है। कार्यक्रम का विषय प्रर्वतन प्रधान सचिव, सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग, डॉ. डीके तिवारी ने किया। प्रधान सचिव एसके चौधरी ने इस प्रयास को एक सकारात्मक कदम बताया। कार्यक्रम का संचालन सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के अपर सचिव राजीव लोचन बख्शी कर रहे थे। धन्यवाद ज्ञापन उप निदेशक श्रीमती स्नेहलता एक्का ने किया। कार्यक्रम में राज्य के कई वरीय पदाधिकारी और बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी एवं नागरिक उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि गत दिनों झारखंड के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने अपने आवास पर राजधानी के वरीय मीडियाकर्मियों के साथ रात्रिभोज के दौरान इस फेलोशिप योजना की घोषणा की थी। उन्होंने इस योजना में प्रिंट मीडिया के साथ ही श्रव्य-दृश्य माध्यमों को भी शामिल करने की बात कही थी। जिन फिल्मकर्मियों को सम्मान मिला- मेघनाथ, बिजू टोप्पो, श्रीप्रकाश शामिल हैं।  58वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रोमोशनल फिल्म 'एक रोपा धान'  (हिंदी) एवं सर्वश्रेष्ठ पर्यावरण फिल्म 'आयरन इज हॉट'  (अंग्रेजी) के लिए रजत कमल पुरस्कार हेतु चयनित फिल्मकार द्वय मेघनाथ भट्टाचार्य एवं बीजू टोप्पो को मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने सम्मानित किया। 56वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में रजत कमल से पुरस्कृत डोक्यूमेन्टरी फिल्म 'बुरू-गारा'  के फिल्मकार श्रीप्रकाश का सम्मान उनके सहयोगी बीजू टोप्पो ने प्राप्त किया।

जिन्हें मीडिया फेलोशिप मिली उसमें संजय श्रीवास्तव, संजय कृष्ण, सलाउद्दीन, पंकज त्रिपाठी, अनंत, शेली खत्री, आलोका, शैलेश कुमार सिंह, शक्तिधर पांडेय, विकास कुमार सिन्हा, अमित कुमार झा, नौशाद आलम, नदीम अख्तर, सर्वजीत सिंह, कुमार संजय, प्रशांत झा, चंदोश्री ठाकुर, प्रशांत जयवर्द्धन, महेश्वर सिंह छोटू, तन्वी झा, रूपक कुमार, आशीष कुमार सिन्हा, युगेश्वर राम, ओमप्रकाश पाठक, सुरेंद्र लाल सोरेन, अनुपमा कुमारी शामिल हैं। विकासात्मक आलेख के लिए वंदना टेटे, वीरेंद्र कुमार महतो, अनुपमा कुमारी, नवतन कुमार, संजय यादव, ओली मिंज, संतोष कुमार किड़ो, पुष्पा टेटे, संजय कुमार सुमन, अन्नी अमृता को पुरस्‍कार प्रदान किया गया।

''मीडिया फेलोशिप''  के लिए बनी आठ सदस्यीय समिति में डॉ. रमेश शरण (अर्थशास्त्र विभाग, राँची विवि),  चंदन मिश्र (ब्यूरो प्रमुख, दैनिक हिन्दुस्तान), डॉ.  विष्णु राजगढ़िया (ब्यूरो चीफ, नई दुनिया), विजय पाठक (स्थानीय सम्पादक, प्रभात खबर), सुमन श्रीवास्तव (ब्यूरो प्रमुख, द टेलीग्राफ),  अरविन्द मनोज कुमार सिंह (इग्नू के सहायक क्षेत्रीय निदेशक) शामिल हैं। ''विकासात्मक आलेख''  समिति में सेवानिवृत प्रोफेसर रोज केरकेट्टा एवं बीपी केसरी के अलावा विजय मूर्ति, (ब्यूरो प्रमुख, हिंदुस्तान टाइम्स), अनुपम शशांक (विशेष संवाददाता, इकोनोमिक टाइम्स), शशिभूषण (समाचार संपादक, दैनिक जागरण) शामिल हैं। सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के अपर सचिव राजीव लोचन बख्शी तथा उपनिदेशक श्रीमती स्नेहलता एक्का दोनों समितियों में शामिल हैं। इस परियोजना की परिकल्पना में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सहायक निदेशक आनंद की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


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