फरीद जकारिया को पद्मभूषण, कांग्रेसी पत्रकार टापते रह गए

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इस बार दिल्ली के कांग्रेसी पत्रकारों में मायूसी है. प्रसिद्ध अमरीकी पत्रिका न्यूजवीक के संपादक फरीद जकारिया को पद्मभूषण देने की घोषणा के अलावा किसी भी अन्य पत्रकार को पद्म सिरीज का कोई पुरस्कार नहीं मिला. यहां तक कि सैफ अली खान जैसे एक्टर को भी पद्मश्री लायक मान लिया गया पर कई वरिष्ठ व जेनुइन पत्रकारों को इस लायक भी नहीं समझा गया. कांग्रेसी पत्रकार तो विशेषकर टापते रह गए.

जो जेनुइन हैं, वे तो शांत हैं. उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, पुरस्कार मिले या न मिले. पर जो कांग्रेसी खानदान से नजदीकी ताल्लुकात रखते हैं और पूरे साल 'आरजी, पीजी, एसजी' (राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, सोनिया गांधी) के गुणगान करते रहे, अपने-अपने मीडिया माध्यमों के जरिए इनका भौकाल बनाते रहे, वे जरूर मायूस हैं. इन लोगों को लग रहा था कि पिछले साल जिस तरह से थोक भाव में पत्रकारों को पद्म सिरीज के पुरस्कार दिए गए, इस बार भी दो-चार का भला हो जाएगा. लेकिन पत्रकार के नाम पर पुरस्कार दिया भी तो ऐसे आदमी को जो अंग्रेजी का है और देश से बाहर काम कर रहा है. हिंदी वाले वरिष्ठ पत्रकार जो कांग्रेस लाबी के प्रिय पात्र हैं, इस झटके से फिलहाल उबर नहीं पा रहे हैं. अब इन्हें इंतजार अगले साल का है.

दिल्ली के एक पत्रकार द्वारा भड़ास4मीडिया को भेजा गया पत्र


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