निर्भीक पत्रकारिता का पुरस्‍कार स्व. विजय को

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: सिद्धार्थ वरदराजन और अर्णब गोस्वामी को वर्ष के श्रेष्ठ पत्रकार का पुरस्कार :  दर्जनों पत्रकारों ने लिया रामनाथ गोयनका एवार्ड : राष्ट्रपति ने कहा- सतही खबरें परोसने से बचे मीडिया : नई दिल्‍ली : उत्‍कृष्‍ट पत्रकारिता के लिये दिया जाने वाला रामनाथ गोयनका अवार्डस फार एक्‍सलेंस इन जर्नलिज्‍म के विजेताओं के एलान के लिये आयोजित समारोह इस बार निर्भीक पत्रकारिता को हृदयस्‍पर्शी श्रद्धांजलि का गवाह बना.

निर्भीक पत्रकारिता के सम्‍मान की कड़ी में गुरुवार शाम ताज पैलेस होटल में एक भव्‍य समारोह में चौथे रामनाथ गोयनका अवार्डस फार एक्‍सलेंस पुरस्‍कार के विजेताओं का एलान किया गया. द इंडियन एक्‍सप्रेस के संस्‍थापक रामनाथ गोयनका की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता की परंपरा की इसी भावना को सलाम करते हुए समारोह में द इंडियन एक्‍सप्रेस के वरिष्‍ठ रिपोर्टर विजय प्रताप सिंह स्‍मृति में रामनाथ गोयनका अवार्ड फार करेज इन जर्नलिज्‍म की भी शुरुआत की गई. इलाहाबाद में हुए बम विस्‍फोट में घायल होने के बाद सिंह का इसी हफ्ते निधन हो गया था. सच्‍चाई की खोज में अप्रतिम साहस दिखाने के लिये सिंह को इस पुरस्‍कार से मरणोपरांत सम्‍मानित किया गया.

सिंह के साथ हुई इस त्रासदी का जिक्र करते हुए द इंडियन एक्‍सप्रेस के मुख्‍य संपादक शेखर गुप्‍ता ने कहा कि आजकल हम एक चीज मान बैठे हैं कि पत्रकार बिना किसी भय या दबाव के अपना काम कर सकते हैं. लेकिन सिंह की मृत्‍यु इस धारणा की सीमाओं को रेखांकित करती है. यह तथ्‍य कि साक्षात्‍कार के लिये एक मंत्री के घर जाना भी जोखिम से खाली नहीं है, हमें इस बात का अहसास कराता है कि अपराध और राजनीति का यह गठजोड़ किस तरह से हमारी स्‍वतंत्रता के लिये खतरा बन चुका है. इसका प्रतिकार निर्भीक पत्रकारिता से ही किया जा सकता है जो इंडियन एक्‍सप्रेस समूह की परंपरा और पहचान है.

राजधानी में हुए इस समारोह में साहस, मूल्‍यों के प्रति प्रतिबद्धता और यथार्थपरकता की इन्‍हीं विशेषताओं का सम्‍मान करते हुए राष्‍ट्रपति प्रतिभादेवी सिंह पाटील ने विजेताओं को पुरस्‍कार प्रदान किए. प्रिंट श्रेणी में द हिन्दू के सिद्धार्थ वरदराजन और इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स में टाइम्‍स नाउ के अर्णब गोस्‍वामी को वर्ष का पत्रकार घोषित किया गया. इन दोनों सम्‍मानों के लिये पुरस्‍कार राशि ढाई ढाई लाख रुपये की है.

इस समारोह में केन्‍द्रीय मंत्री पी चिदंबरम, शरद पवार, कुमारी शैलजा, जितिन प्रसाद, सचिन पायलट और ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया के अलावा भाजपा नेता लालकृष्‍ण आडवाणी और रविशंकर प्रसाद भी मौजूद थे. इसके अलावा नौसेना प्रमुख एडमिरल निर्मल वर्मा, भाकपा के सचिव डी राजा, चुनाव आयुक्‍त एसवाई कुरैशी, यूआईडीएआई के अध्‍यक्ष नंदन नीलकेणि और सांसद दीपेन्‍द्र हुड्डा भी समारोह में शामिल हुए.

