पत्रकार हूं, बिना बोले चला गया तो नींद नहीं आएगी : राणा यशवंत

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संबोधित करते राणा यशवंततारीख थी 20 अगस्त और जगह इंडियन इंटरनेशनल सेंटर नई दिल्ली। मौका था राजीव गांधी ग्लोबल एक्सिलेंस अवार्ड 2011 का..। मंच पर माननीय अतिथिगण बैठे थे और सामने पहली दूसरी पंक्ति में वे बैठे थे, जिनका नाम पुरस्कारों के लिए चुना गया था। जो मंच पर थे, उनमें से कई को बोलने का मौका भी मिला।

कुछ लोगों ने इसे सियासी बनाने की कोशिशें भी कीं। अन्ना के अनशन को भी कुछ वक्ताओं ने निशाना बनाया।  इसके बाद आई अवार्ड्स देने की बारी। समाज के हर क्षेत्र में विशिष्ट उपलब्धि हासिल करने वालों का सम्मानित किया जा रहा था। लोगों का नाम बुलाया जा रहा था, लोग आ रहे थे, स्मृति चिह्न लेकर वापस अपनी सीट पर पहुंच जाते थे। अवार्ड्स की सूची में युवा पत्रकार और महुआ न्यूज के ग्रुप एडिटर राणा यशवंत का नाम भी था। उन्हें संस्था ने बेस्ट एडिटर के लिए चयनित किया था। राणा यशवंत भी आए, सम्मान ग्रहण किया, लेकिन होस्ट के पास रुक गए। राणा यशवंत ने कहा- मैं पत्रकार हूं और अगर बिना बोले चला गया तो रात में नींद नहीं आएगी। फिर उन्होंने अपने संक्षिप्त वक्तव्य में बहुत कुछ कह दिया। हम वो पूरा अंश आपके सामने रख रहे हैं-

'इस अवार्ड के लिए बहुत बहुत शुक्रिया. मै गांव से हूं. मुझे पता है कि मेरे गांव में इस समय धान घुटने से ऊपर आ गया होगा.. हर खेत में पानी होगा.. रास्ते के दोनों तरफ़ पानी होगा.. कमाल फ़ारूखी साहब ने एक बड़ा सवाल उठाया.. सवाल ये कि इस मुल्क में हम कितने सवालों पर खड़ा होते हैं..कितने मसाइल हैं जिन पर हम चर्चा करते हैं.. असहमतियां हर समाज में होती हैं, सबसे विकासमान समाज वही होता है..। मैंने अपने गांव का जिक्र इसलिए किया, क्योंकि जब मेरे गांव में यूरिया लेकर के किसान आता है, तो रास्ते में उसका यूरिया गिर जाता है, तो कैसे समेटता है वो.. कितने दर्द के साथ समेटता है वो.. एक औरत चार रोटी लेकर अपने बच्चों के लिए आती है किसी के घर से मांग कर, वो रोटियां गिर जाती हैं तो उन्हें पोंछकर उठा लेती है..। इस मुल्क में टूजी स्कैम होता है, माइन्स स्कैम होता है .. स्कैम दर स्कैम होते हैं.. और हम लड़ते भी हैं.. हम पत्रकार हैं.. हम सच दिखाते हैं.. सच तक जाते हैं.. गांव में जब मैं था तो मुझे लगता था कि मेरा गांव ही दुनिया है और ऐसे ही लोगों के घर बार होते होंगे.. लेकिन ये एक दिन मुझे समझ में आया कि मुल्क बहुत बड़ा है, करोड़ों चेहरे हैं और करोड़ों सवाल हैं.. हमारे मुल्क के लिए.. हमारे जम्हूरियत के लिए कितने सवाल बड़े... ये हमें आज सोचना होगा.. उन सवालों पर हमें चर्चा करनी होगी.. उन सवालों पर बहस करना होगा,.. बहुत बहुत शुक्रिया आपका..'

सम्मान ग्रहण करते राणा यशवंत

राणा यशवंत के इस संबोधन के खत्म होते ही पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। राणा यशवंत का ये कोरा बयान ही नहीं था। राष्ट्रीय चैनल से रीजनल चैनल में आने के बाद उन्होंने उत्तरदायी पत्रकारिता की मिसाल पेश की है। महुआ न्यूज का चेहरा बदला...। लोगों की समस्याओं तक गए, लोगों को चैनल से जोड़ा। बिहार-झारखंड के लोगों को यकीन हुआ कि है कोई ऐसा चैनल जिस पर हम अपनी बात रख सकते हैं, जो चैनल हमारी बात करता है, हमारे हित की बात करता है। राणा यशवंत पिछले डेढ़ दशक से टीवी पत्रकारिता में हैं..। क्रिएटिव पत्रकार हैं, हर वक्त कुछ नया करने की धुन सवार रहती है। इसके अलावा वे गजब के वक्ता भी हैं। छात्र जीवन में वाद विवाद प्रतियोगिता का पहला पुरस्कार राणा यशवंत ही झटकते थे और आज भी जब वो मंच पर बोलते हैं या फिर न्यूज रूम में बोलते हैं तो ऐसा लगता है कि बोले जाने वाले सारे शब्द करीने से सजाए गए हों। आउटपुट के पत्रकार रहे हैं, कम शब्दों में अपनी बात कहना यानी गागर में सागर रखना अच्छी तरह से जानते हैं। अपना यही हुनर तो उन्होंने दिखाया था राजीव गांधी ग्लोबल एक्सिलेंस अवार्ड में।

वीएम की रिपोर्ट


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