बालेन्दु दाधीच को 'ज्ञान प्रौद्योगिकी पुरस्कार'

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बालेंदु दाधीचहिंदी के लोकिप्रय समाचार पोर्टल प्रभासाक्षी॰कॉम के समूह संपादक बालेन्दु दाधीच को दिल्ली सरकार की हिंदी अकादमी का प्रतिष्ठित 'ज्ञान प्रौद्योगिकी पुरस्कार' देने की घोषणा की गई है। राजधानी में 23 मार्च को आयोजित किए जाने वाले समारोह में दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और प्रख्यात बंगला लेखिका महाश्वेता देवी यह पुरस्कार प्रदान करेंगी। पुरस्कार स्वरूप 50 हजार रुपए नकद, शॉल एवं प्रशस्ति पत्र दिया जाता है। श्री दाधीच को हिंदी पत्रकारिता और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया जा रहा है। बालेंदु 12 वर्ष से सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हिंदी के लिए काम कर रहे हैं। वे हिंदी सॉफ्टवेयरों के बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति के सदस्य हैं।

वे विदेश मंत्रालय की ओर से न्यूयॉर्क में आयोजित विश्व हिंदी सम्मेलन से जुड़ी तकनीकी एवं वेब समितियों के भी सदस्य रहे हैं। उन्हें संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि आयोग के पुरस्कार के अलावा 2008 का अक्षरम सूचना प्रौद्योगिकी सम्मान एवं माइक्रोसॉफ्ट मोस्ट वेल्युएबल प्रोफेशनल पुरस्कार मिल चुका है। हिंदी अकादमी के पुरस्कार पर प्रतिक्रिया करते हुए उन्होंने कहा कि यह हिंदी में हुई तकनीकी प्रगति और न्यू मीडिया का सम्मान है, जो इन क्षेत्रों में कायर्रत युवाओं को नया जोश और उत्साह प्रदान करेगा। प्रिंट और इलेक्ट्रानिक पत्रकारिता की तुलना में न्यू मीडिया में स्थितियां अधिक चुनौतीपूण्र हैं और इस तरह की मान्यता उन्हें शक्ति और नया हौसला देगी। पत्रकारिता के क्षेत्र में विश्वव्यापी परिवर्तनों और न्यू मीडिया की बढ़ती लोकप्रियता एवं व्यापकता को ध्यान में रखते हुए हिंदी अकादमी ने प्रिंट, इलेक्ट्रानिक और इंटरनेट पत्रकारिता को साथ जोड़कर देखा है, जो एक बहुत महत्वपूर्ण संकेत देता है। यह ट्रेंड आने वाले वर्षों में और मजबूत होगा। (हिंदी अकादमी ने प्रिंट, इलेक्ट्रानिक, ऑनलाइन मीडिया और सूचना प्रौद्योगिकी को साथ जोड़कर 'ज्ञान प्रौद्योगिकी पुरस्कार' शुरू किया है)।

अतीत में राजस्थान पत्रिका, जनसत्ता, होम टीवी, सहारा टीवी आदि से जुड़े रहे श्री दाधीच ने ऐसे समय पर प्रभासाक्षी॰कॉम का विकास किया था जब हिंदी में कंप्यूटर और इंटरनेट परियोजनाएं विकसित करना बहुत मुश्किल था। श्री दाधीच ने 'माध्यम' नामक हिंदी वर्ड प्रोसेसर का भी विकास किया है, जिसकी एक लाख से अधिक प्रतियां पिछले दस वर्षों में डाउनलोड हो चुकी हैं। अब इसका यूनिकोड संस्करण विकसित हो चुका है जो आर्टीफीशियल इन्टेलीजेंस की क्षमता से युक्त है। भारतीय भाषाओं में वेबसाइट निर्माण के लिए निर्मित उनका सॉफ्टवेयर 'वेबसमर्थ' काफी चर्चित हुआ था। याहू, जीमेल आदि में हिंदी यूनिकोड पाठ को लेकर आम यूजर्स को आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए उन्होंने 'संशोधक' नामक इंटरनेट अनुप्रयोग का भी विकास किया था। वे हिंदी के प्रारंभिक ब्लॉगरों में से हैं और 'वाह मीडिया' और 'मतांतर' जैसे उनके ब्लॉगों की विशिष्ट पहचान है।


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