मीडिया अवार्ड से सम्मानित, किताबों का लोकार्पण

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Yashpal Singh (left side)यूपी फिल्म फोटो जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन की तरफ से रविवार को मेरठ (उत्तर प्रदेश) में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में दैनिक जागरण, मेरठ के वरिष्ठ पत्रकार यशपाल सिंह समेत विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय 33 हस्तियों को फिल्म और मीडिया अवार्ड-2008 से सम्मानित किया गया। इस मौके पर पत्रकार सौरभ शर्मा द्वारा लिखित किताब 'आज की खबर' का विमोचन भी किया गया। अभिनेता रजा मुराद व निदेशक भावना, कला मंदिर, नई दिल्ली को लाइफ टाइम एचीवमेंट के अवार्ड से नवाजा गया।

Saurabh Sharma (left side)फिल्म और मीडिया अवार्ड-2008 से सम्मानित होने वालों के नाम इस प्रकार हैं- आईजी गुरदर्शन सिंह, अभिनेता आर्यन वैद्य, लेखक व डायरेक्टर राज जालन्धरी, निर्देशक मनोज त्यागी, निर्देशक जयप्रकाश शाह, लाफ्टर चैंपियन आरती कांडपाल, डायरेक्टर विक्की राणावत, निर्माता तरुण राठी, अभिनेत्री मंदिरा कोइराला, अभिनेत्री सीमा सिंह, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दयानंद गुप्ता, एसएसपी मेरठ रघुबीर लाल, एसएसपी नोएडा आरके चतुर्वेदी, एमडी सुभारती यूनिवर्सिटी डॉ. अतुल कृष्ण, एडीएम सिटी महावीर सिंह आर्य, गीतकार अखिलेश मिश्रा, चीफ टाउन प्लानर एमडीए यशपाल सिंह, दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार यशपाल सिंह, फिल्म निदेशक हिमांशु कंसल, पत्रकार सौरभ शर्मा, प्रधानाचार्य थॉमस स्कूल मेरठ श्रीमती एस मोहन, कैमरामैन श्याम परमार, प्रेस छायाकार ज्ञानेश, शल्य चिकित्सक डॉ. अमित जैन, चार्टर्ड अकाउंटेंट ज्योत्सना मदान व महिला खिलाड़ी कनिका तोमर। रंगारंग कार्यक्रम के दौरान गीत, संगीत, नृत्य और कामेडी के कई दौर चले। इस आयोजन में कई गणमान्य लोग मौजूद थे।

Lokarpanकोलकाता से मिली खबर के मुताबिक दैनिक सन्मार्ग के वरिष्ठ उप संपादक अभिज्ञात द्वारा लिखित उपन्यास 'कला बाजार' का लोकार्पण शनिवार को कवि केदारनाथ सिंह और आलोचक विजय बहादुर सिंह ने किया। अभिज्ञात ने बताया कि अमृतसर में रिपोर्टिंग के दौरान उनके मन में इस उपन्यास का खाका तैयार हुआ था। वे उन दिनों 'अमर उजाला' में कार्यरत थे। इस अखबार के एक स्तम्भ 'पड़ाव' के लिए उन्होंने लगभग दो दर्जन ऐसे लोगों से बात की थी जो देश के विभाजन के बाद उस हिस्से के पंजाब से इस पार आये थे। वह हिस्सा विभाजन के बाद पाकिस्तान में चला गया। उस समय उन्होंने जो कुछ सहा और जिया, वह इस उपन्यास में आया है। अभिज्ञात के मुताबिक अमृतसर से जालंधर जब डेस्क पर बुला लिया गया तो उन्होंने जालंधर में ही यह उपन्यास पूरा किया। उसके बाद वे वेबदुनिया डाट काम इंदौर, दैनिक जागरण जमशेदपुर होते हुए कोलकाता सन्मार्ग लौटे। सात साल लगे उन्हें प्रकाशक तलाशने में। इस उपन्यास में उन्होंने विभिन्न कलाओं के बाजार का हिस्सा होने की जोड़तोड़ को निशाना बनाया है। साहित्यकार के बतौर अभिज्ञात कवि के रूप में अधिक जाने जाते हैं। छह कविता संग्रह उनके खाते में हैं। हालांकि उनका एक उपन्यास जो लिव इन रिलेशनशिप पर है, पहले आ चुका है।


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