पंकज सुबीर और कुणाल को ज्ञानपीठ का नवलेखन पुरस्‍कार

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पंकज सुबीरसीहोर के युवा कहानीकार एवं कवि पंकज सुबीर तथा दिल्‍ली के युवा कथाकार कुणाल सिंह को संयुक्‍त रूप से भारतीय ज्ञानपीठ नवलेखन पुरस्‍कार आज दिया जाएगा. यह पुरस्‍कार पंकज को उनके उपन्‍यास 'ये वो सहर तो नहीं' के लिए दिया जा रहा है. यह पुरस्‍कार भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा युवा साहित्‍यकार को प्रदान किया जाता है. पंकज एवं कुणाल को यह पुरस्‍कार शाम पांच बजे नई दिल्‍ली के प्रगति मैदान में चल रहे पुस्‍तक मेला के सभागार में दिया जाएगा.

पुरस्कार समारोह में देश के शीर्ष आलोचक डॉ. नामवर सिंह, सुप्रसिद्ध कहानीकार चित्रा मुदगल, नया ज्ञानोदय के संपादक रवीन्द्र कालिया भी उपस्थित रहेंगें. भारतीय ज्ञानपीठ ने इस वर्ष को उपन्यास वर्ष घोषित करते हुए यह पुरस्कार किसी युवा लेखक के पहले उपन्यास को दिये जाने का निर्णय लिया था. इसके लिये एक चयन समिति डॉ. नामवर सिंह की अध्यक्षता में बनाई गई थी. जिसमें डॉ. गंगा प्रसाद विमल, रवीन्द्र कालिया, आलोचक डॉ. विजय मोहन सिंह, कथाकार चित्रा मुद्गल, कथाकार अखिलेश शामिल थे. देश भर से प्राप्त पांडुलिपियों में से चयन करके ये पुरस्कार प्रदान किया जाना था. उल्लेखनीय है कि कहानी तथा उपन्यास के क्षेत्र में पहली बार यह पुरस्कार मध्यप्रदेश के खाते में आया है. इससे पहले कविता के लिये यह पुरस्कार मध्यप्रदेश को एक बार मिल चुका है. सुबीर को यह पुरस्‍कार मिलने से सीहोर में खुशी का माहौल है.


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