ममता-चित्रा के हाथों आलोक सम्मानित

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सामाजिक सरोकारों के लिए समर्पित रहे पत्रकार स्‍व. वेद अग्रवाल स्‍मृति साहित्‍य-पत्रकारिता सम्‍मान-2010 लब्‍धप्रतिष्‍ठ गजलकार-पत्रकार आलोक श्रीवास्‍तव को प्रदान किया गया। मेरठ के चैंबर हॉल में उत्‍तर प्रदेशीय महिला मंच के रजत जयंती समारोह में ये सम्‍मान आलोक को ममता कालिया और चित्रा मुदगल ने प्रदान करते हुए आलोक श्रीवास्‍तव को दुष्‍यंत के बाद हिंदी गजलों का सर्वाधिक सशक्‍त हस्‍ताक्षर बताया।

स्‍व. वेद अग्रवाल की प्रेरणा से ही उत्‍तर प्रदेशीय महिला मंच की स्‍थापना हुई थी। खचाखच भरे ऑडीटोरियम में आलोक को सम्‍मान प्रदान करने के बाद कथाशिल्‍पी चित्रा मुदगल ने आलोक को गले लगा कर स्‍नेहाशीष दीं। 1971 शाजापुर (म.प्र) में जन्मे आलोक सुपरिचित ग़ज़लकार, कथा-लेखक, समीक्षक और टीवी पत्रकार हैं। आलोक के जीवन का बड़ा हिस्सा मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक नगर विदिशा में गुज़रा है और वहीं से उन्होंने हिंदी में स्नातकोत्तर तक शिक्षा ग्रहण की है। 'रिश्तों का कवि' कहे जाने वाले आलोक की रचनाएं लगभग दो दशक से देश की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रही हैं। वर्ष 2007 में 'राजकमल प्रकाशन दिल्ली' से प्रकाशित आलोक का पहला ग़ज़ल-संग्रह 'आमीन' सर्वाधिक चर्चित पुस्तकों में रहा और कई पुरस्कारों से नवाज़ा गया।

आलोक ने उर्दू के प्रतिष्ठित शायरों की काव्य-पुस्तकों का हिंदी में महत्वपूर्ण संपादन-कार्य किया है साथ ही वे अक्षर पर्व मासिक की साहित्य वार्षिकी (2000 और 2002) के अतिथि संपादक भी रहे हैं। दैनिक भास्कर 'रसरंग' की संपादकीय टीम से जुड़ कर आलोक ने भास्कर के संपादकीय पृष्ठ पर हिंदी और उर्दू-साहित्य के प्रख्यात रचनाकारों पर कॉलम प्रकाश-स्तंभ और भास्कर की ही पारिवारिक-पत्रिका मधुरिमा में कविता और कैलीग्राफ़ी के कॉलम्स दिए जो ख़ासे लोकप्रिय हुए।

देश-विदेश के प्रतिष्ठित कवि-सम्मेलनों और मुशायरों में अपने संजीदा और प्रभावपूर्ण ग़ज़ल-पाठ से एक अलग पहचान स्थापित करने वाले आलोक ने टीवी सीरियल्स और फ़िल्मों के लिए भी लेखन किया है। ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह, अहमद हुसैन-मो.हुसैन और प्रख्यात शास्त्रीय गायिका शुभा मुदगल सहित पार्श्व गायक सुरेश वाडकर, कविता कृष्णमूर्ति, उदित नारायण, अलका याज्ञिक, सुखविंदर और शान जैसे कई ख्यातनाम फ़नकारों ने आलोक के गीत और ग़ज़लों को अपनी आवाज़ दी। पेशे से टीवी पत्रकार आलोक इन दिनों दिल्ली में न्यूज़ चैनल 'आजतक' में प्रोड्यूसर हैं।

उत्‍तर प्रदेशीय महिला मंच का रजत जयंती समारोह देश की महान विभूति महिलाओं को सम्‍मानित कर मेरठ का यादगार आयोजन तो बना ही जिसने महिला मंच के माथे पर भी गौरव का तिलक किया। जिनका अभिनंदन हुआ और जिनके कर कमलों से हुआ, सभी स्‍वनामधन्‍य ऐसी महिलाएं हैं जिनका यशोगान सभ्‍य समाज करता रहेगा। खचाखच भरे सभागार में करतल ध्‍वनि के बीच महिलाओं का सम्‍मान किया गया तो लोगों ने खड़े होकर मंच के प्रयास का सम्‍मान किया।

उत्‍तर प्रदेशीय महिला मंच के कार्यक्रम में 'हिंद प्रभा' से अलंकृत की गई महिलाओं में उत्‍तराखंड के संस्‍कृत विश्‍वविद्यालय की पहली महिला कुलपति डा. सुधा रानी पांडे, पर्वतारोही व पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध डा. हर्षवंती विष्‍ट, निरक्षर होते हुए भी दूसरों की जिंदगी में शिक्षा का उजियारा करने वाली कैला देवी, कला जगत की डा. पूर्णिमा तिवारी, कैंसर के प्रति लोगों को जागरूक करने वाली आर अनुराधा, गरीब बेटियों को शिक्षा की राह पर चलाने वाली लीना दुआ, अपनी कला नृत्‍य से ही बेसहारा व शारीरिक रूप से अक्षम बच्‍चों के जीवन में खुशी लाने वाली दीपिका वर्मा शामिल थीं।

चैंबर ऑफ कॉमर्स में आयोजित इस कार्यक्रम में 'मंच' के उत्‍कर्ष के पच्‍चीस वर्षों के लेखे-जोखे पर आधारित स्‍मारिका 'वरदा-2010' का विमोचन प्रख्‍यात साहित्‍यकार ममता कालिया ने किया। साथ ही दलित और शोषित महिलाओं की मदद के लिए हैल्‍प लाइन की शुरुआत भी की गई।

इस अवसर पर अध्‍यक्षीय भाषण में ममता कालिया ने हर महिला के चैतन्‍य होने पर जोर दिया। अप्रतिम कथाशिल्‍पी चित्रा मुदगल ने संस्‍था के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी महिलाओं के जरिए समाज में जागरूकता फैलाई जा सकती है। शिक्षाविद डा. सुधा पांडेय ने कहा कि आज भी स्‍ित्रयों को पग-पग पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है जबकि क्षमता और सामर्थ्‍य में वे पुरुषों से किसी भी मायने में कम नहीं हैं बल्कि कुछ क्षेत्रों में वे पुरुषों से आगे हैं। कार्यक्रम का संचालन ऋचा जोशी ने और धन्‍यवाद संस्‍था की अध्‍यक्ष डा. अर्चना जैन ने दिया।


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