कैलाश सेंगर ने निराला सम्मान ग्रहण किया

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निराला सम्मान प्राप्त करने के बाद कवि कैलाश सेंगर के साथ रामगोपाल शर्मा, देवकीनंदन बूबना, सत्यनारायण सत्तन, विश्वनाथ सचदेव, जयवंती बेन मेहताहिंदी कविता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान करने वाले कवियों को मुम्बई की प्रसिद्ध संस्था 'साहित्य कला संगम' द्वारा दिया जाने वाला अखिल भारतीय सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' सम्मान इस वर्ष गीतकार एवं हास्य-व्यंग्य कवि तथा वरिष्ठ पत्रकार कैलाश सेंगर को एक भव्य आयोजन में प्रदान किया गया। पुरस्कार स्वरूप उन्हें स्मृति चिह्न, शाल एवं श्रीफल के साथ 41 हजार रुपये की राशि भी प्रदान की गयी। सम्मान समारोह की मुख्य अतिथि थीं पूर्व केंद्रीय मंत्री जयवंती बेन मेहता।

'नवनीत' के संपादक विश्वनाथ सचदेव ने कैलाश सेंगर की रचनाधर्मिता पर प्रकाश डाला। संस्था के प्रमुख देवकीनंदन बूबना एवं रामगोपाल शर्मा ने पुरस्कार के विषय में लोगों को जानकारी दी। इस अवसर पर उपस्थित वरिष्ठ कवि सत्यनारायण सत्तन ने कहा कि 30 वर्ष पहले अकोला के मंच पर जब मैंने पहली बार कैलाश सेंगर की रचनाओं को सुना था, तभी उनकी 'काव्यक्षमता' के लिए भविष्यवाणी की थी।

इस सम्मान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए श्री सेंगर ने कहा कि यह सम्मान मेरे वरिष्ठों द्वारा मुझमें बोए गए काव्य-बीज का सम्मान है। इस अवसर पर उन्होंने अपनी कई कविताएं प्रस्तुत कीं। 'बच्चों के कंचों की गूंजें जरा ध्यान से सुन लेना/ मंदिर की घंटी उनकी ही नकल उतारा करती है...' तथा 'तू मुझे लिख के रोज खत ये पूछता क्यों है/ बड़ा है रब या मोहब्बत ये पूछता क्यों है, जो तेरे मेरे बीच फूल सा महकता है/ वो इश्क है या इबादत ये पूछता क्यों है...' जैसी उनकी कई काव्य पंक्तियों को श्रोताओं द्वारा सराहा गया।


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