अतुल को मिला रामेश्‍वरम हिंदी पत्रकारिता पुरस्‍कार

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: पत्रकारिता के समक्ष कई गंभीर चुनौतियां - अ‍रविंद कुमार सिंह : समाज के निर्माण और उत्थान में चौथे स्तंभ का विशेष महत्व होता है। जनहित की पत्रकारिता ही वास्तविक पत्रकारिता है। इसलिए हमारे पत्रकार भाइयों को सामाजिक दायित्व बोध के साथ ही लेखनी चलानी चाहिए। शुक्रवार को रामेश्वरम संस्थान द्वारा स्थापित स्व. रामेश्वर दयाल त्रिपाठी नन्ना की स्मृति में रामेश्वरम हिंदी पत्रकारिता पुरस्कार-10 का सम्मान समारोह झांसी के राजकीय संग्रहालय में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में संस्था के सप्तम पुरस्कार के लिए तहलका पत्रिका के उप कॉपी संपादक अतुल चौरसिया को सम्मानित किया गया। अतुल चौरसिया को यह सम्मान  ख्यातिलब्ध पत्रकार और समारोह के मुख्य अतिथि अरविंद कुमार सिंह द्वारा प्रदान किया गया। कार्यक्रम में सर्वप्रथम संस्थान के अध्यक्ष सुधांशु त्रिपाठी ने संस्था की गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए उक्त पुरस्कार के पुरस्‍कारऔचित्य व वर्तमान परिवेश में उसके महत्व पर प्रकाश डाला। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि अरविंद सिंह ने पत्रकारिता के सामने मौजूद गंभीर संकट पर विस्तार से चर्चा की। यह खतरा तभी टलेगा जब समाज यानी प्रबुद्ध पाठकगण चेतेंगे। उन्होंने रामेश्वरम संस्थान की पत्रकारिता के प्रति समर्पण की भूमिका की तारीफ की।

वरिष्ठ पत्रकार बंशीधर मिश्र ने कहा कि सामाजिक बदलाव के समस्त दायित्व अखबार और पत्रकारों पर नहीं डाले जा सकते हैं। इसके लिए समाज को स्वयं जाग्रत होना होगा, उसी तरह जैसे फ्रांस की राज्यक्रांति के लिए वहां की जनता जागी थी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कैलाश चंद्र जैन ने कहा कि सुधांशु त्रिपाठी द्वारा हिंदी पत्रकारिता को प्रोत्साहित करने का यह प्रयास सराहनीय है। हम सबको उन पर गर्व है।

पूर्वमंत्री हरगोविंद कुशवाहा ने कहा कि रामेश्वरम पत्रकारिता पुरस्कार हिंदी पत्रकारिता को प्रेरित करने के लिए मील का पत्थर साबित होगा। संचालन प्रवीण जैन ने किया। आभार डॉ. इकबाल खान ने जताया।

इस मौके पर कांतिचंद्र सक्सेना, आरएन शर्मा, शिवकेश दुबे, राधारमण शांडिल्य, आरपी मिश्रा, शफीक अहमद मुन्ना, मनोज गुप्ता, सुधीर त्रिपाठी, प्रतीक चौरसिया, सलिल रिछारिया, राजेंद्र यादव, राजेश राय, मनोहर चतुर्वेदी, रामनरेश त्रिवेदी, केआर कृष्णा, सुरेश भार्गव, महेंद्र पाल वर्मा, अखिलेश नारायण त्रिपाठी, रमाकांत पराशर, विवेक वाजपेयी, वीरेंद्र शर्मा आदि मौजूद रहे।


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