हरियाणा के कई पत्रकारों ने वापस किए पुरस्‍कार

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: दैनिक जागरण ने अपने पत्रकारों को पुरस्‍कार जमा करने का निर्देश दिया : 21 सितम्‍बर को हरियाणा सरकार ने प्रदान किए थे पुरस्‍कार : हरियाणा सरकार द्वारा बेवजह ही पुरस्कार देना कुछ अखबार संस्थानों को रास नहीं आया। इन संस्थानों के पत्रकारों ने सरकार की ओर से मिले पुरस्कार लौटा दिए हैं। वहीं, दैनिक जागरण प्रबंधन ने भी अपने पत्रकारों से पुरस्कार लौटाने को कहा है। पत्रकारों द्वारा पुरस्कार लौटाने से हरियाणा सरकार की काफी किरकिरी हुई है और अब दांव उल्टा ही पड़ गया है।

दरअसल राज्य सरकार ने चंडीगढ़ और दिल्ली के पत्रकारों को भी पिछले सप्ताह ही पुरस्कार देने की घोषणा की थी, जबकि इन पत्रकारों ने पुरस्कार के लिए आवेदन भी नहीं किए थे। इसके बावजूद सरकार ने इन पत्रकारों को पुरस्कार घोषित कर दिए। ऐसे में कई प्रतिष्ठित पत्रकारों को सरकार की यह योजना रास नहीं आई और उन्होंने पुरस्कार लौटा दिए। उन्हें समझ में ही नहीं आ रहा कि सरकार ने बिना आवेदन किए ही उन्हें किसलिए पुरस्कार प्रदान कर दिए। पुरस्कार लौटाने वाले यह सभी पत्रकार देश के प्रमुख संस्थानों से जुड़े हुए हैं। इन संस्थानों में हिंदुस्तान टाइम्स और इंडियन एक्सप्रेस शामिल हैं।

इन पत्रकारों का मानना है कि पुरस्कारों की आड़ में हरियाणा सरकार पत्रकारों को खरीदना चाहती है। जिसे वे किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। उनका कहना है कि उन्हें तो रोजाना ही पुरस्कार अपनी जनता से मिलता है। जब भी वे जनहित से जुड़ा हुआ कोई मुद्दा उठाते हैं तो जनता उसकी खूब सराहना करती है, यही उनके लिए पुरस्कार के समान है। वहीं, प्रदेश में कुछ ऐसे पत्रकार भी हैं, जिनका नजरिया पुरस्कार मिलने के बाद बदल ही गया है। उन्हें अब हरियाणा सरकार की नीतियां बहुत ही बढ़िया नजर आ रही हैं।

रोहतक के एक प्रेस छायाकार ने तो उस समय हद ही कर दी, जब उसने बाकायदा विज्ञप्ति जारी कर हरियाणा सरकार की तारीफों के पुल ही बांधने शुरू कर दिए। यह प्रेस छायाकार तीन-तीन नेशनल अखबारों को फोटो भेजता है। गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने गत सप्ताह ही राज्य के 150 से ज्यादा पत्रकारों व छायाकारों को पुरस्कार देने की घोषणा की थी। इन पुरस्कारों के लिए वर्ष 2008 में आवेदन आमंत्रित किए गए थे। अब अचानक ही सरकार ने इन पुरस्कारों की घोषणा कर दी ताकि पत्रकार बिरादरी में सहानुभूति हासिल की जा सके। खास बात यह रही कि सरकार ने चंडीगढ़ और दिल्ली में हरियाणा को कवर कर रहे पत्रकारों को भी इस पुरस्कार योजना में शामिल कर लिया।

चंडीगढ़ में 21 सितम्बर को हुए एक समारोह में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा यह पुरस्कार प्रदान किए। यह पुरस्कार हासिल करने के लिए पिछले दो साल से प्रदेश में पत्रकारों के बीच हाय-तौबा मची हुई थी। दरसअल सरकार ने योजना के तहत राशि तय कर रखी थी। जिसे मिलने की चाहत में ही पत्रकार बावले हो चले थे। हरियाणा सरकार ने फिलहाल जो पुरस्कार दिए हैं, वे सरकारी योजनाओं और सरकार के हित को साधने वाले समाचारों से संबंधित हैं। इसलिए प्रदेश के पत्रकारों को इन पुरस्कारों पर इतराना नहीं चाहिए।

पत्रकारिता में गिरावट का ही एक नमूना

इस तमाम मामले पर हरियाणा के वरिष्ठ पत्रकार एवं हैलो हरियाणा साप्ताहिक अखबार के संपादक डा. सतीश त्यागी ने भी अपनी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि हरियाणा सरकार द्वारा पत्रकारों को पुरस्कार देना पत्रकारिता में गिरावट का ही एक नमूना है। बकौल डा. त्यागी यह पुरस्कार हासिल करना किसी भी पत्रकार के लिए शर्म की बात है, क्योंकि जिस भी पत्रकार को सरकार ने पुरस्कार प्रदान किया है, वह भविष्य में कभी भी निष्पक्ष नहीं रह पाएगा। ऐसे में उससे निष्पक्ष पत्रकारिता की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उनका कहना है कि अगर पत्रकारों में अब भी गैरत बची हुई है तो उन्हें हरियाणा सरकार की ओर से मिले पुरस्कारों को तुरंत लौटा देना चाहिए। ऐसे में कहा भी गया है कि सुबह का भूला अगर शाम को वापस आ जाए तो उसे भूला नहीं कहते।

]दैनिक जागरण ने सभी पत्रकारों को दिए निर्देश

वहीं, दैनिक जागरण प्रबंधन को भी हरियाणा सरकार द्वारा अपने यहां कार्यरत पत्रकारों को पुरस्कार देना पसंद नहीं आया। प्रबंधन ने सभी पत्रकारों को मुख्यालय में पुरस्कार जमा कराने को कहा है ताकि आने वाले समय में यह पुरस्कार लौटाए जा सके। दरअसल पुरस्कार हासिल करने वालों में सबसे बड़ी संख्या दैनिक जागरण के पत्रकारों की है।

मुख्यमंत्री ने की थी प्रबंधन की आलोचना

सूत्रों का कहना है कि चंडीगढ़ में हुए पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने समाचार पत्र प्रबंधन की जमकर आलोचना की थी। अपने व्यक्तव्य में उन्होंने पत्रकारिता में आई गिरावट के लिए सीधे तौर पर समाचार पत्रों के प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया था। समाचार पत्रों में समाचार रूपी विज्ञापन प्रकाशित करने पर मुख्यमंत्री ने प्रबंधन को नसीहत तक दे डाली थी। दरअसल यही वह वजह है जिस कारण कुछ प्रबंध संस्थानों ने अपने पत्रकारों को पुरस्कार लौटाने के लिए कह दिया है।दीपक खोखर

रोहतक से दीपक खोखर की रिपोर्ट.


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