सम्‍मान पाने वाली प्रविष्टियां देश के सभी हिस्‍सों से और कई भाषाओं में आई थी. मसलन सुनहरे भविष्‍य का सपना लेकर शहर की ओर पलायन करने वाली झारखंड की आदिवासी युवतियां जो वहां से कुछ और नहीं बल्कि सिर्फ एक कड़वे अतीत के साथ वापव लौटती हैं. ये खबरें विरोध के अनोखे ईजाद करने वाली मणिपुर की माताओं, उजाड़ और बियावान बुंदेलखंड की धरती की सुध लेने के अलावा मुंबई में टीवी रियलिटी शो की भी पड़ताल करती हैं, जहां वास्‍तविकता और निर्मित यर्थाथ के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है.

इसे देखते हुए राष्‍ट्रपति प्रतिभा पाटील ने कहा कि पुरस्‍कार की विविध श्रेणियों से इस बात का पता चलता है कि पत्रकार कितने व्‍यापक फलक पर काम करते हैं. राष्‍ट्र निर्माण और समाज में सकारात्‍मक बदलाव लाने की दिशा में मीडिया एक अहम भागीदार है. साथ ही उन्‍होंने खबरों को सनसनीखेज और सतही तरीके से पेश करने से बचने की भी सलाह दी. उन्‍होंने कहा कि अखबारों को पिछले दिन की टीवी खबरों को दुहराने के बजाय इससे कहीं ज्‍यादा सार्थक और पठनीय सामग्री पेश करनी होगी. वहीं टीवी चैनलों के सामने चौबीस घंटे खबरें परोसने की चुनौती है. इस वजह से कई बार खबरों के साथ खिलवाड़ होता है. इस वजह से मुद्दों का सतहीकरण हो सकता है जबकि कई बार सतही खबरें असली मुद्दों को पीछे धकेलते हुए बड़ी खबर बन जाती हैं.

इस पुरस्‍कार में पिछले तीन साल तीन नई श्रेणियों का समावेश किया गया और इस साल इनके विजेताओं को पुरस्‍कृत किया गया. ये श्रेणियां हैं - मौके पर जाकर की गई रिपोर्टिंग, खोजी पत्रकारिता और व्‍याख्‍यात्‍मक व विश्‍लेषणात्‍मक लेखन. इस मौके पर इंडियन एक्‍सप्रेस समूह की दो किताबों का विमोचन भी हुआ. पहली किताब, आइडिया एक्‍सचेंज में द इंडियन एक्‍सप्रेस के रविवारीय संस्‍करण द संडे एक्‍सप्रेस में छपे दुनियाभर के सर्वश्रेष्‍ठ विचारकों के 47 चुनिंदा साक्षात्‍कारों का संग्रह है जबकि दूसरी किताब 2008-09 के दौरान छपी बेहतरीन खबरों और रिपोर्ताज का संग्रह है.‍

विजेताओं के चयन के लिये गठित ग्‍यारह सदस्‍यीय जूरी में इनफोसिस के मेंटर और संस्‍थापक एनआर नारायणमूर्ति, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता फली एस नरीमन, राज्‍यसभा सदस्‍य एमएस स्‍वामीनाथन, एचडीएफसी के अध्‍यक्ष दीपक पारेख, पूर्व कैबिनेट सचिव नरेश चन्‍द्रा, फिल्‍म निर्देशक श्‍याम बेनेगल, स्‍तंभकार और वरिष्‍ठ टीवी पत्रकार करण थापर, एचटी मीडिया की अध्‍यक्ष और संपादकीय निदेशक शोभना भरतिया, मार्केटिंग परामर्शक रमा बीजापुरकर, महिन्‍द्रा एंड महिन्‍द्रा के निदेशक केसुब महिन्‍द्रा और आईआईएम के पूर्व निदेशक बकुल एच ढोलकिया शामिल थे. पुरस्‍कार समारोह के बाद पैसे लेकर खबरें छापने की प्रवृत्ति पर एक परिचर्चा 'गुड न्‍यूज इज पेड न्‍यूज, केडिबिलिटी इज फार सेल' का भी आयोजन किया गया. साभार : जनसत्ता


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